पंचतंत्र की कहानी: शिकारी और बटेर

पंचतंत्र की कहानी: शिकारी और बटेर | Hunter and Quails Panchatantra Story in Hindi

Hunter and Quails Panchatantra Story in Hindi

इस कहानी का नाम है “पंचतंत्र की कहानी: शिकारी और बटेर'” उम्मीद है आपको कहानी पसंद आएगी।

 

शिकारी और बटेर पंचतंत्र की कहानी

एक समय की बात है, एक घने जंगल में बटेरों का एक बड़ा झुंड रहता था। वे सभी एक साथ रहते थे। और हमेशा करीब रहते थे। कभी भी उन्हें अकेले या एक दूसरे के बिना नहीं दिखा गया। क्यूंकि वे एक संगठित समूह थे। एक दिन उस बटेरों के झुंड को एक शिकारी ने देख लिया। शिकारी ने बटेरों के झुंड को देखा और उन पेड़ो की जानकारी हासिल की जिन पेड़ो पर वे एक साथ रहते थे।

 

शिकारी हर दिनपेड़ो का दोहरा करता था। वह उन बटेरों के व्यवहार को देखता था। धीरे-धीरे उसने उनकी भाषा सीखी। और फिर जब वह उसमें कुशल हो गया, तो उसने पेड़ो के पास जाकर पक्षियों को बुलाया। बहुत से बटेर इकट्ठे हुए, यह देखने के लिए कि उन्हें कौन बुला रहा है। वे धनि से आकर्षित थे और यह देखने के लिए उत्सुक थे कि यह कहाँ से आ रही है।

 

शिकारी ने कई दिनों तक ऐसा किया। अंत में एक दिन, उसने उनकी भाषा में पक्षियों को बुलाया और वे सभी पेड़ से बाहर आ गए। बस उसी क्षण शिकारी ने अपना जाल डाला। उन सभी को पकड़ लिया और उन्हें बाजार में बेच दिया।

 

उस झुंड में एक पुराणी बटेर थे। वह बूढ़ी थी और सबसे चतुर भी थी। उसने शिकारी के चाल को समझा और अन्य बटेरों को बताया, “दोस्तों इस शिकारी ने हमारी भाषा सीखी है। और इसलिए वह इसका इस्तिमाल हमें इकट्ठा करने के लिए कर रहा है। उससे बचने के लिए मेरे पास एक तरकीब है। जब शिकारी अपना जाल डालता है, तो बस अपनी चोंच से जाल को कसकर पकड़े और उस जगह से उड़ जाए। फिर एक कांटेदार झाड़ी पर जाल फैलाए जिससे यह फट जाएगा। और इस तरह आप खुदको मुक्त कर सकते हैं।” बटेरों ने विचार को पसंद किया और पुराणी बटेर से वादा किया कि वे अगली बार उसकी सलाह का पालन करेंगे।

 

अगले दिन, शिकारी फिरसे अपने जाल के साथ आया। और उसने पक्षियों के पकड़ने के लिए उन पर जाल डाला। फिर बटेरों ने उस पुराणी बटेर की सलाह मानी और शिकारी से बच गए। शिकारी निराश होकर घर लौट गया। उसके बाद, हर दिन उन्होंने वही चाल चली, जब शिकारी उन पर अपना जाल डालता।

 

शिकारी न केवल पैसे के बिना घर जाता बल्कि हर दिन एक जाल भी खो देता। उसे खाली हाथ आते देख शिकारी की पत्नी ने कहा, तुम हर रोज बिना पैसे के घर आते हो। बटेरों को बेचकर सारे पैसे तुम कहाँ देकर आते हो?” शिकारी ने कहा, “मेरे प्रिय, मैं पैसे नहीं दे रहा हूँ, मैं आज-कल किसी पक्षी को पकड़ ही नहीं पा रहा हूँ। बटेरों ने एक चाल सीखी है, जिसके द्वारा वे मुझसे बच जाते हैं वे एक जुट रहते है इसलिए मुझसे बच जाते हैं। यदि वे अलग हो जाए तो वे निश्चित रूप से मेरे जाल में फँस जाएँगे।”

 

एक दिन, जब बटेर अनाज खा रहे थे, तो उनमें से एक गलती से दूसरे के ऊपर गिर गया। दूसरा बटेर गुस्से से आया। पहले बटेर ने माफी माँगी। लेकिन दूसरे बटेर ने बात नहीं मानी और इस तरह से बटेरों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। वह बूढ़ी बटेर उनके बीच शांति लेन के लिए आई। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

 

शिकारी, जो इस पल का प्रतीक्षा कर रहा था, उसने अब अपना जाल उन पर डाला। और उन्हें उनकी भाषा में बुलाया। बिना सोचे-समझे बटेर निचे उड़ गए और जाल में फँस गए। तब भी झगड़ा जारी था कि कौन पहले जाल उठाएगा। हर एक ने दूसरे से कहा और झुंड में किसी ने कुछ भी नहीं किया। शिकारी तेजी से दौड़ा। पक्षियों के साथ जाल इकट्ठा किया और ख़ुशी-ख़ुशी बाजार चला गया।

 

देखते ही देखते वह अमीर हो गया। और बटेर का झुंड इस अनबन के कारन अब गायब हो गया था।

 

इस कहानी से सीख, Moral of The Story:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि एकता में अटूट शक्ति है। इसके बिना हम में कोई ताकत नहीं।

 

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