जीवन में संघर्ष बहुत जरुरी है | Best Motivational Story in Hindi

जीवन में संघर्ष बहुत जरुरी है | Best Motivational Story in Hindi

“जीवन में संघर्ष बहुत जरुरी है | Best Motivational Story in Hindi” इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े क्यूंकि यह कहानी आपके  जिंदगी में कुछ न कुछ बदलाव जरूर लाएगी और एक अच्छा सीख भी देगी।

 

Best Motivational Story in Hindi

एक बार की बात है, एक किसान अपने एक बड़ी सी जमीन पर खेती करता था लेकिन हर वर्ष की तरह कभी बाढ़, तो कभी सूखा, कभी ज़ादा धुप इनकी बजह से कुछ न कुछ थोड़ी बहुत फसल उसकी बर्बाद हो जाती थी। इस बात से तंग होकर वह इस बार भी खेती कर रहा था और तभी अचानक बहुत तेजी से बारिश होने लगी।

 

किसान ने तंग आकर प्रभु से कहा, “हे प्रभु! आप परमात्मा है, आप भगवान है लेकिन लगता है आपको फसल के बारे में ज़रा सी भी जानकारी नहीं है ,मेरी आपसे प्रार्थना है, बस एक बार मुझे मौका दीजिए मैं जैसा चाहूँ वैसा मौसम हो फिर आप देखिएगा मैं कैसे अन्न का ढेरों भंडार खड़ा कर दूँगा और ढेर सारे भंडार अन्न से भरे रहेंगे।” भगवान मुस्कुराए और बोले, “ठीक है, जैसा तुम चाहते हो वैसा ही होगा। मौसम तुम्हारे अनरूप होगा मैं ज़रा सा भी दखल नहीं दूँगा।”

 

किसान बड़ा खुश हुआ और ख़ुशी-ख़ुशी में उसने अगले साल गेहूँ की खेती बोई। जैसे ही गेहूँ की फसल उसने बोई, तो मौसम उसके अनुरूप रहा। जब धुप चाहा, जब पानी चाहा उसके वैसे ही अनुरूप पानी मिला। न ज़ादा बारिश, न ज़ादा आँधी-तूफान उसने आने ही नहीं दिया। ऐसे ही समय बीतता गया और समय जैसे ही निरंतर बढ़ने लगा फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी बढ़ती गई।

 

एक समय आया जब फसल पूरी तरह से पक गई और किसान अपने आपको बहुत ज़ादा खुश महसूस कर रहा था क्यूंकि उसने ऐसी खेती तो आज तक नहीं की थी। अब उसने सोचा कि फसल काटने की बारी आ गई है इसलिए किसान बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी अपने खेत में गया फसल काटने के लिए और जैसे ही वह फसल काटने बैठा वह अपना सीना और सर पकड़कर बैठ गया, जब उसने देखा कि फसल के अंदर यह जो गेहूँ के बालिया लगी हुई है इनके अंदर एक भी दाना नहीं हैं। उसने गेहूँ की सभी बालिया चेक की लेकिन उन बालियों के अंदर एक भी दाना नहीं था। तब उसने अपना सर पकड़ा और उपरवाले से कहने लगा, “हे प्रभु! यह क्या हुआ?”

 

तब भगवान ने जवाब दिया , “यह तो होना ही था। तुमने अपने अनुसार मौसम चाहा है। इन गेहूँ के बालियों को तुमने संघर्ष करने ही नहीं दिया। इन्हे संघर्ष करने का मौका तुमने दिया ही नहीं। यह गेहूँ की जो बालिया है, जब एक प्रकार से आँधिया आती है, बारिश आती है, तेज धुप आती है तो यह अपने संघर्ष से, अपने तप से, अपने बल से खड़े रहते हैं। उनके अपने आप में जितने शक्ति होती है यह अपने आपको बचाने में, अपने जीवन को बचाने में झौंक देते हैं और उन्ही शक्ति की बजह से ही इनके अंदर दाना पैदा होते हैं, अनाज पैदा होते हैं। लेकिन तुमने इन्हे मौका ही नहीं दिया।

 

दोस्तों इस छोटी सी कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है कि अगर सोने को भी आभूसन बनाना होता है तो उसे सबसे पहले आग और फिर हतोड़े से और फिर निरंतर कई तपस्यो से, संघर्ष से गुजरना पड़ता है तब जाकर वह आभूसन बनते हैं, तब जाकर उसकी मूल्यता उसकी असली सुंदरता लोगों के सामने आती हैं। इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि अगर हमें ज़िंदगी में आगे बढ़ना है तो हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अगर हम चुनौती से डरेंगे, अगर यह चाहेंगे कि भगवान मैं जैसा चाहता हूँ वैसा ही हो तो ऐसा कभी नहीं हो सकता।

 

हर वह इंसान, जो अपने जीवन में कुछ अच्छा मुकाम पाता है तो बस चुनौतियों से लड़-लड़के पाता है। आप भी अपने जीवन में चुनौतियों से डटकर सामना करना सीखिए क्यूंकि जब मेहनत करेंगे, चुनौतियों से लड़ेंगे तो आप इतने मजबूत बन जाएँगे कि आप अपने लक्ष को बड़ी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

 

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