Mulla Nasruddin Stories in Hindi

मुल्ला नसरुद्दीन के 6 मजेदार हिंदी कहानियां | Mulla Nasruddin Stories in Hindi

 

Mulla Nasruddin Stories in Hindi, मुल्ला नसरुद्दीन के 6 मजेदार हिंदी कहानियां

 

Mulla Nasruddin Stories in Hindi

 

(1) चतुर लोगों की चतुराई /Mulla Nasruddin Stories in Hindi

एक सुबह मुल्ला नसरुद्दीन एक झील के आसपास भटक रहा था। ठंडी हवा झील की सतह पर लहरे पैदा कर रही थी। झील के चारों ओर हरी-हरी घास थी, चारों ओर पंची चहक रहे थे। मुल्ला नसरुद्दीन झील के किनारे बैठे प्रकृति का आनंद ले रहा था। उसने अपने आसपास के छोटे-छोटे कंकर जमा किए और उन्हें पानी में फेकना शुरू कर दिया जिससे पानी में और ज्यादा लहरे पैदा हो रही थी। कंकर से बचने के लिए मछलियां इधर-उधर भागने लगी। बतखों की आवाज सुनकर मुल्ला सोच में पड़ गया। उसने देखा की झील  में बतखों का झुंड तेर रहा है। मुल्ला ने मन ही मन सोचा, “रात के खाने के लिए एक दो बतख पकड़ना अच्छा रहेगा।” मुल्ला उठकर बतखों के पास जाने के लिए पानी में उतर गया। रात के शोरबे के बारे में सोचकर मुल्ला काफी उत्साहित था।

 

बतखों ने मुल्ला को आते देखा और दूर चले गए। लेकिन मुल्ला उनकी ओर बढ़ता रहा। उसने बतखों को खाने की ठान ली थी ,जैसे ही मुल्ला ने उनकी ओर  छलान लगाई बरख उड़ गए। हैरान मुल्ला फिसलता हुआ पानी के निचे फिसल गया। सांस लेने के लिए उसने जैसे ही हवा लेने की कोशिश की उसने हवा की जगह पानी की बूंद ले ली। आखिरकार वह खांसता हुआ झील से बाहर निकला और किनारे पर बैठ गया।

 

उसने सोचा, भले ही मैं पहलीबार असफल हुआ हूँ फिर भी कोशिश करूँगा। मुझे उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।” लेकिन बतख इस बार और ज्यादा साबधान होगए और उनकी एक अलग ही योजना थी। सभी बतख झील के बीचो बीच जमा हो गए और एक इंच भी आगे नहीं बढ़ रहे थे। क्युकी मुल्ला के पास और कोई चारा नहीं था इसलिए वह झील में उतर गया और झील के बीच चला गया। लेकिन फिर बतख दूसरे किनारे चले गए।

 

कई असफल प्रयासों के बाद मुल्ला थक गया और झील के किनारे लेट गया ताकि वह खुदको सूखा सके और थोड़ी सांस ले सके। थोड़ी देर बाद उसने अपना झोला खोला। उसने उसमे से एक रोटी निकाली और उसे पानी में डुबोकर खाने लगा। पास के गांव के कुछ लोग झील के पास से गुजर रहे थे। जब उन्होंने देखा की मुल्ला झील में रोटी डुबोकर खा रहा है तब एक आदमी ने पूछा, “मुल्ला क्या कर रहे हो?” मुल्ला ने जवाब दिया, “यह बतख का शोरबा है।” उस आदमी ने मुल्ला की ओर आश्चर्य से देखता हुआ पूछा, “बतख का शोरबा?” गांव के बाकि लोग एक दूसरे को हैरानी से देखते रहे। मुल्ला ने उनकी उलझन को देखा और हंसते हुए जवाब दिया, “चतुर लोग ऐसे ही करते है। जो असफलता को स्वीकार करता है वह हमेशा खुश रहता है।”

 

(2) घर में भीड़ / Mulla Nasruddin Stories in Hindi

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने पडोसी से बात कर रहे थे। पडोसी काफी दुखी लग रहा था। मुल्ला ने उसे अपने परेशानी का कारन पूछा। उस शख्स ने अपने घर के बारे में शिकायत करते हुए मुल्ला से कहा, “हमारा घर इतना छोटा है की मुझे मेरी बीवी, तीन बच्चे और मेरी सास को साथ में मिलकर रहने के लिए काफी दिक्कत होती है। हमारा घर इतना छोटा है की हमारे पास जगह ही नहीं बचती।”

 

पडोसी ने मुल्ला से अपने परेशानी का समाधान माँगा। नसरुद्दीन ने पूछा, “क्या तुम्हारे पास मुर्गिया है?” पडोसी ने जवाब दिया, “हाँ, दस है।” नसरुद्दीन ने कहा, “तो ऐसा करो उन्हें अपने घर में रखो।” पडोसी ने चिंकते हुए कहा, “लेकिन मेरे घर में तो पहले से ही इतनी भीड़ है की जगह ही नहीं।” मुल्ला फिर बोला, “जैसा मैं कह रहा हूँ आप वैसा ही करें।” पडोसी घर में जगह को लेकर बहुत परेशान था और इसका हल ढूंढना चाहता था। उसने मुल्ला की दी हुई सलाह के बारे में सोचा। घर पहुंचते ही उसने अपने सारे मुर्गियों को घर के अंदर ले आया।

 

अगले दिन, पडोसी मुल्ला से मिलने के लिए पहुंचा और उनसे कहा, “आपकी बताई गई सलाह को मैंने माना लेकिन उससे परेशानी का कोई हल ही नहीं निकला। इस सलाह से तो मेरे घर में जगह और भी कम हो गई है।” मुल्ला ने सोचा और कहा, “एक काम करो, अब जो गधा तुम्हारे पास है उसे भी अपने घर के अंदर ले जाओ।” पडोसी इस सलाह से खुश नहीं था पर ऐसा करने के लिए मुल्ला ने उसे मना लिया।

 

अगले दिन, पडोसी मुल्ला से मिलने पहुंचा। वह बहुत ही परेशान लग रहा था और उसने मुल्ला से कहा , “अब हमारे घर में छह इंसान, दस मुर्गिया और एक गधा रह रहे है। घर में किसी को हिलने की भी जगह नहीं बची।” मुल्ला बोले, “क्या तुम्हारे पास एक बकरी है?” पडोसी ने कहा, “हाँ है।” मुल्ला ने कहा, “तो उसे भी अपने घर के अंदर रखो।” पडोसी को यह बात सुनकर एतराज हुआ और उसने गुस्से में मुल्ला से पूछा, “आपकी सलाह से मेरी परेशानी का हल कैसे निकलेगा।” हर बार की तरह फिरसे मुल्ला ने पडोसी को मना लिया।

 

अगले दिन, पडोसी फिरसे मुल्ला से मिलने के लिए पहुंचा और बहुत गुस्से से कहा, “आपकी बताई गई सलाह से हमारी जिंदगी में परेशानी और भी बढ़ गई है। अब हमारे घर में जगह इतनी कम हो गई है की सांस लेने के लिए भी दिक्कत हो रही है। मेरा परिवार जगह की कमी के लिए शिकायत कर रहा है और बहुत दुखी है।” मुल्ला ने कहा, “दुखी न हो मेरे दोस्त। घर वापस जाओ और घर में जो सारे जानवर रह रहे है उन्हें बाहर निकाल दो।” पडोसी ने ऐसा ही किया। सारे जानवरों को घर से बाहर निकाल दिया।

 

अगले दिन, जब पडोसी मुल्ला से मिला तो वह बहुत खुश था। उसने मुल्ला से कहा, “आपकी बताई गई सलाह मैंने मानी और मैंने सारे जानवरों को घर से बाहर कर दिया। अब जब सारे जानवर घर से बाहर है तो घर में हम सबके लिए बहुत जगह है। घर में सब खुश है। आपका बहुत सुक्रिया।

 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की जो हमारे पास है उसी में ख़ुशी ढूंढ पाना असली ख़ुशी है। 

 

(3) लोगों की राय / Mulla Nasruddin Stories in Hindi

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन और उनका बेटा अपना गधा लेकर दूसरे शहर जाने के लिए रुके। नरुद्दीन ने चलकर जाना सही समझा जबकि उनके बेटे को गधे पर सवार होकर जाना सही लगा। कुछ दूर चलते ही उन्हें लोगों का एक झुंड दिखा। झुंड में से एक शख्स ने कहा, “देखो कितना स्वार्थी बेटा है, खुद गधे पर बैठकर जा रहा है और उसका बुजुर्ग पिता चलकर जाने के लिए मजबूर है। यह तो बहुत बिगड़ी हुई औलाद है।” यह सुनकर मुल्ला के बेटे को बहुत शर्मिंदिगी हुई और वह गधे से उतर गया और मुल्ला को गधे पर बैठने के लिए कहा।

 

कुछ दूर चलते ही उन्हें फिरसे कुछ लोगों का झुंड दिखा। झुंड में से आवाज आई, “कितनी अजीब बात है, बेचारा लड़का चलकर जा रहा है और उसका पिता आराम से गधे पर सवार होकर जा रहा है। अपने बेटे के साथ इस तरह का बर्ताब करने के लिए ऐसे पिता को तो अपने आप पर शर्म आनी चाहिए।” यह बात सुन मुल्ला बहुत उदास हो गया। लोगों के इन बातों से बचने के लिए मुल्ला ने अपने बेटे को भी अपने साथ सवार कर लिया।

 

कुछ देर बाद उन्हें कुछ और लोगों ने कोशना शुरू कर दिया। लोगों के झुंड में से एक शख्स ने कहा, “कितने निर्दय है यह दोनों, गधे पर सवार होकर जा रहे है। बेचारा गधा इन दोनों का भार उठा रहा है। इनकी इन हरकतों के लिए इन्हे तो हवालात में बंध कर देना चाहिए।” नसरुद्दीन ने यह सुन अपने बेटे से कहा, “ऐसी बेहूदा बातों से बचने के लिए हमें सायद गधे से उतर जाना चाहिए।” दोनों गधे से उतारकर चलने लगे।

 

कुछ दूर और चलने पर उन्हें फिरसे कुछ लोगों का झुंड दिखा जो जोर-जोर से दोनों पर हंस रहे थे। झुंड में से एक शख्स ने कहा, “इन दोनों को देखो, इतनी धुप में गधे पर सवार होने के वजाइ दोनों गधे के साथ पैदल चल रहे है। कितने कम अक्ल है यह दोनों।”

 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की अगर हम लोगों की बिना सोची हुई राय सुने तो न हम खुश रह पाएंगे और न लोग अपनी राय देने से रुकेंगे। 

 

(4) दूध का डब्बा /Mulla Nasruddin Stories in Hindi

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन कही जा रहे थे तो रास्ते में उनकी मुलाकात एक शख्स से हुई, जो दूध से भरा एक डब्बा ले जा रहा था। मुल्ला नसरुद्दीन को सलाम कर उसने कहा, “मुल्ला जी, मेरा एक मसला है, क्या आप उस मसले को हल करने में मेरी मदद करेंगे?” मुल्ला नसरुद्दीन उस शख्स की बात सुनने के लिए तैयार हो गए और उनकी नजर उस शख्स के हाथ में दूध के डब्बे पर पड़ी।

 

उस शख्स ने कहा, “मैं जब भी सुबह उठता हूँ तो मुझे नशा सा महसूस होता है। मेरा सर घूमने लगता है। और बहुत जोरो से मेरे सर में दर्द भी होता है। मुझे समझ नहीं आ रहा है की इसकी क्या वजह हो सकती है।” मुल्ला नसरुद्दीन ने पूछा, “यह तो एक काफी गंभीर मसला लगता है। मुझे सोचने दो। आप सोने से पहले क्या कुछ खाते और पीते हो?” उस शख्स ने जवाब दिया, “हाँ मुल्ला जी, एक दूध का बड़ा गिलास पिता हूँ।”

 

मुल्ला ने कहा, “मुझे आपके मसले का हल पता चल गया। आप सोने से पहले जो बड़ा गिलास दूध का पीते हो उस बजह से आपको सुबह उठते ही नशा सा महसूस होता है।” उस भोले इंसान ने पूछा, “दूध से नशा! वह कैसे मुल्ला जी?” मुल्ला ने समझाते हुए कहा, “आप सोने से पहले दूध पीते हो। जब आप सोते वक़्त बिस्तर में करवट लेते हो तो वह दूध हिल-हिलकर मक्खन में बदल जाता है और मक्खन फर्बा में बदल जाता है, फर्बा चीनी में बदल जाता है और घूम घूम के चीनी शराब में बदल जाता है। तो आप जब सुबह उठते हो तो आपकी पेट में शराब होती है। और उसकी बजह से आपको सुबह नशा सा महसूस होता है।”

 

शख्स ने पूछा, “तो मुल्ला जी मैं क्या करूँ?” मुल्ला ने कहा, “आपके मसले का एक आसान सा हल है। आप दूध पीना बंध कर दे और यह दूध का डब्बा मुझे दे दें।” मुल्ला ने बड़ी आसानी से उस शख्स से दूध का डब्बा ले लिया और अपने रास्ते चल पड़ा। बेचारा शख्स वहां खड़ा हक्का बक्का होकर रह गया।

 

(5) चाय की दुकान /Mulla Nasruddin Stories in Hindi

मुल्ला नसरुद्दीन अपनी पसंदीदा चाय की दुकान में बैठकर चाय का मजा ले रहे थे। एक बारह साल का लड़का दरवाजे से भागता हुआ आया और मुल्ला की तरफ बढ़ उसके सर से पगड़ी उछाल दिया। मुल्ला को लड़के की इस सरारत पर ताज्जुब हुआ। लड़का पगड़ी उछाल दूर भाग गया। लेकिन मुल्ला नसरुद्दीन इस सरारत पर चुप रहे। उन्होंने अपनी पगड़ी उठाई और दुबारा सर पर पहनली।

 

अगले दिन, फिर उस लड़के ने वही सरारत की। मुल्ला ने फिरसे लड़के से कुछ नहीं कहा। यह कई दिनों तक चला। लेकिन मुल्ला को हमेशा की तरह इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उस लड़के को यह लगने लगा था की उसकी यह सरारत बहुत दिलचस्प है और हर रोज वह मुल्ला के साथ यही सरारत करता था। मुल्ला हमेशा की तरह अपनी पगड़ी उठाते थे और साफ कर पहन लेते थे।

 

एक दिन, मुल्ला के दोस्त ने उनसे इस बारे में सवाल किया, “आप उस सरारती लड़के को सजा क्यों नहीं देते। वह कितनी बदतमीजी से आपके साथ पेशाता है।” मुल्ला ने जवाब दिया, “इसकी कोई जरुरत नहीं।”

 

एक दिन मुल्ला चाय की दुकान पर थोड़ा देर से पहुंचे। जब दुकान पर पहुंचे तो उन्होंने देखा की उनकी हर रोज की जगह पर एक लंबा चौड़ा सिपाही बैठा था। वह किसी भी मुसीबत में नहीं पढ़ना चाहता था तो इसलिए वह दूसरी कुर्सी पर जाकर बैठ गए। कुछ देर बाद, वह सरारती लड़का फिरसे दुकान के दरवाजे से भागते हुए आया और जहाँ हर रोज मुल्ला बैठते थे वहां पहुंच गया। उसने वहां बैठे सिपाही की पगड़ी उछाल दी। बेचारा लड़का इतनी जल्दी में था की देख नहीं पाया की कुर्सी पर बैठकर चाय मुल्ला नहीं सिपाही पी रहा है। लड़के के इस शरारत पर सिपाही को बहुत गुस्सा आया। उसने लड़के को गिरेवान से पकड़ा और उठा लिया। यह देख मुल्ला नसरुद्दीन ने अपने दोस्त से कहा,”अब तुम्हे समझमे आया मैं क्यों इतने दिन चुप रहा?”

 

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की हमें हमेशा सही वक़्त का इंतजार करना चाहिए। 

 

(6) गधे के रिश्तेदार / Mulla Nasruddin Stories in Hindi

एक दिन, मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे पर सब्जियों से भरा थैला बाजार में बेचने के लिए जा रहा था। कुछ दूर वह दोनों चले ही थे की मुल्ला का गधा बीच रास्ते में रुक गया और एक कदम भी आगे बढ़ने से मना कर दिया। नसरुद्दीन बहुत जल्दी में था। उसने गधे को मनाना शुरू किया। लेकिन गधे पर तो कुछ असर ही नहीं हुआ। थोड़ा और मनाने पर उसने गधे को आगे बढ़ने की दरखास्त की। लेकिन गधे पर तो मुल्ला के बातों का कोई असर ही नहीं हो रहा था।

 

आखिरकार मुल्ला मायूस हो गया और गधे को जोर से एक लात मारी। आसपास से गुजर रहे लोगों ने मुल्ला को गधे को लात मारते हुए देखा। एक शख्स ने पूछा ,”इस बेचारे बेजुबान जानवर को तुम क्यों मार रहे हो?” दूसरे ने कहा, ” तुम बहुत ही निर्दय हो जो इस तरह से गधे को  मार रहे हो।” तीसरे शख्स ने कहा, “तुम्हारी इस हरकत के लिए तो तुम्हे हवालात में बंध कर तुम पर कोड़े बरसाने चाहिए।”

 

मुल्ला नसरुद्दीन आसपास के लोगों के इन बातों से बहुत गुस्सा आ गया और गधे से कहा, “अगर मुझे पता होता की यहाँ पर तुम्हारे इतने सारे रिश्तेदार है तो मैं तुम्हे कभी लात नहीं मारता। मैं देख सकता हूँ की यहाँ पर तुम्हारा काफी बड़ा परिवार है।” मुल्ला का यह ताना सुन लोगो वहां से अपना रास्ता चलने लगे और मुल्ला और उसके गधे को अपने हाल पर छोड़ दिया।

 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की जब तक बात की पूरी जानकारी न हो तो कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचना चाहिए।

 

दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको मुल्ला नसरुद्दीन की यह मजेदार कहानिया (Mulla Nasruddin Stories in Hindi) जरूर पसंद आई होगी अगर कहानी अच्छी लगे तो कमेंट जरूर करें और साथ ही अपने दोस्त और परिवार के साथ भी इस कहानी को शेयर करें। 

 

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