जादुई टोपी की कहानी | The Magic Cap Story in Hindi

जादुई टोपी की कहानी | The Magic Cap Story in Hindi

जादुई टोपी की कहानी The Magic Cap Story in Hindi

 

जादुई टोपी की कहानी 

मंकेश बहुत ही होशियार लड़का। उसके पापा की मिठाई की दुकान थी। मंकेश केवल आठ साल का था लेकिन वहअपने पापा की बहुत मदद करता था। अक्सर दुकान में बैठकर वह खुद ही मिठाईया बेचता था और पापा से दुगना फ़ायदा कमाता।

 

मंकेश हर समय फायदे के बारे में सोचता रहता था। वह मिठाई बेचकर पैसे तो लेता ही था और साथ में कुछ चीज़े भी लेता था जैसे कभी किसी से टॉफी लेता तो कभी किसी से बिस्कुट लेता। दुकान के लिए न सही वह अपने लिए फायदा तो कर ही लेता।

 

एक दिन, उसके मम्मी और पापा को शहर से बाहर जाना था। उन्होंने मंकेश को बुलाया और बोले, “मंकेश, मुझे और तुम्हारी मम्मी को दो दिन के लिए कल शहर जाना है दुकान के लिए कुछ सामान खरीदना है और हम तुम्हारी नानी से भी मिलकर आएँगे।”

 

मंकेश भी उनके साथ जाने के लिए ज़िद करने लगा लेकिन मंकेश के पापा ने उसे जाने के लिए मना किया और कहा, “तुम यहीं घर पर रहो बेटा। तुम्हारे चाचा देखभाल करने आएँगे शाम को उनके साथ अच्छे से रहना और फिर तुम्हे दुकान भी तो संभालनि है न। तुम तो मुझसे भी ज़्यादा बेहतर दुकान संभाल सकते हो। अब अगले दो दिन के लिए तुम ही दुकान के मालिक हो।”

 

यह सुनकर मंकेश बहुत खुश हो गया और कहा, “ठीक है मम्मी-पापा आप दोनों जाइए मैं यहाँ सब संभाल लूँगा। आप बेफिक्र होकर जाइए। वापस आते समय मेरे लिए कुछ लाना न भूलिएगा।”

 

अगली सुबह जल्दी ही मम्मी-पापा चले गए। मंकेश ने कुछ ही दुकान खोली। सारादिन दुकान में बैठने के बाद वह घर आ गया। हाथ-मुँह धो कर वह बैठा ही था कि उसके चाचा वहाँ आ गए।

 

इस तरह दो दिन गुजर गए। उस दिन दो पहर तक मंकेश के मम्मी-पापा आने वाले थे। उसके चाचा जी को सुबह ही अपने काम के लिए जाना था। उन्होंने मंकेश को बुलाया और उसे एक टोपी दी। सिर्फ एक टोपी देखकर वह निराश हो गया लेकिन उसने अपने चहरे पर दिखाया नहीं।

 

मंकेश बोला, “धन्यवाद चाचा जी। अच्छी है यह टोपी।” उसके चाचा जी बोले, “मैं जानता हूँ बेटा तुम क्या सोच रहे हो लेकिन यह कोई मामूली टोपी नहीं है मेरे बच्चे, यह एक जादुई टोपी है। रुको मैं अभी तुम्हे इसका जादू दिखाता हूँ।” यह कहकर चाचा ने टोपी मंकेश के सर पर रखी फिर उतार दी।

 

 

टोपी जैसे उतारी टोपी में से एक सोने का सिक्का निकला। मंकेश ने जैसे ही सोने का सिक्का देखा वह ख़ुशी से उछल पड़ा और कहा, “चाचा जी यह तो कमाल हो गया! अब मम्मी-पापा को कोई भी परेशानी नहीं होगी।”

 

मंकेश के चाचा जी बोले, “लेकिन ध्यान रखना मंकेश, इसका इस्तेमाल हप्ते में तीन बार से ज़्यादा न करना अगर उससे ज़्यादा इस्तेमाल किया तो तुम्हारी लंबाई कम हो जाएगी।” मंकेश बोला, “हाँ चाचा जी मैं ध्यान रखूँगा।”

 

चाचा जी के जाते ही मंकेश ने टोपी को एक और बार इस्तेमाल किया। उसमे से फिर एक सोने का सिक्का निकला। अब तक दो बार टोपी का इस्तेमाल हो चूका था। मंकेश ने टोपी को अलमारी में संभलकर रख दिया और सोचा मम्मी-पापा के आने के बाद उनके सामने जादू करके दिखाएँगे।

 

टोपी रखकर वह कुछ देर पढाई करने बैठ गया। उस दिन वह दुकान भी नहीं गया। मंकेश पढ़ने में तो बैठ गया लेकिन पढाई में उसका बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था। उसका सारा ध्यान था टोपी पर। उसने टोपी को कुछ और बार इस्तेमाल करने का सोचा। लेकिन फिर उसके चाचा जी की बात याद आ जाती है।

 

मंकेश सोचने लगा, “अगर मेरी लंबाई थोड़ी कम हो भी गई तो क्या हुआ मैं तो फिरसे लंबा हो सकता हूँ। अभी मेरी उम्र ही क्या है।” यह सोचकर उसने टोपी बाहर निकाली और उसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

 

मंकेश टोपी पर जादू करता तो करता ही गया। कुछ ही देर में वहाँ सोने के सिक्को का ढेर लग गया। कुछ देर तक जादू करने के बाद जब वह रुका तो उसने देखा वहाँ बहुत सारे सिक्के जमा हो गए हैं।

 

टोपी को इस्तेमाल करने के बाद उसने फिरसे टोपी अलमारी में रख दी और वापस पढ़ने के लिए गया। वह अपनी कुर्सी और टेबल पर पढ़ने के लिए गया और कुर्सी पर बैठने जा रहा था। लेकिन उसकी लंबाई इतनी कम हो चुकी थी कि वह कुर्सी पर बैठ ही नहीं पा रहा था। उसकी लंबाई किसी छोटे बच्चे जितनी हो गई थी।

 

 

मंकेश अब डर गया लेकिन वह कुछ कर ही नहीं सकता था। वह सोचता ही रह गया की क्या उसकी लंबाई कभी बढ़ेगी या नहीं? मंकेश बहुत पछताने लगा कि उसने अपनी चाचा जी की बात न मानकर बहुत बड़ी गलती कर दी।

 

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