बंदर और घंटी | The Monkey and The Bell Story in Hindi

बंदर और घंटी | The Monkey and The Bell Story in Hindi

The Monkey and The Bell Story in Hindi

 

बंदर और घंटी

एक बार की बात है, एक डाकू गाँव में रहता था। एक दिन वह मंदिर गया। उसने वहाँ के खजाने के सारे सोने के आभुषण और मंदिर के चांदी की घंटी चुराली। वह घर जाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ रहा था। उसे उस पहाड़ी के जंगल को पार करके जाना था। एक चिता ने घंटी की आवाज सुनी तो वह सोचने लगा की कहाँ से यह आवाज आ रही है, तभी उसे डाकू दिखाई दिया। उसने डाकू पर हमला कर दिया और एक बार में ही उसे मार् डाला।

 

घंटी मैदान में ही गिर गई। कुछ देर बाद उसी रास्ते से बंदरों का एक झुंड गुजर रहा था। एक बंदर ने उस घंटी को उठा लिया और उससे खेलने लगा। उसे घंटी की आवाज बहुत अच्छी लगी। वह घंटी को साथ लेकर चल पड़ा।

 

जब गाँव वालों ने पहाड़ी से घंटी की आवाज आती सुनी, तो वे डरने लगे। उन्हें आश्चर्य होने लगी की घने जंगल में भला घंटी की आवाज कैसे आनी लगी। गाँव वाले इस रहस्य के बारे में बहस करने लगे। उन्होंने एक युवक को पहाड़ी पर रहस्य पता करने के लिए भेजा। वह युवक पहाड़ी पर पहुँचा और उस जंगल में गया।

 

पहाड़ी पर पहुँचते ही उस युवक को एक डाकू की लाश मिली। उसे बहुत जोर-जोर से घंटी की आवाज सुनाई देनी लगी पर उसे समझ नहीं आ रहा था की आवाज कहाँ से आ रही है। वह युवक डरके मारे पहाड़ी से उतारकर गाँव वापस आ गया। उसने गाँव के लोगों से कहा, “जंगल में एक आदमी की लाश पड़ी है और सायद उसकी ही आत्मा जगंल में भटक रही है। यह घंटी की आवाज सायद अगली मौत की निशानी है।” यह बात सुनकर गाँव वाले डर गए और इसी डर की बजह से उन्होंने जंगल में जाना छोड़ दिया।

 

वहाँ के राजा ने यह एलान करवाया कि जो कोई भी जंगल से उस बुरी आत्मा को भगाएगा, उसे इनाम दिया जाएगा। उस गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसने यह तय किया कि वह पता लगाएगा जंगल में क्या चल रहा है?

 

देर रात वह बूढ़ी औरत जंगल में गई। वहाँ उसने डाकू की लाश को देखा। उसने जो चीज़े लूटी थी वह भी इधर-उधर बिखरी पड़ी थी। चीता और डाकू के पैरों के निशान से सब कुछ पता चल रहा था। वही पर एक बंदर घंटी से खेल रहा था। यह सब देखकर वह बुढ़िया समझ गई की बात क्या है? वह वहाँ से सीधे राजा के महल में पहुँची और उनसे कहा की वह जंगल से उस आत्मा को हटा देगा और वह घंटी भी उन्हें लाकर देगा। राजा ने इसके लिए बुढ़िया को आज्ञा दे दी और काम पूरा होने पर ढेर सारा सोना देने का वादा किया।

 

अगले दिन वह बूढ़ी औरत जंगल में गई। उसने एक पेड़ के निचे बहुत सारे फल रखे और दूर से बंदरों पर नजर रखने लगी। जब बंदरों ने इतने सारे फलों को देखा तो वे उस पेड़ के पास आ गए। जब बंदर फल खाने में व्यस्त हो गए तो उस बुढ़िया ने चांदी के घंटी को उठा लिया। वह जंगल से वापस गाँव चली आई। राजा के पास आकर वह बोली, “महाराज, यही वह घंटी है जो वह आत्मा बजाती थी। अब वह आत्मा उस जंगल में कभी नहीं आएगी।”

 

राजा को यह सुनकर बहुत ख़ुशी हुई और वादे के मुताबिक राजा ने बुढ़िया को ढेर सोना दिया। गाँव में सभी लोगों ने बुढ़िया की बहादुरी की तारीफ की। उस दिन के बाद से कोई आवाज सुनाई नहीं दी और सब ख़ुशी से रहने लगे।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सुनी बातों पर कभी भी विशवास नहीं करना चाहिए। किसी भी बात की जाँच करके सच का पता लगाना चाहिए।

 

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