पंचतंत्र की कहानी: शरारती बंदर

पंचतंत्र की कहानी: शरारती बंदर | Naughty Monkey Panchatantra Story in Hindi

Naughty Monkey Panchatantra Story in Hindi

इस कहानी का नाम है “पंचतंत्र की कहानियां: शरारती बंदर” उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

शरारती बंदर पंचतंत्र की कहानी

एक घने जंगल के पास एक गाँव था। वहाँ एक शरारती बंदर अपने दोस्तों के साथ रहता था। यह सभी बंदर बहुत ख़ुशी से रहते थे। और पेड़ो पर बहुत उछल-कूद करते थे।

 

एक आदमी उन पेड़ो की रखवाली करता था। बंदर उन पेड़ो से फल खाते और उस आदमी से बचकर रहते थे। जब वह आदमी पेड़ो के निचे सोता तो वे शरारती बंदर उसे बहुत तंग करता था। वे उस पर पेड़ के पत्ते फेंकते थे और उसे जगाने के लिए कई और प्रयास करता था।बंदरो की इस हरकत से वह आदमी अपनी नींद से उठ जाता था। और उन्हें वहाँ से भगा देता था। मगर वह बंदर हमेशा बचकर ही रहे।

 

एक बार, उस शरारती बंदर ने सोचा कि हमेशा इन पेड़ो पर ही क्यों रहा जाए? हम पास के गाँव में क्यों नहीं जाते? जैसे ही उसके दिमाग में यह ख्याल आया वह बंदर उस गाँव में चला गया। और देखा कि सुबह तो गाँव के लोग घर से निकलकर काम पर जाते है।

 

इस मौके का फ़ायदा उठाकर शरारती बंदर ने उस घर में प्रवेश किया। और जो भी खाना मिलता उसे खा जाता। उसने उस गाँव में बहुत हल्ला मचाया। बंदर जल्दी से अपने दोस्तों के पास गया और उन्हें भी उस गाँव के बारे में बताने लगा।

 

जैसे ही उस शरारती बंदर ने अपने सभी दोस्तों को यह बताया, सभी उसके पीछे-पीछे उस गाँव में चले गए। उसी समय सभी गाँव वासी काम के लिए निकल रहे थे। वे बंदर उस गाँव में अकेले थे। और उन पर नजर रखने वाला कोई नहीं था।उस शरारती बंदर के पीछे-पीछे सारे बंदरों ने घर में प्रवेश करके जो मन चाहा वह खाया और बहुत हल्ला मचाया। 

 

थोड़ी देर बाद गाँव वासीओ का लौटने का समय हो गया। घर की हालत देखकर वे दंग रह गए और परेशान होने लगे कि ऐसा सब किसने किया है? उन्हें तो पता भी नहीं चला की यह सब किसने किया है और रोज की तरह अपने काम पर चले गए। बंदरों का यह सिलसिला रोज शुरू हो गया।

 

एक दिन, एक बच्चे ने इन बंदरों को घर में घुसते देख लिया। बच्चे ने गांव वासियों को सारी बात बताई। अगले दिन, सारे गाँव वासी पेड़ो के पीछे छिप गए। तभी बंदरों का झुण्ड हल्ला करते हुए गाँव में घुसा। उन्होंने देखा कि यहसारे बंदर उनके घरों में घुसकर खाना खा रहे है और चोजों को फैला रहे है।

 

उन्ही गाँव वासियों में एक आदमी ने एक उपाय सोचा कि अगर वे पहले बंदरों के सरदार को पकड़ले तो बाकि बंदर भी डरके मारे यहाँ कभी वापस नहीं आएंगे। फिर आदमी ने गाँव वासियों से कहा, “आप सभी जाए और मुझे पतली गर्दन वाले दो मटके मूम्फ़ली से भरकर लेकर दें।”

 

गाँव वासियों ने उस आदमी की बात मानी और उसे दो पतली गर्दन वाले मूम्फ़ली से भरकर मटके लाकर दिए। आदमी ने उन मटको को लिया और कहा, “हमें इन्हें ऐसी जगह पर रखना है जहाँ बंदर इन्हें देख सके। और जैसे ही बंदर गाँव में आएंगे हमें दूर रहकर यह सब देखना पड़ेगा।

 

अगले दिन सारे गाँव वासी एक साथ जमा हुए और दूर से उन बंदरों को देखने लगे। रोज की तरह बंदरों की झुंड ने बहुत हल्ला मचाया। बंदरों का सरदार बाहर खड़ा था और उसने वह दो मटके दिखे। वह उन मटको के पास गया और देखा कि उन मटको में तो मूम्फ़ली रखी है। उस बंदर ने मटके में अपना हाथ डाला।

 

बंदर ने  अपना हाथ मूम्फ़ली से भर लिया था। और क्यूंकि उस मटके की गर्दन बहुत पतली थी इसलिए वह अपने हाथ को बाहर नहीं निकाल पा रहा था। उसने अपनी हाथ को बाहर निकालने की बहुत कोशिश की मगर कर न सका। उसी बीच बाकि के बंदरों ने गाँव वासियों को उनकी ओर आते हुए देखा।

 

बंदरों के झुंड ने अपने सरदार को भागने के लिए कहा लेकिन वह तो वहाँ से हिल भी नहीं पा रहा था। सभी गाँव वासियों ने उस बंदर के सरदार को घेर लिया। बाकि के बंदर यह देखकर वहाँ से भाग निकले। बेचारा बंदर सोच में पड़ गया कि वह बेकार में लालच में आकर इन मुमफलियों के चक्कर में फँस गया।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की लालच हमारे खतरे का कारण भी बन सकती है।

 

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