बंदर और सुगरी की एक प्रेरणादायक कहानी | Best Motivational Story in Hindi

बंदर और सुगरी की एक प्रेरणादायक कहानी | Best Motivational Story in Hindi

 

Best Motivational Story in Hindi

 

दोस्तों आज के पोस्ट में मैं आप सबको बंदर और सुगरी की एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी बताने जा रही हूँ जो आपको काफी पसंद आएगी और इस कहानी से आपको काफी कुछ सिखने को भी मिलेगा तो दोस्तों चलिए कहानी शुरू करते है।

 

बंदर और सुगरी की कहानी 

सुंदरवन में ठण्ड दस्तक दे रही थी। सभी जानबर आने वाले मौसम के लिए तैयारी में लगे हुए थे। सुगरी चिड़िया भी उनमे से एक थी। हर साल की तरह उसने अपने लिए एक शानदार घोसला तैयार किया था और अचानक होने वाली बारिश और ठण्ड से बचने के लिए उसने चारो  तरफ से घासफूस से ढक दिया था।

 

सब कुछ ठीक चल  रहा था  की अचानक एक दिन बिजली कड़कने लगी और देखते ही देखत्ते घनघोर वर्षा होने लगी। बेमौसम आई बारिश से ठण्ड भी बढ़ गई थी और सभी जानबर अपने अपने घरो की तरफ भागंने लगे। सुगरी भी तेजी दिखाते हुए अपने घोसले में वापस आ गई और आराम करने लगी।

 

 

उसे आए हुए अभी कुछ ही वक़्त हुआ था की तभी एक बंदर खुदको बचाने के लिए पेड़ के निचे आ पहुंचा। सुगरी ने बंदर को देखते ही कहा, “अरे, तुम इतने होशियार बने फिरते हो तो भला ऐसे मौसम से बचने के लिए घर क्यों नहीं बनाया।” यह सुनकर बंदर को गुस्सा आया लेकिन वह चुप ही रहा और पेड़ की आड़ में खुदको बचाने का प्रयास करने लगा।

 

थोड़ी देर शांत रहने के बाद सुगरी फिरसे बोली, “पूरी गर्मी इधर-उधर आलस में बिताती, अच्छा होता अपने लिए एक घर बना लेते।” यह सुनकर बंदर को और भी गुस्सा आया और उसने कहा, “तुम अपने से मतलब रखो मेरी चिंता छोड़दो।” सुगरी शांत हो गई। बारिश तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और हवाए भी तेज चल रही थी। बेचारा बंदर ठण्ड से कांप रहा था और खुदको ढकने की काफी कोशिश कर रहा था पर सुगरी ने तो मानो उसे छेड़ने की कसम खा रखी थी। वह फिरसे बोली, “काश तुमने थोड़ी अक्ल दिखाई होती तो आज इस हालत में न रहना पढता…”

 

 

सुगरी ने अभी अपनी बात ख़त्म भी नहीं की थी कीबंदर बौखलाते हुए बोला, “एकदम चुप, अपना यह बार बार फुसफुसाना बंध करो, यह ज्ञान की बातें अपने पास रखो और पंडित बनने की कोशिश मत करो। सुगरी चुप हो गई। अब तक काफी पानी गिर चूका था। बंदर बिलकुल भीगा हुआ था और बुरी तरह से कांप रहा था। इतने में सुगरी से रहा नहीं गया और वह फिरसे बोली, “कमसकम अब घर बनाना तो सीख लेना।” इतना सुनते ही बंदर को काफी गुस्सा आया और वह तुरंत पेड़ पर चढ़ने लगा।

 

बंदर ने कहा, “भले ही मुझे घर बनाना नहआता लेकिहन घर तोडना अच्छी तरह से  आता है। अब सुगरी भी बंदर की तरह बेघर हो चुकी थी अब वह भी ठंड से कांप रही थी और उसे अपने बर्ताब से काफी पछतावा भी हो रहा था।

 

 

दोस्तों ऐसा बहुत बार होता है की लोग मुसीबत में पढ़े लोगो की मदद करने की बजाई उसे दुनियभर की नसीयत देने लगते है। वयस्क होने के नाते हर कोई अपने स्तिथि के लिए खुद जिम्मेदार होता है। हम एक शुभचिंतक के रूप में उसे एक आध बार सलाह दे सकते है पर उसकी किसी कमी के लिए बार बार उसे कोसना हमें सुगरी चिड़िया की हालात में पहुंचा सकता है इसलिए किसी मुश्किल में पढ़े व्यक्ति की हम मदद कर सकते है और मदद नहीं कर सकते तो उन्हें बेकार के उद्देश्य नहीं देना चाहिए ऐसा करने से हमारा ही नुकशान होता है। 

 

तो दोस्तों आपको यह कहानी “बंदर और सुगरी की एक प्रेरणादायक कहानी | Best Motivational Story in Hindi “ कैसी लगी निचे कमेंट में जरूर बताए और अगर आप इसी तरह और भी प्रेरणादायक कहानी पढ़ना चाहते है तो हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें।

 

यह भी पढ़े:-

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *