अस्थियों को गंगा में क्यों प्रवाहित किया जाता है जानिए इसके पीछे की असली कहानी

अस्थियों को गंगा में क्यों प्रवाहित किया जाता है जानिए इसके पीछे की असली कहानी

अस्थियों को गंगा में क्यों प्रवाहित किया जाता है: सनातन धर्म में पौराणिक काल से ही यह परम्परा रही है कि मृत्यु के बाद जब मनुष्य का अंतिम संस्कार किया जाता है तब मृत व्यक्ति की अस्थियों को संचारित कर उसे गंगा जल में प्रवाहित यह विसर्जित किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि मृत व्यक्ति के अस्थियों को गंगा जल में बहाने के पीछे क्या बजह है या क्या कहानी है अगर नहीं पता तो हम आज आपको इसी के पीछे की कहानी सुनाने वाली हूँ।

(अस्थियों को गंगा में क्यों प्रवाहित किया जाता है जानिए पूरी कहानी)

गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर आई हैं। हिंदू धर्म में इस नदी को बेहद पवित्र माना गया है। इस महान नदी को गंगा देवी का दर्ज पप्राप्त है। माना जाता है की गंगा श्री हरी विष्णु के चरणों से निकलती है और भगवान शिव के जटाओं में आकर बसी है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापो का नाश हो जाता है। माना जाता है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है कि उसके अस्थियों को गंगा में ही विसर्जित किया जाए।

 

सनातन धर्म की मान्तया के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा के शांति के लिए मृतक की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करना उत्तम माना गया है। गंगा में अस्थियों के विसर्जन के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है की मृतक की दाह संस्कार के बाद अगर उसकी अस्थियां जब तक किसी पवित्र नदी में विसर्जित नहीं की जाती है तब तक इंसान के आत्मा को शांति नहीं मिलती।

 

यह भी माना जाता है कि अगर किसी कि मृत्यु गंगा के समीप होती है तो उसे मनोप्रान सीधे बैकुण्ठ यानि स्वर्ग नसीब होता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु गंगा से दूर होती है या किसी अन्य देश में होती है तो उसके अस्थियों को विसर्जन करने के बाद भी स्वर्ग पहुँचता है।

 

पद्मपुराण में कहा गया है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु गंगा में होती है उसके सभी पापो का क्षण हो जाता है और श्री हरी के चरणों में स्थान प्राप्त करता है। महाभारत की एक मान्तया के अनुसार जब तक गंगा में व्यक्ति की अस्थिया रहती है तब तक वह स्वर्ग का अधिकारी होता है।

 

 

शास्त्रों के अनुसार मृत शरीर को दफ़नाने का नहीं बल्कि जलाने का रिवाज है और कई लोगों के मन में यह पप्रश्न भी जरूर आते हैं कि क्यों हम अंतिम संस्कार जैसी रीतियों को निभाते है और यदि निभाते भी हैं तो उसके बाद शरीर की बची हुई राग को हम गंगा में क्यों बहा देते हैं। वह संबंधी, जो अब इस दुनिया में नहीं रहा उसके जाने के बाद भी हमारा उसके साथ कहीं न कहीं मोह बंधा रहता है इसलिए कभी-कभी मन में आता है कि उसके जाने के बाद उसके शरीर की हुई राग ही उसकी एक आखरी निशानी है। अगर उसे भी हम नदी में बहा दे तो हमारे पास क्या बचता है? लेकिन रिवाज तो रिवाज है जिसे हमें निभाना ही होता है। हमारी संस्कृति ही हमें शास्त्रीय बातों को जीवन में अवल करने का पाठ पढ़ाती है।

 

इन सभी प्रश्नो का उत्तर सिर्फ एक कहानी में है और यह कहानी अति प्राचीन काल की एक व्यक्ति की है जो काफी निर्दई था। उसने जीवनभर न तो कोई अच्छा कार्य किया था और न ही वह करना चाहता था। वह अपने परिवारवालों के साथ अन्य लोगों को बहुत परेशान करता। उसके जीवन में सायद पुण्य नामावली का कोई अर्थ नहीं था इसलिए वह केवल पाप ही कमाता था।

 

एक दिन अचानक वह पास के जंगल में गया जहाँ वह एक बाघ का शिकार बन गया। उसके मरने के तुरंत ही बाद यमराज के कुछ सेवक उसे लेने वहाँ पहुँच गए और सीधा यमलोक ले गए। अब वहाँ कुछ बचा था तो उसका मृत शरीर जिसे काफी हद तक तो बाघ ही खा गया था। लेकिन बचा हुआ कुछ हिस्सा अन्य जानवरों का भोजन बना। इसी बीच कुछ उड़ने वाले जीव भी भोजन के तलाश में उस मृत शरीर के पास पहुँचे। अचानक एक जीव मृत व्यक्ति के टुकड़े को अन्य जीवों से छुपाता हुआ आकाश में उड़ गया। लेकिन उसके ठीक पीछे दूसरा जीव भागा और दोनों में उस हड्डी की एक टुकड़े को हासिल करने का संघर्ष होने लगा।

 

इस बीच यमलोक का भी दृश्य कुछ और ही था। वहाँ यमराज के सेवक चित्रगुप्त दयारा उस व्यक्ति के पापो का हिसाब लगाया जा रहा था। चित्रगुप्त एक-एक करके यमराज को व्यक्ति के पापो का विवरण दे रहे थे जिसके आधार पर उसे बिभिन्न नर्क हासिल होने की आशंका जताईजा रही थी। तभी अचानक धरतीलोक पर जहाँ उस व्यक्ति की मृत शरीर की हड्डी के लिए वह दो जीव लड़ रहे थे, अचानक उसके मुँह से वह हड्डी गिर गई और सीधा गंगा नदी में जाकर गिरी।

 

 

गंगा नदी में हड्डी के पवित्र होते ही उस इंसान की सारे पाप धूल गए और उसे मिलने वाले नर्क की सजा माफ हो गई। गंगा नदी में जो की भगवान शिव के जटाओं से निकलकर धरतीलोक पर आई है उनकी पवित्रता शिव जी के नाम से जुड़ते ही बन जाती है। इसलिए धरतीलोक में सबसे पूज्यनीय नदी गंगा ही है जिसमें स्नान करने से ही सभी पाप धूल जाती है ऐसी मान्यता बनी हुई है।

 

वैसे केवल कहानी ही नहीं साथ ही हिंदू धर्म की कुछ महान ग्रंथो में अस्थियां विसर्जन की व्याख्यान पाए गए हैं। इस नदी की पवित्रता को दर्शाते हुए ही वर्षो से अस्थियों को इसमें विसर्जित करने की महिमा बनी हुई है। हिंदू धर्म के अलावा शिख धर्म में भी अस्थि विसर्जन किया जाता है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है कि यह गंगा नदी में ही हो। परंतु मान्यता के अनुसार एक पवित्र नदी का ही इसके लिए चुनाव किया जाता है।

 

ऐसी मान्यता है कि मनुष्य की अस्थियां वर्षो तक गंगा नदी में रहती है। गंगा नदी धीरे-धीरे उस अस्थियों की माध्यम से इंसान के पापो को ख़तम करती है। इंसान के अस्थियों और नदी को वैज्ञानिक रूप सेब भी जोड़कर देखा जाता है। कहते हैं की नदी में प्रवाहित मनुष्य की अस्थिया समय-समय पर आकार बदलती है जो कहीं न कहीं उस नदी से जुड़े स्थान को उपचाव बनाती है।

 

जिस भी धरातल को नदी का पानी छूता है वह स्थान उपचाव बन जाता है। इसका अर्थ यु है कि मरने के बाद भी इंसान की अस्थियां प्रकृति को एक नया जीवन देने के लिए लाभकारी सिद्ध होती है। गंगा नदी में प्राकृतिक तौर पर जीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है। किसी मनुष्य का अग्नि संस्कार करने से उसके सारे जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और वह किसी और व्यक्ति पर स्थानांतरण नहीं हो पाते। अगर इनको दफनाया जाता है तो उन जीवाणुओं से अन्य व्यक्तिओ को पूणसंक्रमण होने की आशंका होती है और यह भी हो सकता है कि उस व्यक्ति के मृत्यु का कारण जीवाणु ही हो।

 

 

अंतिम संस्कार करने के पश्चात जो उनके अस्थियों में अगर थोड़े जीवाणु भी बच गए हैं तो वे गंगा नदी में जाकर नष्ट हो जाते हैं और इन प्रकृति में सम्मिलित होने के लिए तैयार हो जाते हैं और किसी पौधे के जड़ो में अवशोषित होकर अन्य जीवों की अस्थियों में निवास करते हैं और यही उसका पुनर्जन्म होता है। नदी जितनी बड़ी होती है उसके पानी में समाहित कर उतनी ही ज़्यादा जीवो में संचारित होती है और वास्तविकता किसी व्यक्ति की सार्थकता इससे बड़ी और क्या होगी कि अब वह लाखो जीवों का धाप है। इसी कारण से गंगा जीवनदायनी नदी मानी जाती है।

 

तो यह थी वह कहानी जिसके कारण अस्थियों को गंगा में क्यों प्रवाहित किया जाता है। उम्मीद करता हूँ आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी अच्छा लगे तो इसे शेयर जरूर करे और इस ब्लॉग को सब्सक्राइब भी करें।

 

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