चाणक्य की जीवनी | Biography of Chanakya in Hindi

चाणक्य की जीवनी | Biography of Chanakya in Hindi

Biography of Chanakya in Hindi: चाणक्य भारत के सबसे बुद्धिमान लोगों में से एक थे जिन्होंने अपने कुटल चालो के बल पर एक शासक को ख़त्म किया और दूसरे शासक को खड़ा किया। उनके जीवन से जुड़े ऐसे किस्से हैं जहाँ चाणक्य ने अपने नीतियों का इस्तिमाल किया और बड़ी ही सूझबूझ दिखाई।

 

इस लेख में मैं चाणक्य से जुड़ी कुछ किस्से और कहानिया आपके साथ शेयर करूँगा। आप इस लेख में पढ़ेंगे की कैसे चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को शिक्षा दी और कैसे दुश्मनों पर चाले चलकर उनके दाँत खट्टे किए। चाणक्य के हर एक किस्से में आपको कुछ नई शिक्षा मिलेगी। उम्मीद करता हूँ आपको यह लेख जरूर पसंद आएगी।

 

चाणक्य का जीवनी परिचय – Biography of Chanakya in Hindi

दोस्तों चाणक्य कोई काल्पनिकता का नाम नहीं है बल्कि इतिहास में दर्ज एक महान पुरुष का नाम है। चाणक्य कुछ ऐसी चाले चलने में माहिर थे जिसका उनके दुश्मन को पता भी नहीं लगता था। इन्ही कुटल चालो के कारन चाणक्य को लोग कौटिल्य नाम से भी पुकारने लगे। चाणक्य एक बहुत ही विद्वान पंडित थे।

 

चाणक्य का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। चाणक्य ने बहुत ही कम उम्र में वेदो का ज्ञान हासिल कर लिया। चाणक्य की रूचि Politics यानि राजनीती में थी। चाणक्य का एक दाँत बाहर की तरफ था। उस समय लोगों में यह मान्यता थी कि ऐसे दाँत वाला बच्चा आगे चलकर राजा बनता है।

 

एक दिन चाणक्य की माताजी इस दाँत को लेकर रोने लगते हैं। जब चाणक्य ने कारन पूछा तो उसकी माता ने जवाब दिया कि कल को तू राजा बनेगा और राजा कभी भी अपने रिश्तेदारों की परवा नहीं करते, तू मुझे छोड़कर चला जाएगा।

 

चाणक्य अपनी माँ का बहुत सम्मान करते थे। उनसे अपनी माँ के आँखों में आँसू देखे न गए। चाणक्य ने अपने पास रखा एक पत्थर उठाया और अपने दाँत पर दे मारा। चाणक्य का दाँत टूट गया। चाणक्य माँ से कहने लगे, “मैं नहीं जानता इस बात में कितनी सच्चाई है मगर यह दाँत तुम्हारी खुशियों में बाधा डाल रहा था तो मैंने इसको निकाल फेंका। यह दाँत तुम्हारी खुशियों से कीमती नहीं है। इसके बाद चाणक्य को लोग खंड दाँत के नाम से भी जानने लगे।

 

चाणक्य ने तक्षशिला जाकर पहले वहाँ पर ज्ञान हासिल किया और फिर वहीं छात्रों को ज्ञान देना शुरू किया। मॉडर्न भाषा में कहे तो चाणक्य पहले स्टूडेंट बने और बाद में टीचर बने। कहने को तो चाणक्य पहले एक टीचर ही थे पर उनके स्टूडेंट उन्हें बहुत सम्मान करते थे और वह काफी लोकप्रिय होने लगे।

 

चाणक्य तक्षशिला के एक महानस्कॉलर होने के नाते उनको एक चैरिटी की कमिटी का मेंबर बना दिया गया। इस कमिटी का कार्य लोगों में पैसे बाँटना था और कुछ ही समय में चाणक्य कमिटी के प्रेसिडेंट बन गए। इसे सिलसिले में जब चाणक्य राजा धनानंद से मिले तो राजा ने चाणक्य की बुरी शकल होने पर चाणक्य का अपमान किया।

 

चाणक्य ने उस अपमान को सहन कर लिया। चाणक्य ने समय-समय पर राजा को आईना दिखाया और बाकि लोगों की तरह चाणक्य ने राजा की झूटी प्रशंसा नहीं की। चाणक्य ने अपना कर्तव्य बहुत अच्छी तरह से निभाया पर राजा को चाणक्य का यह अंदाज़ ज़रा पसंद नहीं आई।

 

राजा ने बिना किसी कारन चाणक्य को प्रेसिडेंट पद से हटा दिया। चाणक्य शिकार बने एक मुर्ख और घमंडी राजा के गुस्से का पर वह कहते है न ब्राह्मण भूखा तो सुदामा, समझा तो चाणक्य और रूठा तो रावण। चाणक्य ने राजा से कहा कि वह उसे कुत्ता न समझे जो स्वामी के ठोकरे खाने के बाद भी उनके तल्मो को चाटेगा।  चाणक्य ने कहा उनके पास विद्या का धन है और वह इस विद्या से उन जैसे कई शासक खड़े कर सकते हैं। चाणक्य ने वहीं शपथ ली वहनंद के राज्य को समाप्त कर देंगे।

 

इसके बाद चाणक्य हिमालय के पीपली वन गाँव में पहुँचे। वहाँ पर कुछ बच्चे राजा और प्रजा का खेल खेल रहे थे। चाणक्य ने राजा बने बालक को देखा और चाणक्य को लगा इसमें राजा बनने के सारे गुण हैं। चाणक्य की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह व्यक्ति को देखकर ही व्यक्ति की पहचान कर लेते थे।

 

चाणक्य ने वहाँ एक खेल खेला। चाणक्य उन बच्चो के पास गए और राजा बने बच्चे से हाथ जोड़कर कहने लगे, “आप राजा हो और मैं ब्राह्मण आपसे दान माँगता हूँ।” इस पर राजा बने बालक ने कहा, “ब्राह्मण, जितनी भी गाय यहाँ चल रही है यह सब तुम्हारी। इस पर चाणक्य बोले, “पर गाय तो तुम्हारि नहीं है यह तो किसी और की है।”

 

बालक ने यह सुनकर अपनी तलवार निकाली और बोला, “हे ब्राह्मण, मेरे पिताजी ने मुझे शिक्षा दी है जिस राज्य में ब्राह्मण का सम्मान न हो वह राज्य नहीं फलता-फूलता। तुम गाय लेकर जा सकते हो। जो भी तुम्हे रोकेगा मेरी तलवार उससे तुम्हारी रक्षा करेगी। यह बालक आगे चलकर चन्द्रगुप्त मौर्य बना जो बाद में चाणक्य की शिक्षा से मगध का राजा बना और चाणक्य ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए धनानंद के विरुद्ध खड़ा किया।

 

एक बार चन्द्रगुप्त लड़ाई हारने के बाद चाणक्य से मिलने आते हैं और अपनी हार आलोचना करना चाहते हैं। चाणक्य कहते हैं, “पहले खाना खा लो फिर आलोचना करेंगे। पर चन्द्रगुप्त चाणक्य से अपनी बात खाने से पहले कहना चाहते थे पर उन्होंने अपने गुरु चाणक्य की बात मान ली और खाना खाने लगते हैं।

 

चन्द्रगुप्त बहुत ही उतावले थे अपनी बात चाणक्य से कहने के लिए जिसकी बजह से उन्होंने चावल के पत्तल को बीच में से ही पकड़ लिया। चावल गरम थे और चन्द्रगुप्त का हाथ जल जाता है। इस पर चाणक्य उन्हें सलाह देते हैं पत्तल को बीच से नहीं साइड से पकड़ो। चन्द्रगुप्त ऐसा ही करते हैं।

 

खाना खाने के बाद चाणक्य उठकर जाने लगते हैं। तभी चन्द्रगुप्त कहते हैं, “अपनी हार के बारे में मुझे आपसे आलोचना करनी है।” आचार्य चाणक्य कहते हैं, “पर उसका हल तो मैंने तुम्हे खाने से पहले ही दे दिया है।” चन्द्रगुप्त कुछ समझ नहीं पाते। चाणक्य कहते हैं, “तुम्हारा हाथ जला क्यूंकि तुमने पत्तल को बीच में से पकड़ा पर तुम्हे पत्तल ज़रा भी गरम नहीं लगा जब तुमने पत्तल को साइड से पकड़ा। उसी तरह पहले आसपास के गाँव को जीतो धनानंद पर बाद में हमला करना।”

 

कुछ समय बाद चन्द्रगुप्त लड़ाई जितने के बाद ख़ुशी-ख़ुशी चाणक्य को बताने आते हैं कि उन्होंने युद्ध जित लिया है। चाणक्य उनसे कहते हैं, “यह अहम् नहीं है कि तुमने युद्ध जीता है या नहीं। अहम् यह है कि तुमने युद्ध में लड़ रहे अपने सिपाहियों का खाना कहाँ से जुगाड़ किया था?” चन्द्रगुप्त जवाब देते है कि आसपास के गाँव के लोगों ने उनकी मदद की और सेना के लिए खाना इकट्ठा किया।

 

इस पर चाणक्य क्रोधित होकर पूछते हैं, “तुमने बदले में उन्हें क्या दिया?” इस पर चन्द्रगुप्त सर हिलाकर कहते हैं, “कुछ नहीं।” चाणक्य बताते हैं, “तुम राजा बनने के ख्वाब देख रहे हो याद रहे राजा के लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट उसकी प्रजा है और यह तुम्हारा पहला कर्तव्य है तुम राज्य की लोगों की मदद करो।”

 

एक दिन चन्द्रगुप्त को उदास देखकर आचार्य चाणक्य उसका कारन पूछते हैं। पहले तो चन्द्रगुप्त कुछ क्षण के लिए चुप रहते हैं। चाणक्य कहते हैं, “चन्द्रगुप्त, जो दिल में है कह डालो कुछ मत छुपाओ।” चन्द्रगुप्त बताते हैं उनको मगध के राजा की लड़की से प्यार हो गया है और वह इस कारन बहुत तनाव में है। उनका किसी भी कार्य में मन नहीं लगता और हर पल उनको बेचैनी होती है।

 

इसको सुनकर आचार्य चाणक्य चन्द्रगुप्त को समझाते हैं वह प्यार से दूर रहे, प्यार उन्हें बर्बाद कर सकता है। यह आकर्षण है और हर औरत और मर्द के बीच होता है और यह बहुत ही सामान्य बात है। इस पर चन्द्रगुप्त पूछते हैं, “क्या प्यार करना गलत है?” इस पर चाणक्य जवाब देते हैं, “मैंने तो पहले ही कहा है यह बहुत सामान्य बात है पर तुमने किसी सामन्य कारन के लिए जन्म नहीं लिया। तुम्हे अपने लक्ष की ओर बढ़ना है। राजा बनने के लिए तुम्हे सामन्य से अलग सोचना होगा।”

 

फिर एक दिन ऐसा आता है जब पड़ोसी राज्यों की मदद से मगध पर हमला कर दिया जाता है। युद्ध में नंदा के राजा और उसके घरवाले सब मारे जाते हैं। चन्द्रगुप्त राजा बन जाते हैं। चाणक्य प्रधानमंत्री बन जाते हैं और इसी समय चाणक्य ने दो महान किताबे लिखी –

  1. नीतिशास्त्र
  2. अर्थशास्त्र

 

चाणकय चन्द्रगुप्त के खाने में थोड़ा-थोड़ा जहर मिलाते थे। असलमे चाणक्य चन्द्रगुप्त को और भी शक्तिशाली बनाने के लिए ऐसा करते थे ताकि कोई भी चन्द्रगुप्त को जहर से मार न सके। एक दिन चन्द्रगुप्त की गर्भवती रानी उनका खाना खा लेती है। चाणक्य रानी को तो नहीं बचा पाते पर चाणक्य बच्चे को बचा लेते हैं। इस बच्चे का नाम बिन्दुसार रखा जाता है और यह बच्चा बड़ा होकर राजा बनता है।

 

इसके बाद आचार्य चाणक्य जंगलो में चले जाते हैं और ऐसा कहा जाता है कि उनकी वहीं पर मृत्यु हो जाती है।

 

चाणक्य के जीवनी से हमें जो सिख मिलती है: 

  • माँ से बढ़कर कोई नहीं जिसके लिए चाणक्य ने अपनी दाँत तोड़ दी।
  • फूल की खुसबू और व्यक्ति की अच्छाई जल्दी ही चारो और फैल जाती है जैसे चाणक्य जल्दी ही कमिटी में शामिल हो गए।
  • शकल से ज़्यादा अक्ल का अच्छा होना जरुरी है। चाणक्य सुंदर नहीं थे पर अक्लमंद थे।
  • आप अगर बड़े पद पर बैठे हो तो किसी भी व्यक्ति को छोटा मत समझो क्यूंकि आम इंसान भी राजा को बर्बाद कर सकता है जैसे चाणक्य ने किया।
  • शत्रु को बीच से वॉर मत करो। पहले उसे कमजोर करो जैसे चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को पत्तल वाले घटना से समझाया था।
  • एक व्यक्ति का कर्तव्य है वह उन लोगों का भला करे जिसने उसकी मदद की थी।
  • प्रेम एक बाधा है, उस व्यक्ति के लिए जो ज़िंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है।

 

तो दोस्तों यह थी चाणक्य की जीवनी की कहानी। अगर आपको यह लेख  “चाणक्य का जीवनी परिचय | Biography of Chanakya in Hindi” पंसद आए तो कमेंट जरूर करे और इसे दुसरो के साथ भी शेयर जरूर करे। 

 

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