विषकन्या की रहस्यमय कहानी | Story of Poison Girl in Hindi

विषकन्या की रहस्यमय कहानी | Story of Poison Girl in Hindi

विषकन्या की रहस्यमय कहानी, दोस्तों हमारा इतिहास एक से बढ़कर एक रहस्यों से भरा हुआ है। इतिहास के पन्नो पर मिलते हैं ऐसे जीवो के वर्णन जो बेहद रहस्यमय है, कुछ ऐसे जिव जिनकी हमने सिर्फ कहानियां सुनी हैं तो कुछ ऐसे जिनका अस्तित्व आज भी हो सकता है। ऐसे ही एक रहस्यमय जिव है विषकन्या, जिसका वर्णन इतिहास में तो मिलती ही है और इनका अस्तित्व आज भी हो सकता है।

 

विषकन्या की रहस्यमय कहानी 

 

विषकन्या दरहसल एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक जवान स्त्री होती है, जिसके शरीर में मौजूत तरल लगभग विष होता है। इसके करीब आकर इसके शरीर में मौजूत किसी भी तरल के संपर्क में आने से मौत हो जाती है। पुराने ज़माने में राजा महाराजा विषकन्याओ को अपने राज्य में रखते थे।

 

चाणक्य के अर्थशास्त्र में वर्णन मिलता है कि राजा और महाराजा अपने दुश्मनो को नितंत्रित करने और उनका क़त्ल करवाने के लिए विषकन्याओ का इस्तिमाल किया करते थे। विषकन्याओ का इस्तिमाल खास तोर पर किसी विशेष व्यक्ति को मारने के लिए किया जाता था। यह विषकन्याएँ उसे अपने आकर्षण के जाल में फसाकर उसे मौत की नींद सुला देती थी और लोगों को पता भी नहीं चलता था कि आखिर उसकी मौत कैसे हुई।

 

विषकन्याओं को समझने के लिए मिट्रिडिटेसीम के बारे में जानना होगा। मिट्रीडिअट्स नाम का एक ग्रीक राजा था, जिसके पिता की मृत्यु खाने में परोसे गए जहर की बजह से हुई थी। इस बात का डर मिट्रीडिअट्स के अंदर भी बैठ गया था कि उसे भी जहर देकर मार दिया जाएगा। इसलिए उसने बहुत सीमित मात्रा में रोज जहर लेना शुरू किया और धीरे-धीरे उसका शरीर जहर का अभ्यस्त हो गया। इसको देखते हुए दुनिया भर में यह पद्धति अपनाई गई और उसका नाम मिट्रिडिटेसीम रखा गया।

 

इस पद्धति की बजह से ही हमारे पास एंटीबायोटिक्स और एंटी वेनम जैसी दवाइया बन पाई। इसी पद्धति को अपनाकर एक साधारण लड़की को विषकन्या बनाया जाता है। विषकन्या बनने के लिए चुने जाने के बाद किसी लड़की का अभ्यास बचपन में ही शुरू कर दिया जाता था। उसे सीमित मात्रा में खाने के साथ जहर दिया जाता था। इसके साथ अपने दुश्मन को रिझाने के लिए उसे नृत्य और संमोहन में प्रारंगत भी बनाया जाता था।

 

जिन लड़कियो की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती थी उनकी मौत कुछ ही दिनों में हो जाती थी और जिनकी प्रतिरोधक क्षमता तगड़ी होती थी वह जहर का सेवन करते-करते जवान हो जाती थी। जवान होने तक उनके शरीर पर मौजूत पूरा तरल लगभग जहरीला हो जाता था। उसके बाद यह विषकन्याएँ आसानी से किसी की भी जान ले सकती थी।

 

विषकन्या का जिक्र चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन में भी आता है। धनानंद नाम के राजा ने एक विषकन्या को चंद्रगुप्त मौर्य की जान लेने के लिए भेजा था। लेकिन चंद्रगुप्त के पास उनके गुरु चाणकय थे जिनकी बुद्धि का जवाब ही नहीं था। उन्होंने देखते ही पहचान लिया था कि यह लड़की एक विषकन्या हैं। चाणक्य ने उस विषकन्या को पकड़वा दिया था। उसकी जान बख्शने के बदले में चाणक्य ने उस विषकन्या को दूसरे राजा को मारने के लिए भेज दिया था।

 

अब चाणक्य को चंद्रगुप्त की चिंता हुई और उन्होंने चंद्रगुप्त को हमेशा के लिए विषकन्याओ से बचाने के लिए उन्हें धीरे-धीरे खाने म जहर दी शुरू कर दिया था। इसकी बजह से चंद्रगुप्त खुद एक विषपुरुष बन गए थे और उन्हें जीवन में किसी भी विष से कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन इस प्रयोग की बजह स्वे चंद्रगुप्त को भारी दुख भी झेलना पड़ा था। दरहसल चंद्रगुप्त को पता ही नहीं था चाणक्य ने उन्हें वीरपुरुष बना दिया हैं।

 

एक दिन खाना खाते समय महारानी ने चंद्रगुप्त का जुटा निवाला खा लिया था और उसी दिन उनकी मौत हो गई थी। जिस समय रानी की मौत हुई वह गर्भवती थी। लेकिन बच्चे की जान बच गई थी। वहीं आगे चलकर बिंदुसार बना।

 

इसके अलावा विषकन्या का जिक्र  मगध साम्राज्य में भी सामने आता है, जब नंदवंश के ससंथापक महा पद्म नंद ने शिशुंगवंश के काले सोक को मारने के लिए एक बेहद खूबसूरत विषकन्या को भेजा था और उनकी जान ले ली थी। विषकन्याओ के आधार पर कई फिल्मे और टीवी सीरियल्स भी बनाए गए हैं और कल के पुराण में भी इनका वर्णन मिलता हैं।

 

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