अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi, अटल बिहारी वाजपेयी, एक ऐसा नाम जिसने कांग्रेस जैसी ताकतपर सरकार को हराकर अपनी सरकार बनाई। एक ऐसा इंसान, जिसकी सरकार सिर्फ 13 दिन तक काम पाई लेकिन वह फिर भी नहीं रुका। एक ऐसा इंसान, जिसने इंडिया को न्यूक्लियर पावर दिया और एक ऐसा इंसान, जिसने अपने पडोसी दुश्मनो को मुँह तोड़ जवाब दिया। आज के इस लेख में हम भारतीय जनता पार्टी और इंडिया के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में बताऊँगा कि कैसे उनकी पोलिटिकल करियर की शुरुवात हुई। उनकी फ़ैलीएर्स, उनकी सक्सेस और इंडिया के लिए उनके कंट्रीब्यूशन के बारे में इस लेख में गहराई से बताउंगा तो अगर आप अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में विस्तार से जानने चाहते हैं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़े।

 

अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी –  Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

 

अटल बिहारी वाजपेयी का एक भाषण जिसमे उन्होंने एक बहुत ही अनमोल बात कही – “सरकारें आएगी जाएगी सत्ता आती है जाती है मगर यह देश अजर अमर रहने वाला है आओ मिलकर इस देश के लिए काम करे”

 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ 25 दिसंबर, 1924 ग्वालियर मध्यप्रदेश में। उनकी माता का नाम था कृष्णा देवी और उनके पिता का नाम था कृष्णा बिहारी वाजपेयी जो की एक स्कूल टीचर और पोएट थे ग्वालियर में। अटल जी ने अपनी पढाई सरस्वती शिशु मंदिर (Saraswati Sishu Mandir), ग्वालियर में करि और उसके बाद उन्होंने ग्वालियर्स विक्टोरिया कॉलेज (Gwalior’s Victoria College) जिसका नाम अभी लक्ष्मीबाई कॉलेज है। उन्होंने वहाँ से अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट करि हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत इन तीन भाषाओ में। उसके बाद उन्होंने दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV College), कानपूर से पोलिटिकल साइंस में MA हासिल करके फर्स्ट क्लास अवार्ड के साथ अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन भी कम्पलीट कर ली और साथ ही वह पोएट्री भी करते थे।

 

अटल जी के पोलिटिकल करियर की शुरुवात हुई 1939 में जब उन्होंने 15 साल की उम्र में RSS (Rashtriya Swayamsevek Sangh) को ज्वाइन कर लिया और वहाँ एक वोलेंटियर के तोर पर काम करने लगे। अटल जी बचपन से ही बहुत तेज थे। वह अपने देश के प्रति और देश के लोगों के लिए हमेशा से कुछ करना चाहते थे। उन्हें जो भी काम दिया जाता जो भी जिम्मेदारी दी जाती वह उसे सौ प्रतिशत पूरा करने की कोशिश करते और उनकी यही क्वालिटीज़ उन्हें सबसे अलग बनाती थी।

 

उसके बाद वह बाबासाहेव आप्टे (Babasahev Apte) जो की RSS में प्रचारक थे उनसे प्रेरित होकर RSS का ऑफिसियल ट्रेनिंग कैंप ज्वाइन कर लेते हैं और फिर 1940-1944 तक RSS का प्रचारक बनकर वहाँ फुल टाइम करते हैं। अगस्त, 1942 में अटल जी को और उनके बड़े भाई को 24 दिन के लिए अरेस्ट कर लिया जाता है क्विट इंडिया मूवमेंट (Quit India Movement) के दौरान। 24 दिन बाद उनकी बेल होती है और उनकी अंडरटेकिंग में यह लिखा जाता है कि वह क्विट इंडिया मूवमेंट के दौरान सिर्फ भीड़ का हिस्सा थे और उन्होंने कोई भी तोड़-फोड़ नहीं करि।

 Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi
Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

उसके बाद 1947  में जब देश आज़ाद हो रहा था अटल जी उस वक्त अपनी लॉ की पढ़ाई कर रहे थे लेकिन इंडिया-पाकिस्तान पार्टीशन की बजह से जो रॉयटर्स हो रहे थे उसके चलते उन्हें अपनी पढाई बीच में ही रोकनी पड़ी। वह फिर उत्तरप्रदेश चले जाते हैं और वहाँ दीन दयाल उपाध्याय के न्यूज़ पेपर के लिए काम करने लगते हैं। 1948 में RSS के एक मेंबर रह चुके नाथूराम विनायक गोडसे (Nathuram Vinayak Godse) ने महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) का मर्डर कर दिया और RSS को फिर टेम्परेरी बेसेस पर बैन कर दिया जाता है।

 

RSS के बैन होने के बाद एक नई पार्टी बनाई जाती है जिसका नाम है BJS (Bhartiya Jana Sangh) और अटल जी और दीनदयाल उपाध्याय को इसमें काम करने के लिए भेजा जाता है। उन्हें BJS में नेशनल सेक्रेटरी बनाया जाता है। 1954 में अटल जी राजा महेंद्र प्रताप से मथुरा लोकसभा इलेक्शन में हार जाते हैं लेकिन वह फिर भी नहीं रुकते और बलरामपुर से जीत हासिल करके लोकसभा का मेंबर बन जाते हैं। उनकी स्किल्स और कभी न हार मानने की जस्बे को देखकर प्राइम मिनिस्टर जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी एक न एक दिन इस देश का प्राइम मिनिस्टर जरूर बनेगा।

 

अटल जी की स्ट्रैटिजिस बनाने की स्किल्स और अपने पार्टी को आगे से लीड करने की लीडरशिप ने भारतीय जन संघ में उन्हें बहुत ही ऊँचे दर्जे में रेपुटेशन दी। दीनदयाल उपाध्याय के मौत के बाद अटल जी को जनसंख्या प्रेजिडेंट बना दिया जाता है। 1977 में कई पार्टीज  को मिलाकर एक गठबंधन की सरकार बनाई जाती है जिसका नाम होता  है जनता पार्टी। इस पार्टी में मोरारजी देसाई को इंडिया का प्राइम मिनिस्टर बनाया जाता है और वहीं दूसरी तरफ अटल जी को फॉरेन मिनिस्टर की पोस्ट दी जाती है। लेकिन 1989 में जनता पार्टी डिसोल्व हो जाती हैऔर मोरारजी देसाई अपना इस्तीफा दे देते हैं। जनता पार्टी के पॉलिटेशन आपस में ही लड़ने लगते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं। उसी दौरान BJS भी कमजोर पड़ जाती है और फिर BJS की कुछ बड़े मेंबर्स अटल जी समेत और लोग आपस में मिलझुलकर अपनी एक नई पार्टी बनाते हैं जिसका नाम होता है BJP, भारतीय जनता पार्टी।

 Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi
Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

जब अटल जी इंडिया के फॉरेन मिनिस्टर थे उन्होंने चाइना और पाकिस्तान से अच्छे रिलेशन बिल्ड करने की कोशिश करि और वह कुछ हद तक कामियाब भी हुए। 1995 तक BJP बहुत मजबूत हो चुकी थी और 1996 के जनरल एलेक्शंस में भी BJP एक लोती सबसे बड़ी पार्टी थी लोकसभा में। उसी साल एलक्शन के बाद अटल जी इंडिया के 10th प्राइम मिनिस्टर बनते हैं लेकिन बाकि पार्टीस से सपोर्ट न मिलने की बजह से उनकी सरकार 13 दिन बाद ही गिर जाती है और उन्हें फिर रिजाइन करना पड़ता है। उसके बाद 1998 में फिरसे फ्रेश जनरल एलक्शन होते हैं और इस बार फिरसे BJP सबसे आगे होती है और फिर बाकि दूसरी पोलिटिकल पार्टीस भी BJP को अपना समर्थन देती है और फिर फॉर्म होती है NDA (National Democratic Alliance) और अटल जी सेकंड टाइम इंडिया के प्राइम मिनिस्टर बनते हैं।

 

सब कुछ एकदम नार्मल चल रहा था और फिर तभी 13 महीने बाद जयललिता अपना समर्थन वापस ले लेती है। समर्थन वापस लेने की बजह से NDA की सरकार सिर्फ एक भोट से चूककर रह जाती है और अटल जी को फिरसे PM की पोस्ट से रिजाइन करना पड़ता है। उसके बाद फिरसे तीसरी बार 1999 में फ्रेश जनरल एलेक्शंस होते हैं और फिरसे BJP सरकार की जीत होती है। उन्हें लोकसभा में 543 में से 303 सीट्स मिलती हैं और फिर अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्राइम मिनिस्टर ऑफ़ इंडिया की शपथ लेते हैं और इस बार पुरे 5 साल तक अपनी सरकार चलाते हैं।

 

अटल जी ने अपने पोलिटिकल करियर में कभी भी किसी व्यक्ति को नीचर दिखाने की या उसे अपमानित करने की कोशिश नहीं करि। वह हमेशा से ही जो चीज़ सही होती थी उसका साथ देते थे और अगर कोई चीज़ गलत होती थी तो उसके खिलाफ आवाज उठाने में बिलकुल भी नहीं सोचते थे। सायद यही वह बजह है कि जो उनके ओपोजीशन के लोग है, भले ही BJP के कितने बड़े रायबेल क्यों न हो लेकिन उनके दिल में अटल जी के लिए एक अलग ही जगह बनी हुई है।

 

1998-2004 के बीच भारत के सामने आई समस्याएँ में योगदान-

कारगिल वॉर- 1999

साइक्लोन – 1999-2000

गुजरात भूकंप – 2001

सूखा – 2002-2003

तेल की किल्लत और पार्लामेंट अटैक – 2003

 

निजीकरण – Privatization 

अटल जी की सरकार बनने के बाद उन्होंने प्राइवेट कम्पनीज के लिए ऑप्शन्स खोल दिए और नए-नए स्टार्टअप को अवसर दिए। साथ ही उन्होंने फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को भी बढ़ाबा दिया इंटरनेशनल कम्पनीज को इंडिया में आमंत्रित किया बिज़नेस सेटअप करने के लिए।

 

शिक्षा नीति – Education Policy 

पहली बार इंडिया में एलिमेंट्री स्कूल को 6-14 के बच्चों के लिए फ्री कर दिया गया। 2001 में यह पॉलिसी लांच हुई और फिर कुछ ऐसे लोग जो अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते थे पैसे न होने की बजह से उनमे 60% की गिरावट आई। यह एक बहुत ही बड़ा कदम था उस समय की सरकार दयारा।

 

विज्ञान और अनुसंधान – Science and Research

अटल बिहारी वाजपेयी ने चंद्रयान वन की प्रोजेक्ट को पास कर दिया 56th इंडिपेंडेस डे को अपनी स्पीच में बताया कि इंडिया अब विज्ञान की क्षेत्र में उड़ान भरने के लिए तैयार है और कहा कि इंडिया खुदका स्पेस क्राफ्ट चाँद पर 2008 तक भेजेगा।

 

भूमिकारूप व्यवस्था – Infrastructure 

इंडिया के कुछ सबसे बड़े रोड प्रोजेक्ट में से एक गोल्डन क्वाड्रीलेटरल (Golden Quadrilateral) और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना ने एक बहुत बड़ा बदलाव लाया। गोल्डन क्वाड्रीलेटरल की मदद से चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को हाईवे से जोड़ दिया गया और वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना ने ऐसे गाँव जहाँ से शहर तक जाने की उपलब्धि नहीं थी वहाँ पर रोड्स बनाई गई छोटे-छोटे गाँव को शहरों से जोड़ा गया। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ऐसी और भी बहुत सी चीज़े अटल जी ने अपने राज्य में दी। उसके बाद अपने ख़राब स्वस्थ के चलते अटल जी ने 81 साल की उम्र में 2005 में पॉलिटिक्स रिजाइन कर दिया।

 

अटल जी की मृत्यु – Death of Atal Bihari Vajpayee 

अटल जी की तबियत ख़राब होने की बजह से उन्हें दिल्ली की एम्स हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। उनका शरीर बहुत ही कमजोर हो चूका था। वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे थे और वहीं दूसरी तरफ पूरा इंडिया उनके लिए प्रे कर रहा था लेकिन कुदरत को सायद कुछ और ही मंजूर था। 16 अगस्त, 2018, 5:05 PM पर 93 साल की उम्र में अटल जी ने आखरी बार साँस ली और वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए।

 

पुरस्कार – Awards 

  • पद्म विभूषण – 1992
  • डी लीट (कानपूर विश्वविद्यालय) – 1993
  • लोकमान्य तिलक पुरस्कार – 1994
  • भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार – 1914
  • डी लीट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय) – 2015
  • “फ्रेंड्स ऑफ़ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवार्ड” (भारत सरकार दयारा प्रदत्त) – 2015
  • भारत रत्न से सम्मानित – 2015

 

अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएँ – Atal Bihari Vajpayee Poems

जो कल थे, वे आज नहीं है

जो कल थे,

वे आज नहीं हैं।

जो आज हैं,

वे कल नहीं होंगे।

होने, न होने का क्रम,

इसी तरह चलता रहेगा।

हम हैं, हम रहेंगे,

यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।

अटल बिहारी वाजपेयी की अन्य कविताएँ –

  • गीत नया गाता हूँ
  • एक बरस बीत गया
  • जीवन की ढलने लगी साँझ
  • आओ फिरसे दिया जलाएँ
  • ठन गई, मौत से ठन गई
  • भारत जमीन का टुकड़ा नहीं
  • परिचय
  • आज सिन्धु में ज्वार उठा है
  • उनकी याद करें
  • आए जिस-जिस की हिम्मत हो
  • पहचान
  • पड़ोसी से
  • कदम मिलाकर चलना होगा
  • कण्ठ-कण्ठ में एक राग है
  • कवि आज सुना वह गान रे
  • स्वतंत्रता दिवस की पुकार
  • सत्ता
  • मंत्रिपद तभी सफल है
  • बजेगी रण की भेरी
  • कौरव कौन, कौन पांडव
  • झुक नहीं सकते
  • जीवन बीत चला
  • मैंने जन्म नहीं माँगा था
  • देखो हम बढ़ते ही जाते
  • न दैन्यं न पलायनम

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रमुख रचनाएँ – Some Books of Atal Bihari Vajpayee

अटल जी की प्रमुख रचनाएँ –

  • रग-रग हिन्दू मेरा परिचय
  • मृत्यु या हत्या
  • अमर वलिदान
  • कुछ लेख कुछ भाषण
  • सेक्युलर वाद
  • राजनीती की रपटीली राहें
  • बिन्दु बिन्दु विचार
  • अमर आग है
  • कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
  • संसद में तीन दशक
  • मेरी इक्यावन कविताएँ

 

तो यह थी अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी। उम्मीद करता हूँ आपको यह लेख “अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi” पसंद आई होगी अगर आपको यह लेख अच्छी लगे तो इसे शेयर भी जरूर करे अपने दोस्तों के साथ।

 

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