लालसा | Hindi Story of Longing

लालसा | Hindi Story of Longing

इस कहानी का नाम है “लालसा | Hindi Story of Longing” इस कहानी में हमें लालच के बारे में एक अच्छी सीख मिलती है, उम्मीद करते है यह कहानी आपको जरूर पसंद आएगी।

 

लालसा

Hindi Story of Longing

किसी समय की बात है, एक राजा के दो पुत्र थे। राजा के मृत्यु के पश्चात उनके मंत्रियों ने बड़े पुत्र को राजगददी पर बैठाना चाहा पर राजकुमार ने कहा, “मैं शासन करना नहीं चाहता हूँ। कृपया आप लोग मेरे छोटे भाई को राजा बना दे।”

 

बार-बार राजा बनने का अनुरोध करने पर भी बड़े पुत्र ने अपना निर्णय नहीं बदला। इसलिए मंत्रियों ने छोटे राजकुमार को राजा बना दिया। बड़ा राजकुमार राजसी ठाट-बात का परित्याग कर शहर छोड़कर चला गया। राज्य के एक छोटे से गांव में जाकर एक व्यापारी के साथ काम करने लगा।

 

एक दिन शाही सेवक गांव में जमीन मापने आए। उस व्यापारी ने जाकर राजकुमार से कहा, “श्रीमान, क्या आप मेरा काम करवा सकते हैं? कृपया अपने छोटे भाई से अनुरोध कर मेरा कर मुक्त करवा दे।”

 

राजकुमार ने तत्कालीन राजा, अपने छोटे भाई, को पत्र लिखा की वह एक व्यापारी के पास काम करता है, उसका कर क्षमा कर दिया जाए। राजा ने उसका कर क्षमा कर दिया। सभी गांव वालों को जब इस बात का पता चला तो वे भी राजकुमार के पास आए और कहने लगे, “हम लोग आपको कर दे दिया करेंगे पर आप राजा के कर से हमें मुक्त करवा दे।”

 

राजकुमार ने फिरसे अपने छोटे भाई को उनका आवेदन भेज दिया। इस प्रकार सभी गांव वालों को कर मुक्ति मिल गई और उन्होंने बड़े राजकुमार को कर देना प्रारम्भ कर दिया।

 

अब राजकुमार को विशेष आदर-सत्कार मिलने लगा और उसका धीरे-धीरे लालच भी बढ़ता गया। अपने छोटे भाई से पहले उसने एक शहर मांगा, फिर एक छोटा राज्य मांगकर उस पर शासन करने लगा। छोटे भाई ने उसके सभी इच्छाओं को पूरा किया पर समय के साथ साथ उसकी और इच्छाएं बढ़ती ही चली गई। एक बार उसने अपने छोटे भाई को एक संदेश भेजा, “या तो मुझे राजगददी दे दो या फिर मुझसे युद्ध करो।”

 

संदेश पाकर छोटे राजकुमार ने सोचा, “पहले तो भाई ने राजगददी से इंकार कर दिया और अब उसे ही लड़कर पाना चाहता हैं। यदि मैं उनसे युद्ध करूँगा तो दुनिया मुझ पर ही हॅसेगी।” उसने अपना उत्तर भेजा, “हम युद्ध क्यों करे? आप यहाँ आकर राज्य का कार्यभार खुद संभाल ले।”

 

इस प्रकार बड़ा राजकुमार राजा बन गया। धीरे-धीरे उसने अपने राज्य का विस्तार प्रारम्भ कर दिया। एक दिन दरबार चल रहा था तभी एक युवा ब्रह्मचारी ने संदेश भिजवाया की वह राजा से मिलना चाहता है।

 

राजा ने उसे भीतर बुलवाया। भीतर आकर युवा ब्रह्मचारी ने राजा का अभिवादन किया। राजा ने पूछा, “क्या चाहिए तुम्हे?”
युवा ब्रह्मचारी ने कहा, “महाराज! मुझे आपसे एकांत में कुछ कहना है।”

 

एकांत हो जाने पर युवा ब्रह्मचारी ने कहना शुरू किया, “महाराज, यदि आप मेरे कथनानुसार करें तो आप तीन शहरों पर राज्य कर सकते है। ये शहर आर्थिक सम्पदा, मानव संसाधन और सैन्य धन से भरपूर हैं। हमें तुरंत ही कुछ करना होगा।”

 

राजा को लोभ ने आ घेरा। वह युद्ध के बिषय में विचार करने लगा और युवा ब्रह्मचारी का अता-पता पूछना ही भूल गया। इसी बीच वह दरबार से चला गया। राजा ने अपने मंत्रियों को बुलाया और कहा, “एक युवा ब्रह्मचारी ने मुझे तीन राज्य दिलाने का वादा किया पर शीघ्रता में वह चला गया। वह कहाँ गया, उसे ढूँढो। शहर में घोषणा कर दो, सैन्य दल को भेजो। उन तीनों राज्यों को हमें तुरंत अधिकार में लेना है।”

 

पुरे शहर में उस युवा ब्रह्मचारी को ढुँढवाया गया पर वह कही नहीं मिला। सारे प्रयत्न विफल होने पर राजा को सूचित किया गया, “महाराज, शहर में कहीं भी युवा ब्रह्मचारी नहीं मिला।”

 

यह समाचार पाकर राजा उदास हो गया। उसके आँखों की नींद चली गई। सारे समय बस यही सोचा करता, “मैंने तीन राज्यों को खो दिया है। मेरी प्रभुता नष्ट हो गई है।”

 

इन बिचारों तथा उसकी लालसाओं ने उसकी मानसिक शांति छीन ली। भूख समाप्त हो गई और वह दर्द से परेशान रहने लगा। उसकी बीमारी की खबर पुरे शहर में फैल गई।”

उसी शहर में रहने वाला एक नवयुवक अभी-अभी बैद्य बनकर तक्षशिला से लौटा था। राजा की बीमारी की बात सुनकर वह राजमहल में आया और बोला, “मैं राजा को स्वस्थ कर दूँगा।”

 

राजा को तुरंत सूचित कर दिया गया कि एक युवा चिकित्सक उन्हें स्वास्थ लाभ कराने आया है। राजा ने चिकित्सक से पूछा, “कई योग्य चिकित्सक मुझे स्वस्थ नहीं कर पाए। तुम ऐसा क्या करोगे?”

 

युवा चिकित्सक ने उत्तर दिया, “हे महाराज! मैं आपको स्वस्थ करने का आश्वासन देता हूँ। में आपसे किसी शुल्क की अपेक्षा नहीं करता। आप मात्रा दवा का मूल्य मुझे दे दीजिएगा। पर आपको अपनी बीमारी का कारण विस्तारपूर्वक मुझे बताना पड़ेगा।”

 

राजा ने कहा, “तुम बीमारी का कारन क्यों जानना चाहते हो? तुम बस मेरा इलाज करो।”
चिकित्सक ने समझाया, “महाराज, चिकित्सकों को जब बीमारी के कारण के विषय में बताया जाता है तभी वह रोगी का पूर्ण रूप से इलाज कर पाते हैं।”

 

राजा ने चिकित्सक को शुरू से लेकर अंत तक की सारी बातें बातें, युवा ब्रह्मचारी का आना, तीन शहरों का जितने का उसका प्रस्ताव तथा अपने स्वास्थ की वर्तमान अवस्था, बता दीं। राजा ने कहा, “वत्स, मेरी बीमारी का प्रारम्भ उन तीनों शहरों पर अधिकार प्राप्त करने की लालसा से हुआ है। यदि तुम मेरा इलाज कर सकते हो तो में अति प्रसन्न होऊंगा।”

 

युवक ने राजा से पूछा, “महाराज, क्या चिंता से आपको वे तीनों शहर प्राप्त हो जाएंगे?”

 

राजा ने उत्तर दिया, “नहीं, वत्स, नहीं।”

 

युवक ने फिर कहा, “फिर आप क्यों चिंता करते हैं? यदि आप उन शहरों पर अधिकार भी कर लेंगे तो भी आप एक समय में चार प्लेट न तो भोजन कर सकते हैं, न चार बिस्तर पर सो सकते हैं और न ही चार जोड़ी कपडे एक साथ पहन सकते है। आपको लालसाओं के चंगुल में फँसकर बहना नहीं चाहिए। जितनी अधिक लालसा या इच्छा मनुष्य करता है उतनी ख़ुशी भी उसे नहीं मिलती है।”

 

युवा चिकित्सक के परामर्श ने राजा की आंखे खोल दी। वह सवस्थ हो गया। उसने कहा, “हे युवा चिकित्सक! तुम्हारी रूपी दवा ने मुझे स्वस्थ कर दिया है। तुम एक योग्य चिकित्सक हो, बिद्वान हो, इच्छाओं को पहचानते हो जो की दुःख का प्रमुख कारण होती हैं।”
उसके पश्चात युवा चिकित्सक अनुभवी परामर्शदाता बनकर राजा की सेवा में रह गया।

 

शिक्षा: लालसा ख़ुशी की शत्रु है। 

 

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