99 का खेल (99 Ka Khel) | Best Motivational Story in Hindi

99 का खेल (99 Ka Khel) | Best Motivational Story in Hindi

Best Motivational Story in Hindi

 

99 का खेल (99 Ka Khel)

एक बार की बात है एक राजा था, उसके पास सब कुछ था। लेकिन फिर भी वह खुश नहीं था। एक बार वह महल में टहल रहा था तभी उसकी नजर एक मजदुर पर पड़ी जो उसके यहाँ पर कुछ काम कर रहा था।

 

वह आदमी बहुत खुश था और गाने गुन-गुनाकर अपना काम कर रहा था। यह देखकर वह राजा सोच में पड़ गया कि मेरे पास इतना दौलत हैं, इतना बड़ा राज्य हैं जिसका मैं राजा हूँ और वह साधारण सा मजदुर जो की मेरे अंडर काम करता है उसके बावजूद भी वह इतना खुश है और मैं इतना दुखी।

 

उस राजा का एक खास सलाहकार था और राजा ने उसे अपनी समस्या कहा और उससे पूछा कि वह इतना खुश क्यों हैं और मैं इतना दुखी क्यों। तभी उस सलाहकार ने कहा, “महाराज आप एक काम करिए, एक पोटली में 99 सोने के सिक्के भरकर उसे आप नौकर के दरवाजे पर रखवा दें।”

 

राजा ने उस सलाहकार की बात मानकर राजा ने बिलकुल वैसा ही किया और 99 सोने के सिक्के से भरी पोटली को उस नौकर के दरवाजे पर रखवा दिया।

 

जब नौकर काम कर शाम को घर लौटा तो उसने देखा कि उसके दरवाजे पर एक पोटली रखी हुई हैं। वह उस पोटली को घर के अंदर लाया और जैसे ही उसने पोटली को खोला वह सोने के सिक्के को देखकर पागल हो गया। क्यूंकि वह रातो-रात अमीर बन चूका था।

 

जब  उसने एक-एक कर सिक्को को गिनना शुरू किया तो वे 99 निकले। वह  सोच में पड़ गया कि अखिर सिक्के 99 क्यों हैं? एक सिक्का कहाँ गया? उसने सोचा कि एक सिक्का कहीं गिर गया होगा। उसने पूरा घर छान मारा लेकिन उसे सिक्का नहीं मिला। उसने घर के बाहर ढूंढा लेकिन वह सिक्का नहीं मिला।

 

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उसने सोचा की मेरे गिनने में कोई प्रॉब्लम हो गई होगी तो उसने फिर से गिना लेकिन फिर से सिक्के 99 निकले। उसने एक बार नहीं बल्कि बार-बार सिक्को को गिना लेकिन उसके बावजूद भी हर बार सिक्के 99 ही होते।

 

अब वह काफी परेशान रहने लगा और सोचने लगा कि आखिर वह एक सिक्का गया तो गया कहाँ पर। जब बहुत ढूंढने के बाद भी वह सिक्का नहीं मिला तो  निश्चय कर लिया कि अब मैं अपनी मेहनत के दम पर उस एक सिक्के को कमाऊँगा।

 

अब वह पहले से ज़्यादा मेहनत करने लगा। अब उसने अपने पुरे परिवार को भी काम पर लगा दिया सिर्फ उस एक सीक्के को पाने के लिए। अब उसके दिमाग में हर वक्त वह एक सोने का सिक्का था। वह बस उसी के लिए काम करता, उसी के लिए जीता और उसी के लिए मरता। दिन भर वह उसी के बारे में सोचता कि किसी भी कीमत पर मुझे वह एक सोने का सिक्का चाहिए।

 

अब वह नौकर और भी ज़्यादा परेशान रहने लगा और अब वह काम करते वक्त भी खुश नहीं था। क्यूंकि अब उसकी ख़ुशी काम में नहीं बल्कि अब उसकी ख़ुशी उस एक सोने के सिक्के में थी।

 

जब राजा ने यह सब देखा तो वह दंग रह गया। उसने सलाहकार से पूछा कि यह सब कैसे हुआ? अचानक इतना हंसता-खेलता इंसान इतना दुखी कैसे हो गया?

 

तभी उस सलाहकार ने कहा, “महाराज अब वह 99 के खेल में फँस चूका है। पहले उसके पास जो कुछ भी था उससे वह पूरी तरह से संतुष्ट था और उसके अंदर किसी भी तरह का कोई लालच नहीं था। और अब उसके पास में 99 सोने के सिक्के है लेकिन उसके मन में लालच और असंतुष्टि पैदा हो गई हैं।”

 

 

कई सारे लोग यह सोचते हैं कि अगर मैं उस एक चीज को पा लूंगा तो मैं खुश हो जाऊँगा लेकिन एक बात हमेशा याद रखना कि अगर तुम 99 चीज़ो में खुश नहीं हो तो उस एक चीज़ में तुम कभी खुश नहीं रह सकते।

 

“पुरे की चाहत में

यह इंसान बहुत कुछ खोता हैं 

लेकिन वो ये भूल जाता हैं कि, 

आधा चाँद भी बहुत खूबसूरत होता हैं।” 

 

इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही हैं कि संतुष्टि से ही हमें ख़ुशी मिलती है और लालच न तो हमें कभी संतुष्ट होने देगा और न ही कभी खुश होने देगा। इसलिए जो भी आपके पास में हैं उसमे खुश रहें और खुश रहकर अपने लक्ष के लिए काम करें।

 

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