Hindi Story On Priceless Lesson

अनमोल शिक्षा | Hindi Story On Priceless Lesson

अनमोल शिक्षा Hindi Story On Priceless Lesson

 

अनमोल शिक्षा – Hindi Story On Priceless Lesson

किसी गांव में राजू नाम का एक लड़का अपने माँ-बाप के साथ रहता था। राजू वैसे तो बहुत समझदार बच्चा था लेकिन पढाई-लिखाई में उसका मन कभी नहीं लगता था। वह हमेशा मस्ती करता रहता था। राजू को सिर्फ अपने दोस्तों के साथ खेलना कूदना पसंद था।

राजू हर वक़्त मैदान में खेलने के लिए चला जाता था और किताबों की तरफ तो उसे देखना भी पसंद नहीं था। एक दिन राजू ने सुबह उठकर यह सोचा की आज वह सिर्फ पुरे दिन मस्ती करेगा और स्कूल भी नहीं जाएगा। यह सोचकर वह अपने माँ और उसके पिता के पास गया यह बताने के लिए की आज वह स्कूल नहीं जाएगा।

 

राजू के माता-पिता एक साथ बैठकर बातें कर रहे थे की तभी राजू वहां आया और अपनी माँ से कहा, “माँ आज मैं स्कूल नहीं जाऊँगा। आज मुझे पुरे दिन मस्ती करनी है, मुझे बाहर घूमने जाना है, खेलना है।”

 

 

यह सुनकर राजू के माता-पिता उदास हो गए और उसकी माँ बोली, “राजू, तुमने आज फिर शुरू कर दिया। मैं आज कुछ नहीं सुनूंगी। तुम्हे स्कूल जाना पड़ेगा। जाओ जाकर स्कूल के लिए तैयार हो जाओ।”

 

राजू के पिता ने कहा, “बेटा, अच्छे बच्चे अपने माता-पिता की बात मानते है। अपनी माँ की बात मानो और तुम स्कूल चले जाओ। वहां तुम्हे अच्छा लगेगा। वहां तुम्हे बहुत कुछ सिखने को मिलेगा।”

 

इस पर राजू ने कहा, “नहीं, मुझे कुछ नहीं सुनना। मैं बाहर खेलने जा रहा हूँ।”

 

उसके पिता ने कहा, “राजू, सुनो तो सही…..”

 

राजू बिना किसी के बात सुनकर वहां से बाहर अपने घर के मैदान में चला गया। मैदान में पहुंचकर राजू माली से बोला, “माली काका, माली काका क्या आप मेरे साथ खेलोगे?”

 

 

माली काका ने कहा, “अरे राजू बेटा, आज तुम फिर स्कूल नहीं गए। खेर आज तो मैं नहीं खेल पाऊंगा तुम्हारे साथ क्यूंकि मुझे बहुत काम करना है तुम किसी और के साथ खेललो।”

 

माली काका की बात सुनकर राजू बहुत परेशान हो गया। अपने घर के मैदान से निकलकर राजू अपने दोस्त की घर की ओर निकल पड़ा। उसके दोस्त के घर पहुंचकर राजू ने अपने दोस्त से कहा, “दोस्त, चलो बाहर खेलने चलते है, बहुत मजा आएगा।”

 

राजू की बात सुनकर उसके दोस्त ने कहा, “अरे राजू, तू आज फिर स्कूल नहीं गया। मैं तो आज नहीं खेल पाऊंगा तेरे साथ क्यूंकि मुझे तो स्कूल जाना है।”

 

उसकी दोस्त की बात सुनकर राजू काफी निराश हो गया और वापस अपने घर आ गया। घर पहुंचकर राजू सीधे अपनी माँ के पास आया और काफी निराश आवाज में बोला, “माँ क्या आप मेरे साथ खेलोगी? आज मुझे कोई दोस्त नहीं मिला खेलने को।”

 

 

फिर उसकी माँ ने कहा, “नहीं बेटा, मुझे बहुत काम है। मुझे अभी खाना बनाना है। जाओ तुम किसी और के साथ खेलो।”

 

यह सुनते ही राजू जोर जोर से रोने लगा और बोला, “मेरा यहाँ कोई नहीं है, आप सब बहुत बुरे हो, मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी, मुझे अकेला छोड़ दो।”

 

फिर उसकी माँ ने कहा, “नहीं बेटा, ऐसा नहीं बोलते। हम सब तुम्हारे ही तो है। जीवन में हर काम करने का एक समय होता है। हर कोई अपने काम में लगा हुआ है। तुम्हे भी अपना काम समय पर करना चाहिए। खेल के समय खेल और पढाई के समय पढाई करनी चाहिए बेटा।”

 

राजू को अपनी माँ की बात बहुत अच्छे से समझ में आ चुकी थी। अब उसने यह थान लिया था की वह अब रोज स्कूल जाएगा और खूब मन लगाकर पढाई-लिखाई करेगा।

 

उस दिन के बाद राजू पूरी तरह से बदल गया था। अब वह रोज स्कूल जाता था और मन लगाकर पढाई करता था और अपना हर काम वक़्त पर करता था खेल के वक़्त खेल और पढाई के वक़्त पढाई।

 

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