Bure Vakt Ka Bhi Bura Vakt Aata Hai | Short Motivational Story in Hindi

Bure Vakt Ka Bhi Bura Vakt Aata Hai | Short Motivational Story in Hindi

Short Motivational Story in Hindi

 

इस कहानी में आज मैं आप सबसे एक Short Motivational Story in Hindi सुनाने जा रही हूँ जो की है Bure Vakt Ka Bura Vakt Aata Hai उम्मीद करता हूँ आपको कहानी पसंद आएगी।

 

एक बार की बात है, एक गुरु अपने सभी शिष्यों के साथ नदी किनारे नहाने के लिए गए। सुबह-सुबह का वक्त था। गुरूजी नदी किनारे जाकर बैठ गए। गुरूजी को बैठा देख सभी शिष्यों को लगा कि उन्हें भी अपने गुरु के अनुसार कुछ देर बैठ जाना चाहिए। गुरूजी बस नदी को ही निरंतर देखते रहे और सभी शिष्य यह देखकर थोड़े से हैरान और परेशान होने लगे।

 

सुबह से शाम हो गए पर गुरूजी नदी में उतरे ही नहीं, बस नदी को ही देखे जा रहे थे। सभी शिष्य इस दृश्य को देखकर बड़े व्यकुल हो गए। पर गुरूजी के सामने कौन बोले? यह सोचकर सभी चुप बैठे रहे। लेकिन एक शिष्य के सब्र का बाँध टूट गया। उसने बड़े प्रेम से गुरूजी से पूछ ही लिया, “गुरूजी हम नदी में कब उतरेंगे? आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं?” तब गुरूजी ने उसकी ओर देखा और कहा, “जब इस नदी का बहाव बंद हो जाएगा तब हम इस पानी में उतरेंगे।”

 

सभी शिष्य उनका यह जवाब सुनकर हैरान रह गए। वह सब एक-दूसरे को देखने लगे। बात उनकी समझ में नहीं आ रही थी। फिर एक और शिष्य ने गुरूजी से अपनी शंका व्यक्त करते हुए कहा, “पर गुरूजी ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता। यह नदी है इसका बहाव बंद कैसे हो सकता है? यह नामुमकिन है।”

 

फिर गुरूजी थोड़ा सा मुस्कुराए और बोले, “यही है आज की शिक्षा। यह ज़िंदगी बिलकुल इस बहती हुई नदी जैसी है जो कभी किसी के लिए नहीं रूकती। निरंतर बहती रहती है और आगे बढ़ती रहती है। अब मर्जी तुम्हारी है कि तुम नदी के साथ आगे बढ़ते हो या फिर एक ही जगह पर डरकर, हारकर, घबराकर बैठे रहते हो। इस नदी की बहती हुई लहरे बदलते हुए वक्त की तरह है और वक्त चाहे जैसा भी हो अच्छा या बुरा बदलता जरूर है। अगर कभी तुम्हारा वक्त बुरा हो तो हौंसला रखना और चाहे कुछ भी हो जाए किसी भी परिस्तिथि में हिम्मत मत हारना। ज़िंदगी की इस नदी में आगे बढ़ते रहना क्यूंकि वक्त बदलने में देर नहीं लगती। बुरा वक्त सिर्फ तुम्हारी ही ज़िंदगी में नहीं बल्कि सभी के ज़िंदगी में आता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कोई बिखर जाता है तो कोई निखर जाता है। जिसकी सोच सकरात्मक है और जिसमे सिखने का जज़्बा है वह बुरे से बुरे वक्त में भी अच्छाई को देखता है। ठीक वैसे ही जैसे कोई रात के अँधेरे में चमकते हुए तारों को देखता हैं। सुख और दुख इस ज़िंदगी रूपी नदी के लहरे हैं जो हर पल बनती रहती है और मिटती रहती है। लेकिन तुम कोई लहर नहीं हो तुम इस नदी की जल की तरह हो जो हर हाल में बहता ही रहता है और बिना थके बिना रुके आगे बढ़ता रहता है। तो अगर कभी तुम्हारी ज़िंदगी में भी बुरा वक्त आए तो घबराना मत बस एक बात याद रखना कि यह हमेशा रहने वाला नहीं है क्यूंकि बुरे वक्त का भी बुरा वक्त आता है।”

 

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