पंचतंत्र की कहानी | किसान और कसाई | Farmer and Butcher Story in Hindi

पंचतंत्र की कहानियां: किसान और कसाई | Farmer and Butcher Panchatantra Story in Hindi

Farmer and Butcher Panchatantra Story in Hindi 

इस कहानी का नाम है “पंचतंत्र की कहानियां: किसान और कसाई” उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी।

 

किसान और कसाई पंचतंत्र की कहानियां

मोहन एक किसान था। वह दिन-रात मेहनत कर अपने खेत में फसल उगाता था। उसके पास दो बैल थे। दोनों बैल बहुत वफादार और मेहनती थे। दोनों बैल कभी भी अपने मालिक का बुरा नहीं सोचते थे। उन्हें उनका मालिक बहुत पसंद था। एक बार जंगल से गुजरते वक़्त मोहन का पैर एक जाल में फँस गया। दोनों बैलों ने अपने मालिक की सहायता की। मोहन अपने स्वामीभक्ति से बहुत खुश हुआ। घर पहुँचकर मोहन ने अपनी माँ को जंगल का सारा किस्सा सुनाया। माँ भी दोनों बैलों का मोहन के लिए इतना प्रेम देख बहुत खुश हुई।

 

समय बीतता गया। कुछ सालों बाद मोहन की शादी हो गई। और उसके कुछ दिनों बाद मोहन के माँ का देहांत हो गया। मोहन के दोनों बैल भी अब बूढ़े हो गए थे। उनमें काम करने के ताकत खत्म हो गई थी। एक दिन मोहन की पत्नी ने उससे कहा कि यह बैल अब किसी काम के नहीं है। दोनों को मुफ्त में खिलाना-पिलाना पड़ेगा इसलिए अब उन्हें बेच देना चाहिए।”

 

पत्नी की बातें सुन दोनों बैलों को बहुत बुरा लगा और वे रोने लगे। पत्नी के बार-बार कहने पर मोहन ने अपने दोनों बैलों को एक कसाई को बेचने का फैसला कर लिया। भारी मन से वह अपने बैलों को कसाई के पास छोड़ने चला गया।

 

कसाई के पास पहुँचकर मोहन ने दोनों बैलों की लगाम कसाई को थमा दिए। बदले में कसाई ने उसे कुछ रूपए दिए। जब मोहन वहाँ से जाने लगा तब उसके दोनों बैल उसके पैरों के सामने रोने लगे। मोहन वहाँ से चला गया। और दोनों बैल अपने मालिक को जाता देखते रहे।

 

कुछ समय के बाद वहाँ एक चोर आया। उसने कसाई से पैसे माँगे। तभी कसाई ने कहा कि उसके पास पैसे नहीं है, उसने अभी-अभी बैलों के बदले 400 रूपए मोहन को दिए है, जो अपने घर के तरफ गया है। चोर मोहन के पीछे चला गया। यह पूरी घटना मोहन के दोनों बैलों ने भी देखा और वे दोनों परेशान हो गए।

 

अपने मालिक को खतरे में देख दोनों बैलों ने कसाई को जोर से सींग मार रस्सी छुड़ा ली। और दोनों बैल चोर के पीछे भागने लगे। रास्ते में मोहन को अकेला देख चोर ने उसका रास्ता देख लिया। और उससे पैसे माँगने लगा। लेकिन तभी मोहन के दोनों बैल वहाँ आ गए। गुस्से में दोनों बैलों को अपनी तरफ आता देख चोर सकपका गया। दोनों बैलों के डर से चोर वहाँ से भाग गया।

 

दोनों बैलों की वफादारी देख मोहन को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने दोनों से हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी और रोने लगा। मोहन के आँसू देख दोनों बैल प्यार से उसे चाटने लगे। और अपनी पुच और गर्दन हिलाकर अपना प्यार दिखाने लगे। मोहन दोनों बैलों को वापस घर ले गया।

 

मोहन को बैलों के साथ वापस आता देख मोहन की पत्नी बहुत गुस्सा हुई। मोहन ने अपनी पत्नी को रास्ते की सारी बात बताई कि कैसे उसके दोनों बैलों ने  चोरों से बचाया। उसकी पत्नी को अपनी भूल का एहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह अब इन दोनों बैलों को कभी भी मोहन से अलग नहीं करेगी।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी उन लोगों को खुद से दूर नहीं करना चाहिए जो हमारे वफादार होते हैं। वफादारी सबसे अनमोल गुण है। जो लोग हमसे वफादारी करे हमें उनकी इज़्ज़त करनी चाहिए।

 

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