चावल के दस दाने | Chawal Ke Das Dane Hindi Kahani

चावल के दस दाने  Chawal Ke Das Dane Hindi Kahani

 

चावल के दस दाने हिंदी कहानी

 

एक राज्य था। उसमे राजा के कर्मचारी प्रत्येक वर्ष लोगों से चावल एकत्रित करते और राजसी गोदाम में जमा कर देते। कई सालो तक चावल की फसल अच्छी हुई।

 

राज्य  के लोग लभगग सारा चावल ही लोगों को दे देते थे और हमेशा लोगों के पास अपने खाने भर ही बचता था। राजा कहता, “मैं तुम्हारे लिए चावल बचाकर रख रहा हूँ कभी फसल बुरी हुई तो मैं तुम्हे चावल वापस दे दूंगा।

 

एक साल अकाल पड़ा और चावल की फसल अच्छी नहीं हुई। लोगों के पास न राजा को देने के लिए कुछ चावल था और न ही अपना पेट भरने के लिए। राजा के मंत्रियो ने राजा से बहुत आग्रह किया बहुत समझाया।

 

मंत्रियो ने राजा को याद दिलाते हुए कहा, “महाराज आपके पास जो अनाज जमा है क्यों न उसे लोगों में बाँट दिया जाए। आपने ऐसा वादा भी किया था।” राजा बोला, “नहीं नहीं, क्या पता यह अकाल कितने दिन तक चले।”

 

समय निकलता गया। लोग भूख से बेहाल हो गए लेकिन राजा ने चावल नहीं बाँटा। एक दिन राजा ने महल में अपने दरवारियो को दावत देने का आदेश दिया। उसका मानना था कि एक राजा को दावत देते रहना चाहिए अकाल हो तब भी।

 

दावत के लिए गोदाम से दो बोरी चावल निकाले गए और हाथी पर लादकर राजमहल पहुँचाया गया। रास्ते में राधा नाम के एक लड़की ने देखा कि बोरे के एक छेद में से चावल निकल रहे हैं। राधा भागकर उस तरफ पहुँची और अपने चुनरी में चावल इकट्ठा करती हुई हाथी के साथ-साथ चलने लगी।

 

 

राधा बहुत चतुर थी। उसने एक योजना बनाई। वह राजा के महल में पहुँची। वहाँ दरवाजे पर खड़ा सिपाही चिल्लाया, “रुक जाओ, तुम चावल चुराकर कहाँ ले जा रही हो।” राधा बोली, “मैं चोरी नहीं कर रही हूँ यह चावल तो एक बोरे में से गिर रहा था मैं इसे राजा को लौटाने आई हूँ।”

 

जब राजा ने उस लड़की की बात सुनी तो उसने राधा से मिलना चाहा। राजा ने राधा से कहा, “तुमने मेरा चावल लौटाया है मैं तुम्हे इनाम देना चाहता हूँ। तुम जो मांगोगी तुम्हे मिलेगा।’ राधा बोली, “महाराज, मुझे इनाम नहीं चाहिए लेकिन अगर आप कुछ देना ही चाहते हैं तो मुझे चावल के दस दाने दे दीजिए।’

 

राजा बोला, “केवल दस दाने! लेकिन मैं तुम्हे कोई बड़ा इनाम देना चाहता हूँ। आखिर में एक राजा हूँ।’ राधा ने कहा, “ठीक हैं, अगर आपको इसी से ख़ुशी मिलती है तो मुझे यह इनाम चाहिए आज आप आप मुझे चावल के दस दाने दें फिर आप दस दिन तक हर रोज पिछले दिन दिए गए दानो की दस गुना दाने देंगे।”

 

राजा ने कहा, “अभी भी तुम बहुत कम मांग रहे हो खेर तुम्हे मिल जाएगा।” तो उस दिन राधा को चावल के दस दाने भेट किए गए। अगले दिन उस चावल के दस दाने भेट किए गए। तीसरे दिन उसे चावल के एक हज़ार दाने दिए गए। अब राधा के पास कुल मिलाकर एक हज़ार एक सौ दस दाने हो गए।

 

राजा ने सोचा, “यह लड़की ईमानदार तो है पर समझदार नहीं। अगर वह अपने चुनरी में जमा किये चावल ले जाकर ले जाती तो ज़्यादा फायदे में रहती।” चौथे दिन राधा को चावल के दस हज़ार दाने मिले यानि दो कटोरे भर चावल। पाँचवे दिन उसे चावल के एक लाख दाने मिले यानि चार छोटी थैलिया भरकर चावल। छटवे दिन उसे चावल के दस लाख दाने दिए गए जिससे की एक बड़ी बोरी भरी जा सकती थी। सातवे दिन राधा को चावल के एक करोड़ दाने दिए गए मतलब दस बड़ी बोरियां। यह उसे दस राजसी हिरणों पर बाँधकर भेजी गई। आठवे दिन राधा को चावल की सौ बोरियां भेजी गई, सौ बोरियां जिसमे दस करोड़ दाने थे। बोरियों को पचास बड़े बैलो पर लादकर भेजना पड़ा।

 

अब राजा बहुत चिंतित हो गया। वह सोचने लगा, “चावल के दस दाने तो सचमुच बहुत बढ़ गए लेकिन एक अच्छे राजा की तरह मैं अपना वादा अंत तक निभाऊँगा।” नौवे दिन राधा को गुदामो का सारा चावल भेजा गया यानि सौ करोड़ दाने। राजा के पास देने को अब और चावल बचा ही नहीं था।

 

 

अंत में राजा ने राधा से कहा, “मेरे पास अब तो कुछ बचा ही नहीं है लेकिन तुम इतने चावल का करोगी क्या?” राधा ने कहा, “मैं इसे सभी भूखे लोगों में बाँट दूंगी और मैं एक बोरा भरकर आपको भी दूंगी लेकिन आपको वचन देना होगा कि अब से आप उतना ही चावल लेंगे जितने की आपको आवश्यकता हैं।” राजा ने कहा, “मैं वादा करता हूँ।”

 

उसके बाद से राजा समझदार बन गया जैसा की सभी राजाओ को होना चाहिए।

 

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