Jagannath Story in Hindi - जगन्नाथ जी ने कटहल क्यों चुराया

Jagannath Story in Hindi | जगन्नाथ जी ने कटहल क्यों चुराया?

 

Jagannath Story in Hindi: हम सबको पता है की भगवान अपने भक्तो की रक्षा करते हैं लेकिन आपको सायद यह नहीं पता होगा की कभी-कभी भगवान अपने भक्तो को फँसा भी देते हैं और वे ऐसे फँसाते हैं की भगवान न तो कुछ बोल सकता है और न कुछ कर सकता है बिलकुल वैसे ही जैसे भगवान श्री कृष्ण बचपन में माखन चुराते समय किसी और का नाम दे देते थे। लेकिन हाँ एक बात और भी है कि जब भगवान अपने भक्तो को फंसाते भी हैं तो उसमे भी भगवान और उनके भक्त के बीच एक मधुर सुख का ही आदान-प्रदान होता है और उसे केवल भगवान और उसके भक्त ही समझ सकते हैं। पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की ऐसी सरारत वाली लीलाएं सिर्फ भगवान श्री कृष्ण ही नहीं करते, ऐसे कार्य में हमारे जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ जी भी पीछे नहीं है। आज हम आपको भगवान जगन्नाथ जी की एक ऐसी ही कहानी सुनाने वाली हूँ जिसे सुनकर आपका ह्रदय भी भक्ति रस से भर जाएगा।

 

Jagannath Story in Hindi 

यह कथा एक ऐसे भक्त की है जो रहते तो है जगन्नाथ पूरी धाम में लेकिन भगवान जगन्नाथ के साथ उनका आदान-प्रदान एक मित्र के रूप में हैं जिनके साथ कई बार भगवान जगन्नाथ एक बालक के रूप में खेलने भी आते हैं और कभी-कभी उनकी सेवा करने के लिए भी आते हैं। हम बात कर रहे भगवान जगन्नाथ के परम भक्त रघुदास की।

 

रघु दास अत्यन्त सरल और बालक के समान स्वभाव वाले भक्त थे। वह पूरी में सींग दुआर के सामने रहते थे। उनकी भक्ति और जगन्नाथ जी के साथ उनके साख्य भाव की आदान-प्रदान के विषय में सभी लोग जानते थे। सभी लोग उन्हें आदर और सम्मान देते थे। लेकिन रघुदास को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए तो उनकी दुनिया बस जगन्नाथ जी तक ही सीमित थे।

 

एक बार रात के समय जगन्नाथ जी रघुदास के पास आते हैं और कहते हैं, “रघु, चलो आज हम राजा के बगीचे से कटहल चुराते हैं और फिर हम दोनों उसका आस्वादन करेंगे।” जगन्नाथ जी की बात सुनकर रघु ने कहा, “लेकिन आपको कटहल चुराना क्यों है? अगर आपको कटहल खाना है तो मैं आपके लिए एक बहुत अच्छा कटहल का फल ले आता हूँ।”

 

यह बात सुनकर जगन्नाथ जी ने कहा, “इस प्रकार तो प्रतिदिन मुझे सारी चीज़े मिलती रहती है। मुझे किसी और चीज़ की कोई आवश्यकता नहीं। वास्तव में मेरे पास सब कुछ है। मइया यशोधा मुझे इतने प्रेम से माखन खिलाती है लेकिन फिर भी मैं दुसरो के घर जाकर माखन चुराता हूँ पता है क्यों? क्यूंकि चुराकर खाने में जो आनंद आता है न ऐसा आनंद आसानी से मिलने वाले चीज़ो से नहीं मिलता और इसलिए मैं चाहता हूँ कि आज मैं तुम्हे भी इस आनंद की अनुभूति करवाऊँ।”

 

रघुदास ने कहा, “अरे नहीं नहीं, मुझे ऐसी कोई अनुभूति नहीं करनी। यदि राजा को इस बात का पता चल जाएगा तो वह आपको तो कुछ नहीं कहेंगे लेकिन मेरा क्या होगा यह सोचा आपने।”

 

इस प्रकार रघुदास के मना करने के बाद भी जगन्नाथ जी बार-बार उन्हें कटहल चुराने के लिए कहते रहे। आखिरकार अब बेचारे रघुदास क्या करते उन्हें थक हार भगवान जगन्न्थ जी की बात माननी पड़ी और इस प्रकार भगवान जगन्नाथ और उनके नैष्ठिक भक्त रघुदास की सेना चल पड़ी राजा के बगीचे में कटहल चुराने के लिए।

 

 

फिर दोनों पहुँचे राजा के बगीचे में। जगन्नाथ जी ने रघुदास को कहा, “देखो रघु यह कटहल का पेड़ बहुत बड़ा है और इस पर बड़े बड़े फल लगे हुए हैं। ऐसा करो तुम इस पेड़ पर चढ़ जाओ मैं यहाँ निचे खड़ा हूँ। तुम ऊपर से कोई अच्छा वाला फल तोड़ लो और उसको निचे फेंक देना और निचे से मैं उसे पकड़ लूंगा। उसके बाद तुम निचे आ जाना और फिर किसी को पता न चले हम दोनों यहाँ से भाग जाएंगे।”

 

रघुदास ने ठीक वैसा ही किया जैसे जगन्नाथ जी ने उन्हें कहा। रघुदास पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ से एक अच्छा सा बड़ा सा कटहल का फल तोड़ लिया और निचे आवाज लगाई , “जगन्नाथ क्या आप तैयार हो? मैं कटहल का फल निचे फेंक रहा हूँ उसे पकड़ लेना।” जगन्नाथ ने कहा, “हाँ हाँ, मैं यहीं पर हूँ तुम फेंको उसे।”

 

यह सुनकर अब रघुदास ने फल निचे फेंक दिया और सोचा कि निचे जगन्नाथ जी उसे पकड़ लेंगे। रघुदास ने कटहल निचे फेंकी और तभी उन्होंने देखा की जगन्नाथ जी तो निचे नहीं हैं। धड़ाम से वह कटहल का फल निचे जमीन पर गिरा। जोर से आवाज आई और फल दो हिस्सों में टूट गया।

 

जब राजा के सिपाहियों ने यह आवाज सुनी तो उन्हें पता चल गया कि जरूर कोई कटहल का फल चुराने के लिए बगीचे में घुस आया है। वे सब दौड़ते-दौड़ते वहाँ आ गए और जब यहाँ का दृश्य देखा तो उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था। उन्होंने देखा कि बड़ा सा कटहल का फल निचे जमीन पर गिरा हुआ है और उस पेड़ पर रघुदास बैठे हुए हैं।

 

सिपाहियों ने तुरंत जाकर राजा को सुचना देते हुए कहा, “हे राजा, हमें आश्चर्य से आपको यह सूचित करना पाह रहा हैं कि आपके बगीचे में आज रघुदास कटहल का फल चुराने के लिए आए थे और अभी वे वहाँ पेड़ पर बैठे हुए हैं।”

 

यह सुनकर राजा को भी आश्चर्य हुआ कि रघुदास कटहल हराने के लिए कैसे आ सकते हैं? और यह सोचते हुए राजा तुरंत वहाँ पहुँच गए। वहाँ जाकर उन्होंने देखा तो सचमे रघुदास पेड़ पर बैठे हुए थे और निचे कटहल का टुटा हुआ फल पड़ा हुआ था। राजा ने रघुदास को निचे आने के लिए कहा।

 

जब रघुदास पेड़ से निचे आए तो राजा ने उनसे कहा, “हे मेरे प्रिय और परम भक्त रघुदास अगर आपको कटहल खाने की इच्छा थी तो आपने इतनी रात को यहाँ मेरे बगीचे में आने का कष्ट क्यों किया? यदि आप कहते तो मैं इस फल को आपके घर पर भिजवा देता।”

 

अब रघुदास क्या उत्तर देते। उन्होंने राजा को जगन्नाथ जी का सारा वृतान्त कह सुनाया कि किस प्रकार जगन्नाथ जी उन्हें चोरी करने के लिए कहा था और फिर वे ही यहाँ से गायब हो गए।”

 

 

यह सुनकर राजा और सिपाही सभी लोग हँसने लगे। सभी लोगों ने रघुदास के साथ भगवान जगन्नाथ की इस मधुर लीला का आनंद लिया और अनेक दिनों तक भगवान की चोरी की कथा की चर्चा पुरे नगर में होती रही।

 

तो दोस्तों आपको यह कहानी “Jagannath Story in Hindi” कितनी हद तक सही लगती है और आपका इसके बारे में क्या विचार हैं आप कमेंट करके जरूर बता सकते हैं।

 

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