मम्मी की असली कहानी | The Real Story of Mummy in Hindi

मम्मी की असली कहानी | The Real Story of Mummy in Hindi

आज के लेख में जो रहस्मय कहानी (The Real Story of Mummy in Hindi) मैं आपको सुनाने वाली हूँ वह है मिस्र के पिरामिड में मौजूत मम्मी के असली कहानी के बारे में।

 

The Real Story of Mummy in Hindi

हमारी दुनिया शुरुवात से ही बहुत रहस्यमय है। यहाँ पाए जाते है तरह-तरह के चमत्कारी जीव, अकल्पनीय जगह और हेरतंगस विश्वास। ऐसा ही एक अद्भुत रहस्य है मम्मी, कुछ ऐसे मृत शरीर जिन्हें हज़ारो सालो से सुरक्षीर रखा गया है। कैसे बनती है मम्मीज़? क्यों बनाया गया था इन्हें? और आखिर क्या है इनका रहस्य।

मम्मीज़ दरहसल इंसानो और जानवरों के ऐसे मृत शरीर को कहते हैं जिन्हें खास पदार्थों और प्रक्रिया के जरिए संरक्षित किया गया है या फिर कुछ ऐसे शव जो प्राकृतिक रूप से अपने-आप संरक्षित हो गए और समय के साथ नष्ट नहीं हो पाए। मम्मीज़ दो प्रकार की होती है एक एंथ्रोप्रोजोनिक और दूसरा स्पॉन्टेनियस। एंथ्रोप्रोजोनिक मम्मीज़ वह होती है जिन्हें हम अक्सर फिल्मो में देखते हैं। यह ऐसे शरीर है जिन्हें प्राचीन सभ्यताओं ने केमिकल्स की मदद से संरक्षित किया स्पॉन्टेनियस मम्मी वह है प्राकृतिक ही किसी खास स्तिथि और सहयोग की बजह से सड़ने से बच गए।

 

वैसे तो दुनिया भर में मम्मीज़ पाई गई है लेकिन मम्मी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में मिस्र और वहाँ के पिरामिड्स आते हैं। दरहसल प्राचीन पिरामिड्स में पाई गई लिपियों में मम्मी बनाने की प्रक्रिया का वर्णन मिलता है और इन पिरामिड्स को भी मम्मीज़ रखने के लिए इस्तिमाल किया जाता है। इजिप्ट में मान्यता है  कि मौत के भगवान ओसाईरेस की जब मृत्यु हुई तब सृष्टि में उथल-पुथल मच गई और भगवान के आँसू निकल आए। वह आँसू की बुँदे उन पदार्थो में तब्दील हो गई जिनके जरिए किसी मृत शरीर को  सड़ने से बचाया जा सकता है।

 

प्राचीन मिस्र के लोग ऐसा मानते थे कि इंसानो और जानवरों का जीवन कभी खत्म नहीं होता। जिस तरह सूरज पूर्व से उठकर पश्चिम में डूब जाता है और फिर दूसरी सुबह पूर्व से निकल आता है ठीक उसी तरह इंसान और जानवर भी शरीर त्यागने के बाद वापस लौट आते है। उनकी मान्यता थी कि मृत्यु के बाद लोग वापस लौट सकते हैं। अगर उनके शरीर को सुरक्षित रखकर एक अच्छी जगह पर रखा जाए और वह तमाम साजो सामान उसके साथ कब्र में रखे जाए जिनकी जरुरत उन्हें दूसरी दुनिया में जीवन व्यतीत करने में पड़ेगी। यही बजह है मिस्र के लोगों के 2420 से शरीरो को मम्मीज़ में तब्दील करना शुरू कर दिया और उन मम्मीज़ के साथ तरह-तरह के वस्तुओ को रखा।

 

हालाँकि मृत्यु के बाद जीवन का विश्वास मिस्र के लोगों में काफी पहले से था इसलिए पहले भी मृत शरीर को एक गड्ढे में डाला जाता था और शरीर के साथ जरुरत का सामान जैसे मिटटी के बर्तन और जवारात डाले जाते थे। इसके बाद उस गड्ढे को रेत से भर दिया जाता था जो शरीर में मौजूत अरण को सोख लेती थी और इस तरह वह शरीर संरक्षित किया जाता था। यह तरिका काफी बुनियादी  था और खास कारगर नहीं था। इसलिए आगे चलकर इसमें संसोधन किया गया और उन गड्ढो के अंदर मिटटी से बनी हुई ईंटे रखी जाने लगी और शरीर को जानवरो की खाल में लपेटकर रखा जाने लगा। इसकी बजह से एक और समस्या उतपन्न हुई जिसकी बजह से लाशे सड़ने लगी।

 

अंत में ममिफिकेशन की प्रक्रिया अपने शिखर पर पहुँची। इसमें नाक के जरिए लोहे के हुक से दिमाग को बाहर निकाला जाता था। बचे हुए दिमाग के पदार्थ को औषधियों की मदद से साफ कर दिया जाता था। इसके बाद पेट के अंदर से समस्त अंगो को निकाला लिया जाया था। फिर शरीर को अच्छे से धोया जाता। शरीर के अंदर लोबान और केशिया डाला जाता था और साथ ही सुगंधित जड़ीभूतिया डालकर उसे सिला जाता था। फिर 70 दिन के लिए शरीर को छोड़ दिया जाता था और फिर 70 दिन के बाद शरीर को फिरसे अच्छे तरह धो कर सफेद कपड़े से ढक दिया जाता था जिसमें ढेर सारा गम लगा होता था।

The Real Story of Mummy in Hindi

मम्मी की असली कहानी | The Real Story of Mummy in Hindi

2420 के समय में ऐसी मान्यता थी कि फेरौस को मृत्यु के बाद जीवन मिलता है 2020 के आसपास यह मान्यता वदल गई। लोगों ने माना की सभी जीवो का मृत्यु के बाद जीवन होता है। लेकिन ममिफिकेशन की यह प्रक्रिया उस समय इतनी महंगी थी कि ज्यादातर लोग इसका खर्चा नहीं उठा पाते थे। पाई गई मम्मीज़ में से कुछ ऐसी मम्मीज़ भी थी जिनके साथ श्राप जुड़ा हुआ था। श्राप कुछ ऐसा था कि मम्मी के ताबूत को खोलने वाले का बुरा वक्त शुरू हो जाता है।

 

लोगों का मानना था कि सायद इन मम्मीज़ को चोरों से बचाने के लिए ऐसी कहानियां बनाई गई। लेकिन कुछ मम्मीज़ से जुड़ी घटनाएं ऐसी थी कि बड़े-बड़े आर्कियोलॉजिस्ट को भी श्राप वाली बात माननी पड़ी थी। बात करते है ऐसे ही एक मम्मी के बारे में जब सन 1860 में पाँच लोग ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होकर इजीप्ट की सैर पर निकले। अपनी इस ट्रिप को यादगार बनाने के लिए एक कॉफिन  खरीदी थी। यह कॉफिन बेहद रहस्यमय थी। दरहसल यह कोई मम्मी नहीं बल्कि ताबूत के अंदर रखे जाने वाला मम्मी बोर्ड है जिसके अंदर मम्मीज़ को रखा जाता है। इसके चेहरे पर दाड़ी नहीं है। इसके हाथ और चेहरे को देखकर यह महिला जैसी लगती है। इस कॉफिन की क्वालिटी बहुत अच्छी थी जिससे यह पता चलता है कि यह किसी ऊँची पदवी की महिला थी और ऐसी कॉफिन उन महिलाओ के बनाई जाती थी आमीन रह के मंदिर में पूजा करती थी।

 

अपने ट्रिप से वापस आते समय उन पाँच लोगों में से दो की मृत्यु हो गई। तीसरा व्यक्ति मिस्र के कायरो शहर पहुँचा और उसने गलती से खुद के हाथ में गोली मार ली इसलिए उसके हाथ को काटना पड़ा। एक व्यक्ति जो सही सलामत इंग्लैंड पॅहुचा उसकी किस्मत इतनी खराब हो गई कि वह अपनी सारी संपत्ति जुए में हार गया। इसके बाद वह अमेरिका पॅहुचा और वहाँ भी बाढ़ और आग के कारन उसकी पूरी संपत्ति नष्ट हो गई। उसके बाद उस कॉफिन को उईलर की सिस्टर के पास रखा गया जिसने 1887 में  उसकी तस्वीर खींचने की कोशिश की और उसकी भी जान चली गई।

 

अब तक तो लोगों को अंदाज़ा हो गया था कि यह कॉफिन श्रापित है लेकिन इसकी कहानी यही ख़त्म नहीं होती। आज यह लन्दन की म्यूजियम में रखी हुई है और इसे अर्टिफैक्ट नंबर 22542 और अनलकी मम्मी के नाम से जाना जाता है। इस अर्टिफैक्ट को वर्ल्ड वॉर 1 के लिए जिम्मेदार ठराया गया। जर्नलिस्ट रॉबिंसन ने महीनो तक इस अर्टिफैक्ट पर जाँच की। वह डेली एक्सप्रेस के लिए एक कलम लिखना चाहते थे कि इस अर्टिफैक्ट से जुड़ी सारी धारणाए गलत है और यह श्रापित नहीं है। लेकिन अपनी जाँच के दौरान उन्हें अहसास हुआ कि यह बातें दरहसल सत्य हैं। इससे पहले कि वह अपनी जाँच पूरी कर सकते अचानक उनकी भी मृत्यु हो गई।

 

एक बात ऐसी भी है जो मम्मीज़ से ज़्यादा रहस्यमय है। बिना किसी केमिकल या छेड़छाड़ किए भी कुछ मृत शरीर बिना किसी प्राकृतिक सहायता के आज भी एकदम संरक्षित है। इन्हे इनकरप्टेड सेंस कहा जाता है। यह ऐसे संत थे जिन्होंने अपनी चेता का इतना पवित्रीकरण कर लिया था कि उनका शरीर लगभग अमर बन गया था। इसके बाद उनकी आत्मा ने शरीर का त्याग किया और उनका शरीर आज भी बिना सड़े बेहतर हालत में मौजूत हैं।

 

दोस्तों आपको मम्मीज़ की यह रहस्यमय कहानी “मम्मी की असली कहानी | The Real Story of Mummy in Hindi” कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताए और इस लेख को दुसरो के साथ शेयर भी जरूर करे। 

 

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