भेड़िया और बकरी के सात बच्चे | The Wolf And The Seven Goat Children Story in Hindi

भेड़िया और बकरी के सात बच्चे | The Wolf And The Seven Goat Children Story in Hindi

The Wolf And The Seven Goat Children

इस लेख में मैं आपसे जो कहानी शेयर करने जा रही हूँ वह कहानी है “भेड़िया और बकरी के सात बच्चे | The Wolf And The Seven Goat Children Story in Hindi” मुझे उम्मीद है आपको यह कहानी अवश्य पसंद आएगी।

 

भेड़िया और बकरी के सात बच्चे

एक बार की बात है, एक मम्मी बकरी अपने सात बच्चों के साथ जंगल में एक कुटिया बनाकर  रहती थी। वह अपने सातों बच्चों को बहुत प्यार करती थी। कभी-कभी मम्मी बकरी को कुटिया छोड़कर बाहर जाना पड़ता था खाना लाने के लिए। और आज भी उससे वही करना था। उसने अपने बच्चों को बुलाया और कहा, “गौर से सुनो बच्चों, मुझे बाहर जाना है खाना लाने, तुम सब ध्यान से रहना। क्यूंकि मैंने सुना इस इलाके में एक भड़िया घूम रहा है। वह बहुत ही खतरनाक है। और अगर उसने तुम सबको देख लिया, तो वह सबको खा जाएगा। उसकी आवाज बहुत कठोर है और उसके पैर काले। इसलिए नजर रखना और घर में ही रहना। किसी को भी अंदर नहीं आने देना।”

 

बकरी के सात बच्चे बोले, “चिंता मत करो मम्म, हम बहुत सावधानी से रहेंगे। हम किसी को भी अंदर नहीं आने देंगे। आप आराम से जाओ।” फिर मम्मी बकरी खाना लाने चली गई। भेड़िया यह सब पेड़ के पीछे से सुन रहा था। वह बाहर आया मम्मी बकरी के जाते ही। भेड़िया दरवाजे पर गया और खटखटाया और कहा, “दरवाजा खोलो, मैं मम्मी हूँ और मैं तुम सबके लिए अच्छी-अच्छी चीज़े लाई हूँ।” परंतु भेड़िया के कठोर आवाज को सुन्करर उन्हें समझ आ गया कि वह  उनकी माँ नहीं थी।

 

बच्चों ने कहा, “तुम हमारी माँ नहीं हो, हमारी माँ की आवाज बहुत मधुर है। और तुम कितने कठोर लगते हो। तुम भेड़िया हो न? चले जाओ यहाँ से।” भेड़िया वहाँ से चला गया, यह सोचकर कि अब वह अपनी आवाज को कैसे बदले? वह एक पेड़ के पास गया और मधुमक्खी के छत्ते को पूरा खा गया अपनी आवाज को मधुर बनाने के लिए।

 

भेड़िया फिर से कुटिया के पास गया और दरवाजा खटखटाया। भेड़िया फिर बोली, “दरवाजा खोलो मेरे प्यारे बच्चों, मैं आ गई। मैं तुम सबके लिए अच्छी चीजे लाई हूँ।” बकरी के बच्चे दरवाजा खोलने ही वाले थे कि तभी उन्होंने दरवाजे के निचे से उसके काले-काले पैर देख लिए। बच्चों ने कहा, “नहीं नहीं, तुम हमारी माँ नहीं हो सकते। उनकी पैर तो सफेद और बहुत सुंदर है। तुम भेड़िया हो। जाओ यहाँ से।”

 

भेड़िया फिर वहाँ से चला गया और सोचने लगा कि अब वह अपने पैरों को कैसे बदलेगा। भेड़िया एक दुकान में गया और वहाँ अपने पैरों को आटे में डुबो दिया। फिर वापस उस कुटिया के पास आया। उसने फिर से दरवाजा खटखटाया। भेड़िया ने फिर कहा, “दरवाजा खोलो बच्चों, मैं तुम सबके लिए मजेदार चीजे लाई हूँ।” सबसे बड़ा बकरा जो था उसने कहा, “अपने पैर दिखाओ, ताकि हम देखे कि तुम सचमे हमारे माँ हो या नहीं। भेड़िया ने अपने आटे वाले पैर दिखाए।

 

बकरों को लगा कि इस बार सचमे उनकी माँ वापस आ गई। और फिर सबसे बड़े बकरे ने धीरे से दरवाजा खोला। तुरंत भेड़िया अंदर घुस आया और सब पर गरजने लगा। छोटे बकरे इधर-उधर भागने लगे खुदको बचाने के लिए। भेड़िया सभी बच्चों को खा गया केबल सबसे छोटे बकरे को छोड़कर। क्यूंकि वह एक सुरक्षित जगह पर छिपा था।

 

भेड़िया को जब और कोई नहीं मिला तो उसने कहा, “मुझे याद तो नहीं आ रहा यहाँ कितने थे। पता ही नहीं चला मैंने कितनो को खाया। चलो, मेरा पेट तो भर गया है, थोड़ा आराम कर लूँ। अगर और कोई बचा तो मैं बाद में उसे देख लूँगा।” तो भेड़िया गया बाहर और एक सेब के पेड़ के निचे आराम से सो गया। जल्दी ही वह खर्राटे लेते हुए गहरे नींद में चला गया।

 

कुछ देर बाद, मम्मी बकरी खाना लेकर वापस आई और घर पर सब कुछ बिखरा हुआ देखकर परेशान हो गई। तो उसे समझ आ गया की भेड़िया ने उसके बच्चों को खा लिया। मम्मी बकरी जोर-जोर से रोने लगी। मम्मी बकरी की रोना सुनकर सबसे छोटा बकरा बाहर आया और अपनी माँ को सारि घटना सुनाई। मम्मी बकरी ने सोचा की वह खुद देखेगी कि कोई बचा है की नहीं।

 

मम्मी बकरी कुटिया से बाहर आई और तभी उसने सेब के पेड़ के निचे भेड़िया को खर्राटे मरते हुए देखा। नजदीक गई तो उसने देखा की भेड़िया के पेट के अंदर से कुछ हिल रहा था। उसको लगा कि सायद उसके बच्चे अभी भी ज़िंदा है। जल्दी वह अपने घर गई और एक बड़ी सी कैंची लेकर आई। उसने भेड़िया के पेट को काटा तो उसके सारे बच्चे बाहर निकल आए। मम्मी बकरी बहुत खुश हो गई। भेड़िया इतना लालची था कि उसने बच्चों को खाने के बजाई सीधा निगल लिया था।

 

मम्मी बकरी ने फिर अपने बच्चों को कुछ पत्थर इकट्ठा करने को कहा और एक सुई धागा ले आई। सब बच्चे बड़े-बड़े पत्थर ले आए और मम्मी बकरी ने सब पत्थर भेड़िया के पेट में भर दिया और सुई धागे से उसके पेट को सील दिया। काम खत्म होने के बाद सब वापस कुटिया में चले गए और भेड़िया के जागने का इंतजार करने लगे।

 

कुछ देर बाद, भेड़िया जागा और अपने आपको भारी और थका हुआ महसूस किया। भेड़िया बहुत प्यासा था। बहुत मुश्किल से उसने अपने आपको खड़ा किया और दर्द से चिल्लाने लगा। पानी पिने के लिए भेड़िया नदी के पास और जब वह पानी पिने के निचे झुका, तो भेड़िया पत्थरों की भार से नदी के पानी में फिसल गया वही डूब मरा।

 

उम्मीद करता हूँ की आपको यह कहानी “भेड़िया और बकरी के सात बच्चे | The Wolf And The Seven Goat Children Story in Hindi” जरूर पसंद आई होगी। अगर पसंद आए तो इस कहानी को अपने सभी दोस्तों के साथ भी शेयर करें और नई नई कहानियां पढ़ने के लिए इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें।

 

यह भी पढ़े:-

 

और भी कहानियां पढ़े 

हिरण और शिकारी की कहानी
कछुआ और खरगोश की कहानी
शहरी चूहा और देहाती चूहा
बंदर और घंटी
उल्लू का राजतिलक

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *