19 रूपए का चमत्कार | A Very Heart Touching Story in Hindi

19 रूपए का चमत्कार | A Very Heart Touching Story in Hindi

 

 A Very Heart Touching Story in Hindi

 

आज मैं आपको एक बहुत ही हार्ट टचिंग स्टोरी सुनाने वाली हूँ जिसका नाम हैं “19 रूपए का चमत्कार | A Very Heart Touching Story in Hindi” उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

एक बार एक छोटी सी बच्ची हाथ में मिटटी का गुल्लक लेकर भागते हुए एक दवाई के दुकान पर गई। वह काफी देर  वहाँ पर खड़ी रही लेकिन दुकानदार का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया क्यूंकि और भी बहुत सारे लोग वहाँ पर खड़े थे। उसने दुकानदार को कई बार बुलाया लेकिन दुकानदार का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया। फिर उस बच्ची को बहुत गुस्सा आया और उसने अपनी मिटटी की गुल्लक को वहीं काउंटर पर जोर से रख दिया।

 

उसके बाद वह दुकानदार और वहाँ खड़े जितने भी लोग थे सभी उस बच्ची को देखने लगे। फिर उस दुकानदार ने उस बच्ची से पूछा, “आपको क्या चाहिए बेटा?” तो बच्ची बड़ी भोलेपन से बोली, “मुझे एक चमत्कार चाहिए।” यह सुनकर दुकानदार को कुछ समझ नहीं आया और न ही वहाँ जो लोग थे उनको समझ आया। सब उसकी तरफ देखने लगे। फिर दुकानदार ने उससे कहा, “बेटा चमत्कार तो यहाँ नहीं मिलता।”

 

दुकानदार का जवाब सुनकर बच्ची को लगा की वह उससे झूट बोल रहा है। फिर बच्ची ने कहा, “मेरे गुल्लक में बहुत पैसे हैं। आप बताओ आपको कितने पैसे चाहिए? लेकिन मैं यहाँ से आज चमत्कार लेकर ही जाऊँगी।” वहीं काउंटर पर एक और आदमी खड़ा था। उसने उस बच्ची से पूछा, “बेटे क्यों चाहिए तुम्हे चमत्कार?” तब उस बच्ची ने अपनी कहानी बताई, “अभी कुछ देर पहले मेरे भाई के सर पर बहुत तेज दर्द हुआ तो मेरे पापा-मम्मी उसे हॉस्पिटल ले गए। उसके बाद कई देर तक मेरा भाई घर नहीं आया तो मैंने कई बार अपने पापा से पूछा लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। उन्होंने बार-बार यही कहा की वह आ जाएगा लेकिन वह आ ही नहीं रहा था। फिर मैंने देखा की मम्मी रो रही है और पापा उनसे कह रहे थे की उसके दवाई के लिए और इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए उतने मेरे पास नहीं है। अब उसको कोई चमत्कार ही बचा सकता है।

 

तब मुझे लगा कि मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं भी है तो क्या हुआ मेरे पास तो हैं। मैंने जितने भी पैसे जोड़ रखे हैं वह सारे पैसे लेकर मैं इस दवाई के दुकान पर आया हूँ। फिर उस आदमी ने उस बच्ची से पूछा, “कितने पैसे है तुम्हारे पास?” यह सुनकर बच्ची ने अपनी गुल्लक उठाई और वहीं पर तोड़ दी और पैसे गिनने लग गई। बाकि सब लोग खड़े होकर उसे देख रहे थे। थोड़ी देर बाद सारे पैसे उसने अपने हाथ में इकट्ठे किए और बोली, “मेरे पास पुरे 19 रूपए हैं।” यह सुनकर वह आदमी थोड़ा सा मुस्कुराया और कहा, “अरे तुम्हारे पास तो पुरे पैसे हैं। इतने का ही तो आता है चमत्कार।” यह सुनकर वह बच्ची बहुत खुश हो गई और कहा, “चलो मैं आपको अपने पापा से मिलवाती हूँ।”

 

बाद में पता लगा कि वह आदमी कोई आम आदमी नहीं था। वह एक बहुत बड़ा न्यूरोसर्जेर था। उसने सिर्फ 19 रूपए में उसकी भाई की सर्जेरी करि और कुछ ही दिन बाद उसका भाई ठीक होकर घर वापस आ गया। फिर कुछ दिन बाद वह बच्ची, उसका भाई, उसके पापा, उसकी मम्मी चारो एक साथ बैठे हुए थे और बात कर रहे थे। तो उसकी मम्मी ने उसके पापा से पूछा, ‘अब तो बता दीजिए कि आपने यह चमत्कार करा कैसे?” तो उन्होंने अपनी बेटी की तरफ देखा और बोले, “यह चमत्कार मैंने नहीं हमारी बेटी ने की है।”

 

तो यहाँ पर एक बहुत बड़ी बात है जो हम उस छोटी सी बच्ची से सिख सकते हैं कि ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें कोई रास्ता नजर नहीं आता और हम लोग हिम्मत हार जाते हैं तब हमारे अंदर एक बच्चा होता है जो कोशिश करने से कभी पीछे नहीं हटता। वह हार मानने को तैयार नहीं होता क्यूंकि उसको ना शब्द समझ नहीं आता। वह बच्चा, जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं क्यूंकि वह हर हाल में कोशिश करता रहता है।

 

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