बदसूरत बत्तख की कहानी | The Ugly Duckling Story in Hindi

बदसूरत बत्तख की कहानी | The Ugly Duckling Story in Hindi

The Ugly Duckling Story in Hindi

 

बदसूरत बत्तख की कहानी | The Ugly Duckling Story in Hindi

बदसूरत बत्तख की कहानी

गर्मियों की सुनहरी दो पहर थी। माँ बत्तख ने पेड़ के निचे झील के पास अंडे देने को अच्छी जगह ढूंढी। उसने पाँच अंडे दिए। अचानक उसने देखा एक अंडा दूसरे अंडो से अलग है। उसे चिंता होने लगी। उसने उनके फूटने तक का इंतजार किया।

 

एक सुबह आखिरकार एक के बाद एक अंडे टूटने लगे। उन्होंने कहा, “पिप पिप।” सारे अंडे जीवित हो गए थे और छोटी बत्तख ें अपना सिर बाहर निकाल रही थी बड़ी सी दुनिया में। सब टूटे सीबाई एक अंडे के।

 

माँ बत्तख ने कहा, “ओह! कितने प्यारे बच्चे है मेरे। मैं कितनी किस्मत वाली हूँ। पर इस पाँचवी वाली को क्या हुआ।” बत्तख चिंतित थी। वह उस अंडे पर बैठ गई और उसे जितनी गर्माहट चाहिए थी उसने दी। बत्तख ने कहा, “यह मेरा सबसे सुंदर बच्चा  होगा क्यूंकि इसे फूटने में इतनी देर जो लग रही है।

 

एक सुबह जब अंडा टुटा तो उसमे से एक बहुत ही बदसूरत बत्तख निकली। यह बत्तख अपने बाकि भाई-बहनो से अलग था। यह काफी बड़ा था और बदसूरत भी।

 

माँ बत्तख ने कहा, “यह बत्तख तो बाकि बत्तख ों से बिलकुल अलग है। यह बच्चा तो सबसे ज़्यादा बदसूरत है।” माँ बत्तख यह देखकर हैरान हो गई और बहुत उदास हो गई। माँ बत्तख ने उम्मीद की कि सायद एक दिन यह अपने भाई-बहनो जैसा हो जाए।

 

 

दिन बीतते गए लेकिन वह  बत्तख बदसूरत ही रहा। उसके सारे भाई-बहन उसका मजाक उड़ाते थे और उसके साथ खेलते नहीं थे। वह बच्चा बहुत उदास हो गया। उसने झील के पास जाकर अपनी परछाई को देखा।

 

उस बच्चे ने सोचा कि वह अपने परिवार को छोड़ देगा और कहींजंगल में चला जाएगा। वह बच्चा घने जंगल में अकेला भटकने लगा। जल्दी ही जब सर्दिया आ गई हर तरफ बर्फ छा गई। बच्चा उदास था और ठंड से काँपने लगा। उसके पास खाने की लिए और खुदको गर्म रखने के लिए कुछ नहीं था।

 

वह बत्तख ों के परिवार के पास गया। उन्होंने उसे भगा दिया। वह मुर्गी के घर में रहने लगा। वहाँ पर मुर्गियों ने उसे चोंच मारी तो वह वहाँ से भी भाग गया। उसे रास्ते में एक कुत्ता मिला। कुत्ते ने उसे देखा और वह वहाँ से चला गया।

 

बदसूरत बत्तख ने सोचा, ‘मैं इतना बदसूरत हूँ कि कुत्ता भी मुझे खाना नही चाहता। उदास होकर बदसूरत बत्तख फिरसे जंगल की तरफ जाने लगा। वहाँ पर उसे एक किसान मिला जो उसे अपनी पत्नी और बच्चे के पास ले गया पर वहाँ भी एक बिल्ली ने उसे परेशान किया तो उसने उसका घर भी छोड़ दिया।

 

जल्दी ही बसंत आया और सब कुछ फिरसे ताजा और हरा हो गया। चलते-चलते उसे एक नदी नजर आई। नदी के पानी को देखकर वह बहुत खुश हुआ। वह नदी के पास गया जहाँ उसने एक सुंदर राजहंसी को देखा। उसे देखते ही उसे उससे प्यार हो गया पर उसे अपने आप पर शर्म आती थी इसलिए उसने अपना सिर झुका लिया।

 

जब उसने अपना सिर पानी के तरफ किया और अपनी परछाई देखि और वह चौंकता रह गया। अब वह बदसूरत नहीं रहा। वह एक सुंदर जवान राजहंस में बदल गया था। अब उसे अहसास हुआ कि वह अपने भाई-बहनो से अलग दीखता था क्यूंकि वह एक राजहंस था और वह बत्तख थे।

 

 

राजहंस ने उस खूबसूरत हंसनि से शादी की जिससे उसे प्यार हो गया था और फिर वह खुशी-खुशी रहने लगे।

 

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