पंचतंत्र की कहानियां: मेंढक और गधा | Frog and Donkey Panchatantra Story in Hindi

पंचतंत्र की कहानियां: मेंढक और गधा | Frog and Donkey Panchatantra Story in Hindi

Frog and Donkey Panchatantra Story in Hindi

 

मेंढक और गधा (पंचतंत्र की कहानियां)

एक गधा एक कीचड़ भरे मैदान में घास चर रहा था। उसका पैर झाड़ी पर पड़ा और उससे दो-तीन मेंढक मर गए। एक छोटा मेंढक अपनी माँ के पास जाकर बोला, “माँ एक बहुत बड़ा जानवर आया है और बहुत सारे मेंढकों को मार डाला है।”

 

उसकी माँ ने पूछा, “कितना बड़ा है वह? मेरे जितना?” बच्चा बोला, “नहीं। और भी बड़ा।”

 

उसके माँ ने अपने अंदर हवा भरकर खुद को और फुला दिया और पूछने लगी, “इतना।” बच्चा बोला, “नहीं। और अधिक बड़ा।”

 

उसकी माँ ने पूरा जोर लगाकर जितनी ज़ादा हवा अपने अंदर भर सकती थी, भर ली और बोली ,”अब? इतना ही बड़ा तो होगा।”  बच्चा बोला, “माँ तुम्हारा पेट जाएगा! और ज़ादा फुलाओ।”

 

उसकी माँ को और जोश आ गया। वह खुद को और अधिक फुलाती चली गई और आखिरकार फटाक की आवाज के साथ उसका पेट फट गया!

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कोई भी प्राणी अपना मन चाहा आकार नहीं बना सकता।

 

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