हिरण और शिकारी की कहानी | Deer and Hunter Story in Hindi

हिरण और शिकारी की कहानी | Deer and Hunter Story in Hindi

हिरण और शिकारी की कहानी  Deer and Hunter Story in Hindi

 

हिरण और शिकारी की कहानी

एक बार एक जंगल में एक बहुत ही सुंदर और प्यारी हिरणी रहती थी। वह स्वभाव से बहुत ही चंचल थी। एक जगह ज़ादा दिन वह नहीं रहती थी। दूसरे हिरणों की तरह झुंड में रहना तो वह बिलकुल भी पसंद नहीं करती थी। और सारादिन इधर-उधर घूमती रहती थी।

 

असेही एक दिन घूमते-घूमते हिरणी नदी किनारे आ पहुँची। “ओह, बहुत समय से घूम रही हूँ। थक गई हूँ। थोड़ा पानी पीकर इस पेड़ के निचे विश्राम करती हूँ।” यह बोलकर हिरणी नदी किनारे पानी पिने के लिए गई।

 

जब हिरणी पानी पिने के लिए नदी में उतरी, तभी एक शिकारी ने उसे झाड़ियों के पीछे से देख लिया। और अपने तीर से हिरणी की ओर निशाना लगाने लगा। जैसे ही हिरणी ने शिकारी को दूर से देखा, तो उसका पैर काँपने लगा।

 

हिरणी तेजी से वहाँ से भागने लगी। शिकारी भी हिरणी के पीछे भागने लगा। कुछ दूर जाने के बाद, हिरणी को एक मकई का खेत दिखा। हिरणी मकई के खेत के अंदर छिप गई। खेत घना होने की बजह से शिकारी को हिरणी नजर नहीं आई। और हिरणी को भी शिकारी नहीं दिख रहा था। शिकारी ने हिरणी को ढूंढना शुरू किया।

 

कुछ समय बाद, शिकारी चला गया समझकर हिरणी निडर होकर मकई के पत्ते खाने लगी। तभी शिकारी को कुछ आवाज सुनाई दिया। शिकारी समय नष्ट न करके उस दिशा में अपना बाण चला दिया। और बाण जाकर सीधा हिरणी को लग गई। हिरणी ने कहा, “शिकारी चला गया समझकर जिसने मुझे आश्रय दिया था, शिकारी से छूपने के लिए मेरी मदद की, उसी को मैं नुकशान पहुँचा रही थी। मेरी मूर्खता की यही सजा है।” यह कहकर हिरणी मर गई। 

 

 कहानी से सीख, Moral of The Story:

मुश्किल वक़्त में जो हमारी मदद करते हैं, उनको कभी भी नुकशान नहीं पहुँचाना चाहिए।

 

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