विश्वासघाती | Hindi Story of A Unfaithful

विश्वासघाती

Hindi Story of A Unfaithful

एक किसान अपना खेत जोत रहा था। खेत जोतते-जोतते उसके बैल थक गए थे। उन्हें सुस्ताने के लिए किसान ने उन्हें खोल दिया और खुद कुदाल लेकर खेत खोदने लगा। बैल चरते चरते झाड़ियों में घुसे और फिर जंगल की ओर निकल गए। अपना काम समाप्त कर किसान उन्हें ढूंढने लगा पर वे कहीं नहीं मिले। अपने बैलों के लिए दुःखी किसान उन्हें ढूंढ़ते-ढूंढते खुद ही जंगल में खो गया।

 

एक सप्ताह तक वह जंगल में भटकता रहा। तभी एक झरने के पास उसे कुछ फल के पेड़ दिखाई दिए। वह भूखा तो था ही… जमीन पर गिरे हुए कुछ फलों को उठाकर उसने खा लिया। फल अत्यन्त स्वादिस्ट थे। इसलिए उसकी भूख और बढ़ गई। फल तोड़ने की इच्छा से वह पेड़ पर चढ़ गया पर जिस डाल पर फल तोड़ने के लिए वह बैठा, अचानक वह टूट गई और डाल सहित किसान झरने के भीतर चला गया। झरने में काफी पानी होने के कारन उसे चोट तो नहीं लगी पर किसान उस गहरे पानी में कई दिनों तक पड़ा रहा।

 

एक दिन झरने के किनारे पेड़ पर रहने वाले एक बंदर ने उस किसान को पानी में पड़े हुए देखा। उसे बड़ी दया आई। उसने पूछा, “तुम यहाँ पर कैसे आए? तुम मनुष्य हो या कोई और हो? अपने बारेमे बताओ।”

 

किसान ने उत्तर दिया, “मैं जंगल में भटक गया था और अब अपने जीबन के अंतिम दिन गईं रहा हूँ। यदि तुम मेरी सहायता करो तो मैं बच सकता हूँ।”

 

किसान पर दया कर बंदर ने कुछ पत्थर इकट्ठा किया। उन्हें काटकर उसमें सीढ़ियां बनाई जिससे उस पर चढ़ा जा सके। तत्पश्चात पत्थर पानी में डालकर उसने कहा, “मित्र, इस पर चढ़ो, मेरा हाथ पकड़ो। मैं तुम्हे बाहर खींच लूंगा।” इस प्रकार किसान को बंदर ने पानी से बाहर निकालकर एक पत्थर पर बैठा दिया और फिर बोला, “मित्र, मैं बहुत थक गया हूँ। मैं थोड़ी देर सोना चाहता हूँ। बाघ, शेर, चीता, भालू संभब है मुझे सोता देखकर मुझपर हमला करे। कृपया तुम नजर रखना।”

 

ऐसा कहकर बंदर सो गया। किसान के मन में कुबिचार ने सिर उठाया। उसने सोचा, “इस बंदर को मारकर मैं अपनी भूख शांत कर लेता हूँ। मुझे भी शक्ति मिल जाएगी और फिर मैं इस जंगल से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ पाऊँगा।”

 

किसान ने एक पत्थर उठाकर सोए हुए बंदर के सिर पर दे मारा। भूख से बेहाल किसान का वार बहुत ही हल्का पड़ा। बंदर को थोड़ी सी चोट लगी और वह उठकर बैठ गया। आँखों में आंसू भरकर उसने किसान की ओर देखा और बोला, “तुमने ऐसा क्यों किया? मैंने तुम्हे खतरनाक झरने से बचाया और तुमने मेरे साथ विश्वाश्घात किया। फिर भी मैंने तुम्हे क्षमा किया। मेरे पीछे आओ। इस जंगल से बाहर मनुष्यों की बस्ती में जाने का रास्ता मैं तुम्हे बताता हूँ।”

 

बंदर ने किसान को जंगल से बाहर निकलने का रास्ता दिखा दिया।

 

समय के अंतराल में अपने बुरे कर्मो के कारण किसान कोढ़ी बन गया। जहाँ भी जाता उसे लोगों की उपेक्षा ही मिलती थी। “तुम्हारे शरीर से दुर्गंध आती है” या फिर “यहाँ से हटो” लोग इसी प्रकार की बातें करते। अपने हितैषी को धोखा देने के कारन किसान को बहुत दुःख सहना पड़ा।

 

शिक्षा: विश्वाश्घात पाप है। विश्वासघाती को सजा मिलती ही है। 

 

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