Hindi Story of Greedy Lion

लालची शेर की कहानी | Hindi Story of Greedy Lion

Hindi Story of Greedy Lion

 

लालची शेर की कहानी

एक बार एक जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था और वे शेर उस जंगल का राजा था। शेर अपने भोजन के लिए सभी तरह के जानबर का शिकार करता था इसलिए जंगल के सारे जानबर उससे डरते थे और उसके रास्ते से दूर ही रहते थे। इस वजासे शेर अपना शिकार नहीं कर पता था तो उसने एक चालाक लोमड़ी को काम पर लगाया.लोमड़ी को बेस बाकि जानबेरो का स्थान शेर को बताना था और फिर चालाक लोमड़ी शेर की बातें सुनकर बाकि जानबेरो का स्थान बताने लगा और शेर उन जानबेरो के पास जाकर उनको पकड़ लेता था।

 

एक दिन शेर यह जानना चाहता था की बाकि के जानबर उसके बारेमे क्या सोचते थे तो उसने लोमड़ी को कहा की वो चोरी छुपे जाकर इस बात का पता लगाए.लोमड़ी शेर का आदेश पालन करते हुए चोरी छुपे जानबेरो के पास जाकर उनके बातें सुनने लगा और शेर के पास गया। शेर ने लोमड़ी से कहा बोलो बाकि जानबर मेरे बारेमे क्या सोचते है तो लोमड़ी ने कहा महाराज इस जंगल का हर कोई जानबर आपसे डरता है आप किसी भी जानबर को आसानी से पकड़ सकते है इसलिए कोई भी आपके रास्ते नहीं आ रहा,आप ही इस जंगल के राजा हो और इस जंगल में आपकी बराबरी करने वाला कोई भी नहीं है।

 

 

अगले दिन लोमड़ी शेर के पास नहीं आया इसलिए इंतेज़ार करते करते शेर परेशान होकर खुद शिकार के लिए निकल पड़ा.कुछ दूर चलने के बाद शेर को एक खरगोश नजर आया शेर धीरे धीरे खरगोश के पास गया उसी समय  खरगोश को कदमो की आवाज़ सुनाई दी और देखने लगा वहा कौन है। उसी वक़्त खरगोश के सामने सेर आ पौंछा और खरगोश ने वहा से भागने की कोशिस की लेकिन खरगोश शेर के पंजे में फस जाता है।

 

उसी समय उस रास्ते से एक हिरन आया और उसने शेर का धियान खींचने की कोशिस की शेर तब खरगोश को छोड़कर हिरन के पीछे दौरने लगा, हिरन ने जब देखा शेर उसकी तरफ आ रहा है तब दुरंत वहा से भाग निकला.शेर उसके पीछे पीछे भागा लेकिन हिरन इतना तेजी से दौरने लगा की शेर उसको पकड़ ही नहीं पाया। शेर फिर निराश होकर उसी जगह जाता है जहा उसने खरगोश को पकड़ा था पर शेर जब पौंछा तब उसने देखा खरगोश तो भाग चूका था.भूके शेर को पछताबा होने लगा की अगर उसको हिरन का लालच नहीं होता तो अब तक कमसेकम खरगोश खाने को तो मिलता।

 

 

लोमड़ी यह सब दूर से देख रहा था और कहना लगा शेर तो घमंडी ही नहीं बल्कि लालची भी है इसलिए उसके हात कुछ भी नहीं आया जो था वे भी छूट गया।

 

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