कछुआ और हंस | Turtle and Swan Hindi Story

कछुआ और हंस | Turtle and Swan Hindi Story

Turtle and Swan Hindi Story

 

कछुआ और हंस

एक बार, एक तालाब के पास दो हंस और एक कछुआ रहता था। कछुआ और दोनों हंस आपस में बहुत अच्छे मित्र थे। उन तीनों को उस तालाब से पेट भर खाना मिलता था। तीनो मित्र बड़े आनंद से अपना जीबन गुजार रहे थे।

 

गर्मी का मौसम आने पर जब तालाब सुख गया, तो तीनों मित्रों को भोजन और पानी की कमी होने लगी। तभी दोनों हंसो ने कछुए से कहा, “तुम इतने दुखी क्यों हो गए?”

 

कछुआ यह जानता था की वह दोनों हंसो की तरह उड़ नहीं सकता था। और उसे यह भी पता था की वह बहुत धीमी चाल चलता है। इस कारन वह दुखी होकर अपने दोनों हंस मित्रों से कहा, “मैं तुम्हारे साथ बहुत दूर तक कैसे चलूँगा? मैं उड़ भी नहीं सकता। तुम दोनों जब उड़कर चले जाओगे, तो मुझे बहुत याद आया करोगे।”

 

कछुए की बात सुनकर दोनों हंस पेड़ की एक शाखा लाये और कछुए से कहा, “तुम्हे चिंता करने की कोई जरुरत नहीं। हम दोनों तुम्हे अपने साथ ले जायेंगे। तुम इस छड़ी को बीच से अपने मुँह में पकड़ लो, पर यह धियान रखना की तुम्हे कुछ बोलना नहीं है। क्युकी जैसे ही तुम मुँह खोलोगे, वैसे ही निचे गिर पड़ोगे और मर जाओगे।”

 

दोनों हंस कछुए को लेकर आसमान में उड़ते हुए चल पड़े। दोनों हंस बड़ी ही समझदारी से अपनी-अपनी चोंचों में छड़ी का एक एक छोर पकड़े हुए थे और बीच में कछुआ था।

कुछ देर बाद, कछुए के कानो में कुछ लोगों की चिल्लाने की आवाज आई। “देखो, देखो। आकाश में दो हंस और कछुए उड़ रहे है।”

 

कछुए ने सोचा, “यह लोग मेरा मजाक उड़ा रहा है। मुझे इन्हे सबक सिखाना होगा। ”

 

जैसे ही यह शब्द कहने के लिए कछुए ने अपना मुँह खोला वैसे ही कछुआ गिर पड़ा और मर गया। दोनों हंसो को अपने मित्र कछुए की गलती पर बहुत दुःख हुआ। पर दोनों हंस कुछ नहीं कर सकते थे। अंत में दोनों हंस दूर कही दूसरे तालाब पर जाकर रहने लगे।

 

शिक्षा – दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की “चाहे कोई भी हमारा हंसी उड़ाए और हमसे मुकाबला करे, हमे अपनी समझ का सहारा लेते हुए केबल अपने भले चाहने वाले की बात सुननी चाहिए।” 

 

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