पंचतंत्र की कहानी | सियार और ढोल | Jackal and Drum Panchatantra Story in Hindi

पंचतंत्र की कहानी | सियार और ढोल | Jackal and Drum Panchatantra Story in Hindi

Jackal and Drum Panchatantra Story in Hindi

 

सियार और ढोल

एक भूखा सियार भोजन की तलाश में एक खाली पड़े खेत में इधर-उधर घूम रहा था। तभी उसे कुछ विचित्र सी आवाज़ सुनाई पड़ी। आवाज़ सुनकर सियार भयभीत हो गया और भागने की तैयारी करने लगा।

 

वह भागने ही वाला था की उसने अपने आप से कहा, “ये पता तो करना चाहिए की यह आवाज़ कैसी है और कौन यह आवाज़ निकाल रहा है। मैं जाकर देखता हूँ कि ये आवाज़ कहाँ से आ रही है।”

 

सियार सावधानी से चुपचाप उसी दिशा में आगे बड़ा, जहाँ से वह विचित्र आवाज़ आ रही थी। वहाँ पहुँचते ही सियार को एक ढोल दिखाई दिया। सियार समझ गया की ये एक ढोल है, जिस पर हवा चलने से पेड़ों की डालियाँ टकराती है और इसकी बजह से आवाज़ निकलती है।

 

सियार ने चैन की साँस ली। वह ढोल बजाने लगा। उसे लगा की ढोल के अंदर भोजन भी हो सकता है। वह ढोल में छेद करके उसके अंदर घुस गया। अंदर भोजन न पाकर वह काफी निराश हुआ। हालाँकि, उसने अपने आपको यह कहकर साँत्वना भी दी कि कम से कम उसे विचित्र आवाज़ का डर तो नहीं रहा।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बिना कुछ देखे समझे हमें बिलकुल भी घबराना नहीं चाहिए बल्कि उस जगह जाकर अच्छे से तलाशी करनी चाहिए।

 

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