चालाक भेड़िया और बगुला | Chalak Bhediya aur Bagula | Hindi Kahani

चालाक भेड़िया और बगुला | Clever Wolf And Heron Story in Hindi

चालाक भेड़िया और बगुला  Clever Wolf And Heron Story in Hindi

 

चालाक भेड़िया और बगुला

एक बार, एक घने जंगल में एक बड़ा तालाब था। उस तालाब में बगुले का झुण्ड रहता था। सभी बगुले तालाब में मछली पकड़ कर खाते थे और  ख़ुशी से अपना जीबन बिताते थे। उसी जंगल में एक चालक भेड़िया रहता था। भेड़िया भी तालाब के इधर उधर घूमता रहता था और मछलियों को खाता था।

 

एक दिन जब भेड़िया मछली खा रहा था तो एक हड्डी उसके गले में फस गई। उसने हड्डी को बाहर निकाल ने की बहुत कोशिश की लेकिन इतनी कोशिश के बाबजूद भी वह हड्डी को निकाल न सका।

 

भेड़िया दर्द में रोने लगा। उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। भेड़िया बहुत चिंतित में पड़ गया लेकिन उसने फिर सोचा की कुछ देर बाद उसका दर्द कम हो जाएगा। कुछ समय बाद उसने सोचा अगर उसके गले से हड्डी नहीं निकली तो उसका क्या होगा? वह तो कुछ भी नहीं खा पाएगा।

 

 

भेड़िया इस समस्या से उभरने के लिए कुछ संभब उपाय सोचने लगा। अचानक उसने याद किया की एक बगुला जो पास के झील में रहता है, उसे यकीन था की वह अपने लंबी गर्दन से आसानी से हड्डी को उसके गले से बाहर निकाल सकती है।

 

भेड़िया बिना इंतजार किये बगुला के पास गया और उससे कहा, “मेरे दोस्त, मेरे गले में हड्डी फस गई है और बहुत अंदर तक चली गई है, अगर तुम इसे अपनी लंबी चोंच से बाहर निकाल दोगे तो बड़ी मेहरबानी होगी। मैं तुम्हे सुंदर सा एक इनाम भी दूंगा। और हमेशा तुम्हारी आभारी रहूंगी।

 

बगुले ने बहुत सोचा, वह भेड़िये के गले में अपना सिर डालने के बारेमे सोचकर ही घबरा रहा था। लेकिन बगुला स्वभाब से लालची था। इसलिए वह भेड़िये की बातों में आ गया और अपनी चोंच से उसके गले से हड्डी निकालने में मदद करने लगा। बगुला ने अपना मुँह भेड़िया के गले में डाला और अपनी चोंच से हड्डी को बाहर निकाल दिया।

 

 

हड्डी निकलने के बाद भेड़िया को थोड़ी राहत मिली और बगुला को धन्यवाद कहके वहां से चल पड़ा।

 

तभी बगुले ने कहा, “रुको, मेरा इनाम दो देकर जाओ। तुमने कहा था की अगर मैं तुम्हारे गले से हड्डी निकाल दू तो तुम मुझे इनाम दोगे।”

 

भेड़िया ने कहा, “क्या, इनाम? कोनसा इनाम? तुमने अपना सिर मेरे मुँह में डाल दिया और मैंने तुम्हे खाया नहीं सुरक्षित छोड़ दिया, यह मेरी दयालुता है। और तुम मुझसे इनाम मांग रही हो। यहाँ से चले जाओ वरना में तुम्हे मारकर खा जाऊँगा।”

 

बेचारा बगुला निराश हो गया और वहां से चला गया। लेकिन बगुले को एक सीख जरूर मिली की हमेशा दुष्ट लोगों से साबधान रहना चाहिए।

 

 

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