हॉन्टेड बिल्डिंग | Haunted Building Horror Story in Hindi | Bhooton Ki Kahani

हॉन्टेड बिल्डिंग | Haunted Building Horror Story in Hindi | Bhooton Ki Kahani

हॉन्टेड बिल्डिंग | Haunted Building Horror Story in Hindi | Bhooton Ki Kahani , यह हॉरर स्टोरी थोड़ी डरावनी है और अगर आपको डरावनी कहानियां पढ़ना पसंद है तो मुझे उम्मीद है आपको यह हॉरर स्टोरी पसंद आएगी।

 

 Haunted Building Horror Story in Hindi

 

आज शाम से ही हवा बहुत तेज चल रही थी। रात के करीबन 2:00 बज रहे थे। आज विजय काफी लेट हो गया था ऑफिस से आए हुए। विजय एक बिल्डिंग में रहता था। उसे यहाँ आए हुए बस कुछ ही दिन हुए थे। उसके दोस्त जब उसे यहाँ छोड़ने आए तो उन्होंने इस बिल्डिंग के बारे में काफी कुछ सुना था और विजय को वहाँ रहने से मना भी किया पर विजय ने उनकी बात नहीं मानी।

 

विजय ने जब मैन गेट से बिल्डिंग को देखा, तो कुछ लाइट्स अभी भी ऑन थी। विजय गेट खोलकर अंदर आया और लिफ्ट पर जाने के लिए बटन दबाया। और जैसे ही लिफ्ट का दरवाजा खोला विजय की आँखे फटी की फटी रह गई। उसने देखा लिफ्ट के एक कोने में एक आदमी खड़ा है। उसका शरीर जैसे सफेद पत्थर और जिस्म में खून। विजय डरते-डरते लिफ्ट में चला गया और उसने 13 फ्लोर की बटन प्रेस की।

 

कुछ समय बाद, विजय को लगा कि वह आदमी धीरे-धीरे उसके पास आ रहा है। उसका हाथ विजय के कंधे के एकदम पास, की तभी लिफ्ट का दरवाजा खोला और 13 फ्लोर आ गया। विजय भागते हुए अपने रूम के पास गया और पलट के लिफ्ट की ओर देखा तो जैसे उसके शरीर में खून दस गुना तेजी से बढ़ने लगा, क्यूंकि लिफ्ट खाली थी।

 

विजय अपने रूम में गया और पानी पीकर सोफे पर बैठ गया। कुछ समय बाद उसके बालकनी से आवाज आई, जैसे कोई बालकनी का दरवाजा खटखटा रहा हो। विजय ने हिम्मत जुटाई और बालकनी का दरवाजा खोला कि तभी वहीं आदमी जो लिफ्ट में था, चिल्लाता हुआ विजय के रूम से भागता हुआ बाहर निकल गया। विजय भी उसके पीछे भागा और वह आदमी सीधा छद की तरफ भागा और अँधेरे में गायब हो गया।

 

विजय उसके पीछे-पीछे आधी रात को छद पर गया और देखा कि छद के कोने में वहीं आदमी खड़ा है और उसकी तरफ देख रहा है। पर अँधेरा होने के कारण उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। विजय ने गुस्से से पूछा, “अरे कौन हो तुम? क्यों मेरे पीछे पड़े हो?” वह आदमी हँसते हुए बोला, “तुमने मुझे नहीं पहचाना? मैं वहीं हूँ, जिसके किस्से इस बिल्डिंग में सुनाए जाते हैं। मैं वहीं भुत हूँ।” इतना सुनते ही विजय जोर-जोर से हँसने लगा। और जब उसने अपनी आँखे खोली तो देखा वह आदमी उसके सामने से गायब हो गया था। विजय ने आसपास देखा तो उसे कोई नजर नहीं आया।  तभी उसके पीछे से आवाज आई, “तुम्हे मुझपर नहीं हँसना चाहिए था।”

 

यह सुनते ही विजय के पैरों से जैसे जमीन खिसक गई। वह सीधा निचे उतरा और अपने अपार्टमेंट की तरफ भागने लगा और भागते-भागते उसके हाथ से अपार्टमेंट की चाबी गिर गई। और वह आदमी विजय की ओर भागते हुए आया। विजय ने अपने आसपास के सारे रूम खटखटाने शुरू कर दिए। पर किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। तभी एक आदमी ने दरवाजा खोला और उसमें से एक आदमी नींद की हालत में बोला, “अरे इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो।” विजय ने सब कुछ उस आदमी को बताया, तो उस आदमी ने कहा, “तुम बहुत डरे हुए हो। चिंता मत करो, आज रात मेरे रूम में मेरे साथ रुक जाओ। कल सुबह चले जाना।”

 

विजय जैसे ही रूम में जाने लगा, तभी पीछे से किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे जोर से पीछे खिंचा और चिल्लाते हुए कहा, “पागल हो गए हो क्या? तुम उस रूम में मरने के लिए जा रहे हो? मैंने सुना है यह रूम उसी आदमी का जिसकी आत्मा यहाँ  घूमती है।” विजय ने रूम की तरफ देखा और उसकी साँस जैसे रुक सी गई, वह आदमी जो छद पर उसके साथ था वह दरवाजे के पीछे मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद कर रहा था।

 

विजय दूसरे आदमी के साथ उसके अपार्टमेंट में चला गया। उसने विजय को बताया कि यह बिल्डिंग हमेशा से ऐसा नहीं था। पहले यहाँ लोग काफी मिलझुलकर ख़ुशी से रहते थे और इन्ही में से एक का नाम था रोहन सिंह। वह अपने बेटे और पत्नी के साथ इसी बिल्डिंग के 14 फ्लोर पर रहता था। एकदिन रोहन सिंह बहुत बीमार हो गया और टेस्ट कराने पर उसे पता चला कि उसे एक खतरनाक बीमारी है और इसमें उसका बच पाना सायद न मुमकिन है। रोहन बहुत परेशान हो गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। परेशान में आकर उसने अपने आपको कमरे में बंद कर लिया।

 

कुछ समय बाद, जब रोहन की पत्नी उसके लिए खाने लेकर उसके रूम में गई, तो उसने देखा कि रोहन मर चूका था। उसने अपनी हाथ की नस काट ली थी। कुछ दिनों में उसकी पत्नी की भी मौत हो गई और तब से इस बिल्डिंग की 14 फ्लोर पर कोई नहीं रहता है। विजय ने उस आदमी से पूछा, “तुम्हे यह सब कैसे पता है?” तो उस आदमी ने कहा, “मेरा नाम अमित सिंह है और मैं उसी रोहन सिंह का बेटा हूँ जिसने उसके पिता के बुरे में उसे मरने के लिए छोड़ दिया। इसलिए अब मैं यही रहता हूँ।”

 

सुबह हो गई। विजय ने अपना सामान बाँधा और उस बिल्डिंग को छोड़ दी। पर अभी भी विजय यह सोच रहा था कि अगर वह उस दिन उस कमरे में चला जाता तो उसका क्या होता।

 

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