कामचोर दोस्त | Lazy Friend Moral Story in Hindi

कामचोर दोस्त | Lazy Friend Moral Story in Hindi

Lazy Friend Moral Story in Hindi

 

कामचोर दोस्त

 

एक गांव में मधु और गोपाल नाम के दो मित्र रहते थे। मधु बहुत ही कामचोर और आलसी था। और गोपाल बहुत परिश्रमी था। वह अपना काम बहुत लगन से करता था। वह दोनों ही गांव के जमींदार के जमीन पर काम करते थे।

 

गोपाल काम करता था और मधु अपने बेल को बांधकर पेड़ के निचे आराम से सोया रहता था। और जैसे ही सूर्य अस्त हो जाता था, मधु अपने पुरे सरीर में मिटटी लगा लेता था। वह जमींदार को दिखाता था की उसने बहुत काम किया है। और गोपाल खेतो का काम ख़त्म करने के बाद अपने बेल को अच्छे से नहलाकर, खुद स्नान करके साफ सुतरा होकर घर वापस जाता था।

 

जमींदार मधु के इस झूट को पकड़ नहीं पाते थे। वह सोचते थे की मधु बहुत ही परिश्रमी है, और गोपाल बहुत ही कामचोर है। इसलिए जमींदार ने अपने रसोइये से कहा, “मधु बहुत ही परिश्रम करता है, उसकी अच्छी देखभाल करना और धियान रखना की उसकी खाने में कोई भी कमी न होने पाए।”  रसोइया मधु को भरपेट खाना देता था। और गोपाल का तो पेट ही नहीं भरता था।

 

गोपाल ने मन ही मन सोचा, “यह कैसा न्याय है? जो काम करता है उसी को भूका रहना पड़ रहा है। और जो कामचोर है वह भरपेट खा रहा है।”  मधु समझगया की गोपाल के मन में संदेह हो रहा है, और वह डर गया की अगर गोपाल ने असली सच जमींदार को बता दिया तो क्या होगा? इसलिए उसी रात मधु ने गोपाल से कहा, “सुनो गोपाल, खेत की कोई भी बात जमिदारबाबू से मत कहना। अगर कहा तो बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा।”

 

गोपाल डर के मारे बोला, “अच्छा ठीक है। मैं कुछ भी नहीं कॉहूँगा। लेकिन याद रखना की सच को कभी दबाया नहीं जा सकता।”  यह कहकर गोपाल सो जाता है।

 

पुरे दिन की थकान के कारन गोपाल गहरी नींद में सो जाता है। और मधु पुरे दिन सोया रहता है, जिसके कारन उसे रात में नींद नहीं आती है।

 

दूसरे दिन, जब बेल लेकर मधु खेत में गया तो उसकी आंखे लाल देखकर जमिदारबाबू ने पूछा, “क्या बात है मधु? रात को नींद नहीं आई क्या?

 

 

मधु ने कहा, “क्या बताऊँ हुजूर? मैचोरो ने मुझे सोने ही नहीं दिया।”

 

यह बात सुनकर जमिदारबाबू ने मधु की खातिरदारी और बड़ा दी। मधु अब जमिदारबाबू के घर रहने लगा। मधु बहुत खुश हुआ। और उसका जीबन ऐसे ही चलता रहा। वह खेतो में जाकर बेल को रस्सी से बांधकर सोया रहता था। और गोपाल ईमानदारी से अपना काम करता बिना फल की चिंता किए।

 

एक दिन, खाते वक़्त रसोइये ने देखा की मधु खाना बर्बाद कर रहा है। रसोइये ने मधु से कहा, “मैं कुछ दिनों से देख रहा हूँ की तुम खाना बहुत बर्बाद कर रहे हो। तुम्हे जितना चाहिए उतना ही लो फिर।”

 

मधु ने कोई जवाब नहीं दिया। उधर रसोइया गोपाल को देखकर यह सोचने लगा की मधु खाना बर्बाद कर रहा है और गोपाल का पेट ही नहीं भर रहा। उसे यह सक होने लगा की सायद कुछ गड़बड़ है।

 

रसोइया जमींदार के पत्नी के पास गया और कहा, ” रसोइया ने जमींदार की पत्नी को गोपाल और मधु के खाने के बारेमे स्पष्ट बात बताया।

 

उसी रात को जमींदार के पत्नी ने जमींदार को कहा, “सुनिए, मधु और गोपाल खेत में क्या काम करते है हमे एकबार देखना चाहिए। क्या काम करते है? कैसा काम करते है? हमे एक बार देख लेना चाहिए।

 

जमींदार ने उनकी पत्नी की इन बातो का कारन जानना चाहा तो उनकी पत्नी ने सारी बात जमींदार को बताई। यह सुनकर जमींदार कहने लगा, “बात तो तुमने ठीक कही है। एकबार हमे खेत में जाकर दोनों का काम देख लेना चाहिए।”

 

 

दूसरे दिन, जमींदार बिना किसी को कहे खेत में चले गए। और वहां जाकर देखा गोपाल पुरे ईमानदारी से खेतो में काम रहा है। लेकिन मधु को वह कही भी देख नहीं पा रहे थे। जमींदार ने मधु को पुरे खेत में ढूंढा, पर मधु उन्हें कही भी नजर नहीं आया। अचानक जमींदार की नजर घाट पर पड़ी। उसने देखा की मधु अपने बेल को बांधकर पेड़ के निचे आराम से सो रहा है। यह देखकर जमींदार को बहुत गुस्सा आया।

 

घर आकर उसने अपनी पत्नी को यह बात बताई। और कहा, मैं तो गोपाल को कामचोर समझता था पर वह तो बहुत परिश्रमी है। मुझे गोपाल के लिए बहुत दुःख हो रहा है। एक आदमी बिना कुछ कहे परिश्रम करते जा रहा है और दूसरा बिना काम किये सारा सुख भोग रहा है। मैं गोपाल को समझ न सका।”

 

जमींदार की पत्नी ने कहा, आप गोपाल को दूसरा काम दे दीजे, फिर देखते है की इस मधु का क्या किया जाये।”

 

सूर्य अस्त होने पर मधु और गोपाल खेत से लौट आए और जमींदार ने दोनों को अपने पास बुलाया। मधु और गोपाल जमींदार के पास गए। मधु वैसे घबराया हुआ था की जमींदार ने उन्हें अपने पास क्यों बुलाया है।

 

जमींदार ने कहा, “मधु,  इतने दिनों से तुमने मुझे बेब्कुफ़ बनाया है। आज मैंने अपनी आँखों से देखा है तुम्हारी परिश्रम का नमूना। तुम आलसी हो, कामचोर हो, झूठे हो। तुम इसी समय इस घर से निकल जाओ। मैं तुम्हे अब काम पर नहीं रख सकता।”

 

उसी वक़्त गोपाल ने जमींदार के पैर पकड़ के कहा, “हुजूर, मधु को माफ़ कर दीजे। आप उसे एक और मौका दे दीजे। मुझे यकीन है की अब से वह ऐसा बिलकुल भी नहीं करेगा। उसे काम से मत निकाले।”

 

जमींदार ने गोपाल की बात मानकर मधु को एक और मौका दे दिया। इसके बाद गोपाल जमींदार का हिसाब किताब का काम देखने लगा। और मधु भी अपने आप को बदलकर बहुत परिश्रमी हो गया। इसके बाद से मधु और गोपाल की मित्रता और भी गहरी हो गई।

 

 

सीख – दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की, “कामचोरी करने से जीबन में कोई काम नहीं होता।” 

 

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