दो सिर वाला पक्षी | The Bird With Two Heads Story in Hindi

दो सिर वाला पक्षी | The Bird With Two Heads Story in Hindi

(The Bird With Two Heads Story in Hindi)

 

दो सिर वाला पक्षी 

किसी जंगल में बहुत सारे पशु-पक्षी रहते थे। उन्ही में एक बहुत ही विचित्र पक्षी भी रहता था, कबूतर। उस कबूतर के दो सिर थे लेकिन पेट एक ही था। सभी जानवर उसका मजाक उड़ाते थे और उसे खूब चिढ़ाते थे। जानवरो के दुर्व्यवहार से उस पक्षी का एक सिर बहुत दुखी रहता था हालाँकि दूसरा सिर इसे अपनी बुरी किस्मत समझकर खुश रहता था।

 

अलग-अलग विचारों के कारन दोनों में हमेशा झगड़ा होता रहता था। एक सिर को अगर कुछ खाने को मिलता तो वह अपने साथी सिर को नहीं देता। ऐसे ही जब दूसरे सिर को खाने को कुछ मिलता तो वह अपने पहले सिर को नहीं देता। कभी-कभी तो वह सिर्फ एक दूसरे को चिढ़ाने के लिए खाना खाते थे।

 

एक दिन पहले सिर को बहुत ही मीठा फल मिला तो उसने दूसरे सिर को दिखाते हुए उस फल को खाना शुरू किया। पहला सिर कहने लगा, “बाह! कितना मीठा फल है और इसकी खुशबू तो लाजवाब है।” दूसरे सिर ने कहा, “मुझे भी थोड़ा चखने के लिए दे दो न।”

 

पहला सिर बोला, “अरे हम दोनों का पेट तो एक ही है चाहे तुम खाओ या मैं जाना तो एक ही पेट में है न।” दूसरे सिर ने कहा, “हाँ, मगर उसके स्वाद का मजा तो तुम ही ले पा रहे हो न। थोड़ा सा मुझे भी दे दोगे तो क्या हो जाएगा?”

 

पहला सिर चिढ़कर बोला, “यह फल मुझे मिला है और यह मुँह भी मेरा है मैं इस मुँह से चाहे जो खाऊँ और जितना खाऊँ और इस पर पूरा अधिकार मेरा है।” यह कहकर पहला सिर मजे से पुरे फल को खा गया।

 

दूसरे सिर को यह बात इतनी ज़्यादा बुरी लगी कि उसने पहले सिर से बदला लेने के बारे में सोचा। एक दिन पहला सिर जब दो पहर का खाना खा कर दो गया तो सिर ने अपने एक दोस्त कालू नाम के एक कौए को फल वाली सारी बात बताई और कहा ,”दोस्त कौए मुझे कोई ऐसा फल बताओ जिसे खा कर मैं इससे बदला ले सकू।”

 

कौआ बोला, “एक ऐसा फल है जिसे खा कर तुम्हारा पेट ख़राब हो जाएगा और उसकी बजह से तुम दोनों अगले तीन दिन तक कुछ नहीं खा पाओगे। तुम यह फल खा कर इसे सबक सीखा सकते हो। लेकिन याद रहे ज़्यादा खाने से जान भी जा सकती है इसलिए ध्यान रखना। ” दूसरे सिर को कौए की यह बात अच्छी लगी और कहा, “ठीक है दोस्त, मैं ध्यान रखूँगा।”

 

थोड़ी देर बाद जब पहले सिर की आँखें खुली तो उसने दूसरे सिर पर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। फिर दोनों थोड़ी देर तक लड़ते रहे। उसके बाद दूसरे सिर ने पहले से बदला लेने की सोची और चालाकी से बोला, “मेरे दोस्त कौए ने मुझे स्वाद से भरे एक फल के बारे में बताया है मैं तो अब वहीं खाऊँगा। अगर तुम्हे खाना है तो चलो वह फल सिर्फ मेरे दोस्त कौए को ही पता है।”

 

दोनों फल के पास पहुँचते हैं। पहला सिर उस फल को पहचान जाता है और दूसरे को उसे खाने से मना करता है। पहला सिर बोलता है, “अरे यह जहर का पौधा है इसे मत खाओ वरना हम दोनों मर जाएँगे।” दूसरे ने कहा, “तुमने वह मीठा फल खाते हुए मुझे कहा था न कि यह मेरा फल है और मेरा मुँह हैं जो चाहें खाऊँ तो अब मेरी बारी है मेरी मर्जी मैं जो चाहूँगा वहीं खाऊँगा।”

 

पहले सिर के लाख मना करने के वाबजूद भी दूसरा नहीं माना और बदले की चाह में उसने उस फल को खा लिया। उसका नतीजा यह हुआ कि वह दोनों वहीं पर मर गए।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

  • इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि स्वार्थ से बढ़कर एकता की शक्ति को पहचानना चाहिए। स्वार्थ हमेशा खतरनाक होता है जबकि एकता का बल बहुत अधिक होता है।

 

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