घमंडी बतख रानी की कहानी | Ghmandi Batakh Rani Story in Hindi

घमंडी बतख रानी की कहानी | Ghmandi Batakh Rani Story in Hindi

 

Ghmandi Batakh Rani Story in Hindi

 

-:घमंडी बतख रानी की कहानी:-

एक बार की बात है, एक झील में एक बतख रानी अपने दोस्तों के साथ रहा करती थी। बतख स्वभाव में बहुत ही ईर्षालु और घमंडी थी। वह हर वक्त कहती, “मैं इस झील की सबसे खूबसूरत बतख हूँ। मेरा रंग सबसे ज़्यादा सफ़ेद है।”

 

उसके दोस्त हमेशा उससे कहते कि अपने रूप पर घमंड न करो हम सबका रंग सफ़ेद ही तो है। लेकिन बतख रानी तो किसी की भी नहीं सुनती थी। वह अपने आपको बहुत ही खूबसूरत मानती थी।

 

उस झील के किनारे एक बहुत ही खूबसूरत मोर आकर रहने लगा था। मोर के पंख बहुत ही बड़े और खूबसूरत थे और बारिश आते ही वह नाचने लगता था। झील के सभी बतखें उसका नाच देखकर सम्मोहित हो जाती है।

 

जहाँ सभी बतखें मोर को पसंद करने लगी वहीं बतख रानी मन ही मन मोर से इर्षा करने लगी।  उसने सोचा की उसे कुछ करना चाहिए नहीं तो सारे बतख मोर को पसंद करने लगेंगे।

 

एक दिन बतख रानी अपने एक चित्रकार मित्रा चूहे के रंगो के दुकान में जाती है। जब चूहा बतख रानी के लिए चाय बनाने अंदर जाता है तो रानी फटाफट दो-तीन रंग उसके दुकान से चुरा लेती है और अपने बैग में रख लेती है।

 

 

थोड़ी देर चूहे से बातचीत करके वह घर लौट आती है। रानी रात होने की प्रतीक्षा करने लगती है। रात होते ही वह सब रंगो का घोल बनाने लगती है और अपने पंखो पर लगाने लगती है। अँधेरा होने की बजह से वह रंगो को पहचान नहीं पाती।

 

रंग लगाने के बाद उसने कहा, “अब मुझे सबसे सुंदर पक्षी बनने से कोई नहीं रोक सकता। मेरे पंख सबसे सुंदर होंगे। रानी सब रंगो को अपने पंखो पर लगाकर सो जाती है।

 

सुबह जब वह उठती है। सुबह जब वह उठती है तो सभी बतखें उस पर हँस रही होती है। झील की सारि बतखें उसका मजाक उड़ाने लगी। तभी मोर भी वहाँ आ जाती है और वह भी बतख रानी को देखकर हँसने लगता है।

 

रानी को कुछ समझ नहीं आता और वह अपनी परछाई पानी में देखती है। खुदको देखते ही उसने कहा, “अरे नहीं मैं काली कैसे हो गई? यह क्या हो गया मेरे पंखो को।” बतख रानी जोर-जोर से रोने लगी। इस तरह रानी को अपने कर्मो का फल भी भुकतना पड़ता है।

 

 

अपनी इर्षा और जलन की बजह से उसने अपने सुंदर सफ़ेद पंख भी खो दिए।

 

शिक्षा – हमें दुसरो से कभी भी इर्षा और जलन नहीं करनी चाहिए। भगवान ने सब को कुछ न कुछ गुण दिए हैं हमें उसकी प्रशंसा करनी चाहिए और दुसरो से कभी भी इर्षा और तुलना नहीं करना चाहिए।

 

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