पंचतंत्र की कहानी | साँप और साधु | Snake and Monk Panchatantra Story in Hindi

पंचतंत्र की कहानी: साँप और साधु | Snake and Monk Panchatantra Story in Hindi

Snake and Monks Panchatantra Story in Hindi

इस कहानी का नाम है “पंचतंत्र की कहानियां: साँप और साधु” उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

साँप और साधु पंचतंत्र की कहानी

एक जंगल में एक विषैला साँप रहता था। वह जंगल में एक कोने में रहता था और वहाँ जाने का साहस कोई नहीं करता था। एक दिन वहाँ एक साधु तपस्या करने के लिए आया।

 

साधु ने उस साँप को समझाया कि वह बुरे कर्म छोड़ दे और लोगों को न डसां करे। उसने अपनी सिद्धियों से साँप का विष भी समाप्त कर दिया। कुछ दिनों बाद साधु जंगल से चला गया। कुछ दिनों बाद जब साधु लौटा तो उसने साँप को अधमरी हालात में पाया। चिंतित होकर साधु ने साँप से इसका कारन पूछा।

 

साँप बताने लगा, “जब मैंने लोगों को डँसना बंद कर दिया तो उन्होंने मुझसे डरना ही बंद कर दिया। वे लोग मुझे पत्थर मारने लगे। इतना ही नहीं, मुझे खाना तक नहीं मिलता, इसलिए मैं कमजोर हो गया हूँ।”

 

इस पर साधु बोला, “जो तुम्हें हानि पहुँचाते है, उनसे तुम्हें अपनी सुरक्षा तो करनी ही चाहिए। और प्राकृतिक भोजन भी किया करो।” साँप ने उसकी बात मान और सूखी जीवन बिताने लगा।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर कोई हमें हानि पहुँचाने की कोशिश करे तो उनसे बचने के लिए हमें भी कुछ उपाय सोचना चाहिए। अगर हम चुपचाप रहेंगे तो सामने वाला हमें हानि पहुँचाकर चला जाएगा और हम इस संसार में कभी भी सुख से अपना जीवन नहीं गुजार सकेंगे।

 

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