कौन अच्छा कौन बुरा | Kaun Accha Kaun Bura Story in Hindi

कौन अच्छा कौन बुरा | Kaun Accha Kaun Bura Story in Hindi

 

Kaun Accha Kaun Bura Story in Hindi

 

कौन अच्छा कौन बुरा

यह बात महाभारत के समय की है। पांडवो और कौरवो को गुरु द्रोणाचार्य शिक्षा दे रहे थे। एक बार उनके मन में अपने शिष्यों की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने अपने शिष्य दुर्योधन को अपने कक्ष में बुलाया और उससे कहा, “वत्स एक काम करो, किसी अच्छे आदमी की खोज करो और उसे मेरे पास लेकर आओ।”

 

दुर्योधन ने कहा, “ठीक है आचार्य, मैं अभी आश्रम से निकलकर अच्छे आदमी की खोज करना शुरू कर देता हूँ।”

 

दुर्योधन कुछ दिनों बाद वापस आश्रम लौटकर आया और आचार्य से कहा, “आचार्य मैंने पुरे ध्यान से हर जगह जाकर दूर-दूर तक खोजा लेकिन मुझे एक भी अच्छा आदमी नहीं मिला जिसे मैं आपके पास ला सकू।”

 

 

आचार्य ने कहा, “ठीक है तुम युधिष्ठिर को मेरे पास भेज दो।”

 

युधिष्ठिर जब आचार्य के पास आया तो आचार्य ने कहा, “वत्स एक काम करो, किसी बुरे आदमी की खोज करो और उसे मेरे पास लेकर आओ।”

 

युधिष्ठिर आचार्य की बात मानकर बुरे आदमी की खोज के लिए निकल पड़ा। कुछ दिनों बाद युधिष्ठिर भी बिना किसी को अपने साथ लाए आश्रम में लौट आया।

 

आचार्य ने युधिष्ठिर से पूछा, “वत्स तुमने कई दिनों तक कई जगहों पर भ्रमण किया और फिर भी तुम एक भी बुरे आदमी को लेकर नहीं आ पाए।”

 

 

युधिष्ठिर ने जवाब दिया, “जी गुरूजी, मुझे किसी भी आदमी में इतनी ज्यादा बुराई नहीं दिखाई दिया की उसे बुरा मानकर मैं आपके पास ले आता।”

 

इस पर बाकि सारे शिष्य हैरान हुए और आचार्य से बोले, “गुरूजी ऐसा कैसे संभव हो सकता है की दुर्योधन को एक भी अच्छा आदमी नहीं मिला और युधिष्ठिर को एक भी बुरा आदमी नहीं मिला!”

 

तब गुरूजी ने समझाया, “शिष्य जब हम किसी को देखते है तो उसे उस नजर से देखते है जैसा हम खुद होते है। फिर हम उस नज़रिए से ही किसी को परखते है की कोई व्यक्ति अच्छा है या फिर बुरा। युधिष्ठिर को कोई भी बुरा व्यक्ति नजर नहीं आया क्युकी वह स्वयं अच्छा है तो उसे बाकि सब भी अच्छे लगे और कोई बुरा नहीं लगा। तुम जिस व्यक्ति में जो देखना चाहते हो तुम्हे वही दिखेगा।”

 

दोस्तों आम जिंदगी में भी हम यही करते है, किसी के बारे में पहले से, अपनी सीमित सोच से कई राय बना लेते है फिर उसे अच्छे या बुरे का दर्जा दे देते हैं। किसी का अच्छा या बुरा होना केवल उसके स्वभाव पर ही पूरी तरह निर्भर करता है। किसी को परखने में हमारे खुद के नजरिये का भी बहुत महत्व होता है।

 

 

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको यह कहानी “कौन अच्छा कौन बुरा | Kaun Accha Kaun Bura Story in Hindi” जरूर अच्छी लगी होगी। कहानी अच्छी लगे तो कमेंट करके अपना विचार जरूर हमसे शेयर करे और इसी तरह और भी ढेरों कहानिया पढ़ने के लिए हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें।

 

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