साधु और तोता - Monk and Parrot Story in Hindi 

साधु और तोता | Hindi Story of a Monk and Parrot

Monk and Parrot Story in Hindi 

 

साधु और तोता 

एक जंगल में एक साधु रहते थे। साधु के पास हर रोज शिष्य पढ़ने के लिए आते थे। एक दिन, एक तोता शिकारी के जाल से किसी तरह खुद को छुड़वाकर उड़ते-उड़ते साधु के कुटिया के सामने गिर गया।

 

उसे थोड़ी चोट लगी थी। साधु ने तोते को देखा और उसे उठा लिया और अपनी कुटिया में ले गए। साधु ने तोते को एक पिंजरे में डाल दिया। उसे खाने के लिए कुछ फल और पिने के लिए पानी दिया।

 

साधु तोते का ख्याल रखने लगे। कुछ ही दिनों में तोता ठीक हो गया और साधु के साथ रहने लगा। साधु को भी वह तोता बहुत पसंद था।

 

 

साधु के पास जो शिष्य पढ़ने आते थे तोता उन्हें सीखते हुए देखता रहता था और वह भी साधु की तरह बोलने का प्रयास करता था। यह देखकर साधु को बड़ी ख़ुशी होती थी।

 

फिर एक दिन, साधु ने सोचा, “यह तोता तो बहुत प्यारा है लेकिन इसे इस तरह पिंजरे में रखना गलत बात है। वह अब ठीक हो गया है। उसे अब उड़ने के लिए छोड़ देना चाहिए।”

 

लेकिन साधु को उसकी चिंता हो रही थी की कही वह फिरसे शिकारी के जाल में न फंस जाए। इसलिए साधु ने तोते को शिकारी से खुद को बचाने की शिक्षा देने का निश्चय किया और वह रोज तोते को एक पाठ पढ़ाते रहे।”

 

“शिकारी आएंगे जाल फैलाएंगे, तुम्हे दाने का लालच दिखाकर जाल में फसाएँगे और पकड़कर ले जाएंगे तुम्हे उनसे साबधान रहना होगा” यह बात साधु रोज तोते को सीखा रहे थे। कुछ ही दिनों में तोता साधु की शिखाई हुई पूरी बात बोलने लगा। यह देखकर साधु बहुत खुश हो गए।

 

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साधु ने कहा, “अब यह तोता एकदम सुरक्षित है। मैंने जो पाठ इसे पढ़ाया है वह अब उसे शिकारी के जाल से खुदको बचा पाएगा।”

 

फिर एक दिन, साधु ने तोते की परीक्षा लेने का निश्चय किया। साधु तोते को जंगल में एक पेड़ पर छोड़कर आ गए और साधु ने एक शिकारी को जंगल से एक तोता पकड़कर लाने को कहा।

 

शिकारी जंगल में गया, जाल बिछाया। शिकारी कुछ ही समय में कुछ तोते पकड़कर साधु के पास ले आया।

 

साधु ने देखा शिकारी जो तोते पकड़कर ले आया है उसमे एक तोता वह भी है जिसे साधु ने शिक्षा देकर भेजा था और वह जाल में फंसकर भी वही बात बोल रहा था।

 

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यह देखकर साधु को बहुत दुःख हुआ। वह निराश हो गए। उन्हें बहुत बुरा लग रहा था की इतना  शिखाने के बाद भी तोता शिकारी के जाल में फंस गया।

 

फिर साधु तोते के पास गए और तोते से बोले, “मैंने तुम्हे जो शिखाया, उसका अर्थ जाने बिना ही तुमने उसका पाठ किया। मैंने तुम्हे जो शिक्षा दी है उसे तुम सिर्फ बोलते ही रहे लेकिन तुमने उसे समझकर उसका सही उपयोग नहीं किया। शिक्षा का अर्थ जाने बिना ही तुमने रट्टा मारकर पार किया और जो शिखाया है उसे जीवन में कैसे उपयोग में लाना है यह नहीं पता तो ऐसी शिक्षा का क्या महत्व है। मेरे इतना शिखाने के बाद भी तुम शिकारी के जाल में फंस गए।

 

तो इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की आप जो शिक्षा ले रहे हो उसका अर्थ जाने बिना ही आप सिर्फ परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए रट्टा मार रहे है, तो ऐसी शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। अगर ऐसे आप परीक्षा में पास भी हो गए तो कोई फायदा नहीं। इसलिए जो भी आपको पढ़ाया जाता है उसे मन लगाकर पढ़ना चाहिए और आपको आपके गुरु ने जो शिक्षा दी है उस शिक्षा का पूरा अर्थ समझकर उसे अपने जीवन में आचरण में लाना चाहिए जिससे आप अपनी और दुसरो की मदद कर सकें और जीवन में हर कठिनाई का सामना कर सकें। 

 

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