बाह रे मुल्ला तेरा जवाब नहीं | Mulla Nasruddin Story in Hindi

बाह रे मुल्ला तेरा जवाब नहीं | Mulla Nasruddin Story in Hindi

Mulla Nasruddin Story in Hindi

मुल्ला नसरुद्दीन को कौन नहीं जानता? उनके अपने मजाकिया स्वभाब से समझाने की आदत दुनिया में बेमिशाल है। आज हम उन्ही की एक कहानी (Mulla Nasruddin Story in Hindi) के बारे में बात करेंगे।

 

बाह रे मुल्ला तेरा जवाब नहीं

मुल्ला न तो नमाज अदा करते थे न मस्जिद जाते थे, बस इसी कारन मुल्ला को सब नास्तिक और काफिर कहते थे। एक दिन उनके मोहल्ले वाले ने सोचा की मुला को मस्जिद जाने और नमाज पढ़ने हेतु समझाया जाए। मोहल्ले में नास्तिक का होना अच्छा नहीं। तो सबने मिलकर मुल्ला को समझाया।

 

मुल्ला ने सबकी बात बड़े ध्यान से सुनी और कहा, “देखो भाई, मैं मस्जिद तो नहीं जा सकता हूँ, पर हाँ तुम लोग इतना फोर्स कर रहे हो तो मैं अल्लाह को दिन में एक बार याद जरूर कर लूंगा। लेकिन करूँगा अपने वक़्त पर तथा अपने तरीके से।” सबने सोचा, ठीक है। न करने से तो अच्छा ही है।

 

उधर मुल्ला ने तो रात के बारह बजे घर के छत पर जाकर चिल्लाना शुरू कर दिया, “सुन अल्लाह! मुझे सो दीनार भिजवा दे, उसके बगैर तेरा छुटकारा नहीं। जब तक तू सो दीनार नहीं भिजवाता, मैं ऐसे ही रोज रात को नमाज पढता रहूँगा। और ध्यान रखना की पुरे सो लूंगा, एक भी कम नहीं लूंगा।” बस इतना चिल्लाकर वह सो गया।

 

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फिर तो यह सिलसिला रोज का हो गया। रोज रात को वह छत पर जाए और तेज आवाज से बात दोहराए। बात वही की सो दीनार भिजवा, जबतक तू नहीं भिजवाता रोज ऐसे ही नमाज पढता रहूँगा। यह अजब नमाज हुई! और वह भी ऐसी अजब की मोहल्ले वालो की शामत ही आ गई। उनकी रातो की नींद हराम हो गई। रोज मुल्ला चिल्ला-चिल्लाकर पुरे मोहल्ले को उठा देता था। और ऊपर से इबादत भी बेतुकी और उटपटांग। इससे तो वह नास्तिक ही अच्छा था।

 

सब मुल्ला को समझाकर पछता रहे थे। अपने भूल सुधारने हेतु उन्होंने मुल्ला को इबादत छोड़ने को भी कहा, परन्तु मुल्ला नहीं माना। उसने स्पष्ट कह दिया, “एक बार शुरू कर दी तो कर दी, अब तो इसे अल्लाह ही सौ दीनार देकर छुड़वा सकता है।” सबने मिलकर इस मुसिबत से छुटकारा पाने हेतु एक मीटिंग बुलाई।

 

सुझाब काफी आए, पर उनमे से एक ही प्रैक्टिकल जान पड़ा और वह यह की सब मिलकर निन्यानवे दीनार एकत्रित करते है, और जब मुल्ला रात को चिल्लाना शुरू करें तो फिर दीनार पोटली में बांधकर उसके छत पर फेक दिया जाए। जो की दीनार सौ दीनार मांग रहा है, बार-बार कह भी रहा है की एक कम नहीं लूंगा इसलिए निन्यानवे आए देखकर वह ठुकरा देगा। पोटली वापस फेक देगा। बस उन सबको उनके दीनार भी मिल जायेंगे और मुल्ला से छुटकारा भी। और वह समझ जाएगा की अल्लाह अभी सौ दीनार देने को राजी नहीं।

 

 

अब प्लान बन चूका था और इंतजार रात का था। बस मुल्ला ने जैसे ही रात को चिल्लाना प्रारंभ किया, “अल्लाह पुरे सौ दीनार लूंगा, एक कम नहीं लूंगा।” फिर योजना अनुसार निन्यानवे दीनार से भरी थैली मुल्ला की छत पर फेंक दी गई। मुल्ला तो खुश-खुश हो गया। उसने झट से थैली खोलकर दीनार गिनने शुरू किए। लेकिन यह क्या, यह तो निन्यानवे है। उसने दो-तीन बार और गिने, पर थे निन्यानवे। खेर कोई बात नहीं … उसने दीनार फिर थैली में भरे और थैली हवा में उठाते हुए बोला, “बाह रे अल्लाह। तू भी प्रोफेशनल हो गया है। एक दीनार थैली का काट ही लिया।” इतना कहते-कहते उसने थैली जाकर अलमारी में रख दी और सो गया।

 

उधर मोहल्ले वालो को तो समझ में ही नहीं आया की सारे दीनार उनके हाथ से चले गए। बेचारे सब रात भर जागे। सुबह-सुबह सबने मिलकर मुल्ला के घर दस्तक दी। जब सौ मांगे थे तो निन्यानवे क्यों रखे? इसका सबक भी जानना चाहा। मुल्ला ने हँसते हुए कहा, “इतनी सी बात पर इतना टेंशन में क्यों आ जाते हो? तुम लोगो के लिए यह बात नई कहां है? अच्छा बताओ, तुम लोग अल्लाह को जो भी चढ़ाते हो वह कभी अल्लाह तक पहुँचता है? उसे मौलवी ही यह कहकर रख लेते है न की तुम लोगो ने अच्छी भावना से नहीं चढ़ाया, इसलिए अल्लाह ने वह चढ़ावा नहीं स्वीकारा। इसलिए मज़बूरी में हमें इसे रखना पड़ रहा है। जब वहां चुप हो जाते हो तो यहां भी चुप हो जाओ। मैंने भी अल्लाह की प्रोफेशनल हो जाने की आड़ लेकर आपके दीनार रख लिए है।”

 

 

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