दो छोटे बच्चों की कहानी | Best Motivational Story in Hindi

दो छोटे बच्चों की कहानी | Best Motivational Story in Hindi

 

आज के लेख में मैं आप सबको एक मोटिवेशनल स्टोरी के बारे में बताने वाली हूँ जो की है “दो छोटे बच्चों की कहानी | Best Motivational Story in Hindi” इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े क्यूंकि यह कहानी आपके  जिंदगी में कुछ न कुछ बदलाव जरूर लाएगी और एक अच्छा सीख भी देगी।

 

Best Motivational Story in Hindi

 

दो छोटे बच्चों की कहानी

यह कहानी है दो बच्चों की जो एक गाँव में रहते थे। उनमे से एक छह साल का था और एक दस साल का। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे। दोनों हमेशा साथ-साथ रहते, साथ-साथ खेलते, साथ-साथ खाते-पीते, साथ-साथ नहाते। एक दिन खेलते-खेलते वह दोनों गाँव से थोड़ा दूर निकल गए और खेलते-खेलते उनमें से जो बड़ा बच्चा था दस साल वाला वह एक कुएँ में गिर गया। 

 

वह बच्चा जोर-जोर से चिकने चिल्लाने लगा। उस बच्चे को तैरना बिलकुल नहीं आता था। अब जो दूसरा बच्चा था छोटा सा छह साल का, उसने अपने आसपास में देखा तो उसे कोई नजर नहीं आया, कोई नहीं दिखा जिसे वह बुला सके सहायता के लिए। फिर उस छोटे से छह साल के बच्चे की नजर पड़ी एक बालटी पर, जो पास में रखा हुआ था।

 

बच्चे ने बालटी को कुएँ के निचे फेंका और अपने दोस्त को कहा कि वह उस बालटी को पकड़ ले। उसके दोस्त ने बालटी पकड़ा और उस छोटे से बच्चे ने अपनी पूरी ताकत लगाकर पागलों की तरह उसे खींचने लगा। उसने अपनी पूरी जान लगा दी रस्सी को खींचने में। वह खींचता रहा और तब तक नहीं रुका जब तक उसने अपने दोस्त को बचा नहीं लिया।

 

वह दस साल का कुएँ से बाहर आ गया। बाहर आने के बाद दोनों दोस्त ने एक दूसरे को गले लगाया और बहुत रोने लगे। दोनों बच्चे गाँव वापस आ गए और उन्होंने जब अपने घरवालों और गाँव वालों को पूरी घटना बताई तो किसी ने भी उनके ऊपर विश्वास नहीं किया। क्युकी उन्हें लग रहा था कि उस छोटे से छह साल के बच्चे में इतनी भी ताकत नहीं है कि वह एक दस साल के बच्चे को ऊपर उठा सके। लेकिन एक आदमी था उस गाँव में जिसे विश्वास हो गया, उनको सब रहीम चाचा कहते थे।

 

रहीम चाचा गाँव के सबसे समझदार बुजुर्गों में से एक थे। और सबको लग रहा था कि रहीम चाचा कभी झूट नहीं बोलते, अगर वह कह रहे है तो कुछ न कुछ बात जरूर होगी। और फिर सारे गाँववाले इकट्ठा होकर उनके पास गए और बोलने लगे कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे हो सकता है? अब वही उन्हें समझाए।

 

रहीम चाचा ने कहा की वह क्या बताए इस बच्चे ने तो बताया की उसने कैसे उस दस साल के बच्चे की जान बचाई। सारे गाँववाले उनकी शकल देखने लगे। कुछ देर बाद रहीम चाचा बोले की सवाल ये नहीं है कि वह छोटा सा बच्चा यह कैसे कर पाया? सवाल ये है कि वह ये क्यों कर पाया? उसके अंदर इतनी ताकत कहाँ से आई? इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि जिस वक़्त बच्चे ने यह किया, उस समय उस जगह पर दूर-दूर तक कोई नहीं था, उस बच्चे को यह बताने वाला कि तुम यह नहीं कर सकते हो। वहाँ कोई नहीं था, कोई नहीं यहाँ तक की वह खुद भी नहीं।

 

यह कहानी हमें यह सीख दिलाती है कि हमें कभी भी हार नहीं मानना चाहिए, यह नहीं सोचना चाहिए कि हम यह काम नहीं कर सकते और दूसरों को भी यह नहीं बताना चाहिए कि तुम यह नहीं कर सकते। क्युकी हम सब कुछ कर सकते है।

 

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