एक लोटा दूध | Best Motivational Story in Hindi

एक लोटा दूध | Best Motivational Story in Hindi

Best Motivational Story in Hindi

 

एक लोटा दूध | Best Motivational Story in Hindi
एक लोटा दूध | Best Motivational Story in Hindi

एक लौटा दूध 

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक महामारी फैल गई। चारों ओर लोग मरने लगे। गाँव के लोगों ने बहुत उपाय किये, पूजा-पाठ किये लेकिन कोई असर नहीं हुआ। लोग फिर भी मरते रहे। 

 

उस गाँव में एक महात्मा जी रहते थे। गाँव के लोगों ने सोचा कि क्यों न महात्मा जी के पास जाया जाये और उनसे उपाय पूछा जाये। महात्मा जी ने कहा कि उनके पास इस चीज़ का उपाय है। महात्मा जी ने बताया कि गाँव के बाहर एक सूखा कुँआ है अगर अमावस्या की रात को गाँव के हर घर से उस कुएँ में एक लोटा दूध डाला जाये तो अगले ही दिन यह महामारी खत्म हो जाएगी और लोगों का मरना बंद हो जायेगा।

 

गाँव के लोग यह उपाय सुनकर खुश हो गए। सभी लोगों ने तय किया कि एक लोटा दूध उस कुँए में डाला जाये। अमावस्या की रात को सभी लोग जब एक लोटा दूध उस कुएँ में डाल रहे थे तभी उस गाँव के एक बूढ़े और कंजूस आदमी ने सोचा कि गाँव के सभी लोग तो एक लोटा दूध डाल रहे हैं क्यों न मैं एक लोटा पानी डाल दूँ जिसका किसी को पता भी नहीं चलेगा।

 

 

यह सोचकर उस आदमी ने दूध की जगह एक लोटा पानी डाल दिया। अगले दिन भी लोगों का मरना जारी रहा। कुछ भी नहीं बदला महामारी भी खत्म नहीं हुई। लोगों ने सोचा कि महामारी क्यों नहीं खत्म हुई? यह सोचकर सभी लोग कुँए के पास गए।

 

सभी लोगों ने जैसे ही कुएँ में झांककर देखा तो सभी के सभी हैरान रह गए क्यूंकि पूरा कुँआ पानी से भरा हुआ था। उसमें एक भी बूंद दूध नहीं था। लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे और समझ गए कि महामारी क्यों नहीं खत्म हुई।

 

ऐसा इसलिए हुआ क्यूंकि जो बात उस बूढ़े और कंजूस आदमी के मन में आई थी कि सभी लोग तो एक-एक लोटा दूध डालेंगे ही अगर मैं एक लोटा पानी डाल दूँ तो किसी को पता नहीं चलेगा। यही बात गाँव के बाकि लोगों के दिमाग में भी आई और सभी ने दूध की जगह कुएँ में पानी डाल दिया।

 

 

दोस्तों ऐसा हमारे जीवन में भी होता है जब हमें कोई ऐसा काम मिलता है जो बहुत सारे लोगों को मिलकर करना होता है तो अक्सर हम लोग अपनी जिम्मेदारी से यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा। हमारी इसी सोच की बजह से सिचुएशन वैसी की वैसी ही रहती है। अगर हम दुसरो की परवा किये बिना अपनी हिस्से की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाए तो हम समाज में बदलाव ला सकते हैं।

 

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