11 सर्वश्रेष्ठ प्रेरक कहानियां | 11 Best Motivational Stories in Hindi For Success

Best Motivational Story in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आप सबका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है। आज मैं आपको दो ऐसी कहानियाँ सुनाने वाला हूँ जिन्हे सुनने के बाद आपकी चिंता-भावना पूरी तरह से बदल जाएगी। और मैं उमीद करता हूँ की इन कहनियों से आप कुछ अच्छा सिख सके, तो चलिए शुरू करते है।

 

1. सकारात्मक सोच / Best Motivational Story in Hindi

सकारात्मक सोच / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

एक आदमी समुंदर के किनारे चल रहा था। उसने देखा की थोड़ी ही दूर पर एक युवक ने रेद पर झुककर कुछ उठाया और धीरे से उसे पानी में फेक दिया। उसके नजदीक पहुँचने पर आदमी ने उससे पूछा, “अरे भाई, यह क्या कर रहे हो?” युवक ने जवाब दिया, “मैं इन मछलियों को समुंदर में फेक रहा हूँ।” आदमी ने बोला, “लेकिन इन्हे पानी में फेकने की क्या जरुरत है।” युवक ने कहा, “जोयार का पानी उतर रहा है और सूरज की गर्मी बढ़ रही है। अगर मैं इन्हे वापस पानी में नहीं फेकूंगा तो यह मर जाएंगे।”

 

आदमी ने देखा समुंदर किनारे दूर-दूर तक मछलियां बिखरी पड़ी थी। वह बोला, “इस समुंदर किनारे पर न जाने कितनी मछलियां पड़ी हुई है। इस तरह कुछ एक को वापस पानी में डालने से तुम्हे क्या मिल जाएगा? इससे क्या फरक पड़ जाएगा।”

 

युवक ने शांति से आदमी की बात सुनी। फिर उसने रेद पर झुककर एक और मछली उठाई और उसे धीरे से पानी में छोड़कर बोला, “आपको इससे कुछ मिले या न मिले, मुझे इससे कुछ मिले या न मिले या इस दुनिया को इससे कुछ मिले या न मिले लेकिन इस मछली को सब कुछ मिल जाएगा।”

 

यह केबल सोच का ही फर्क है दोस्तों। सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को लगता है की उसके छोटे छोटे परियासो से किसी को बहुत कुछ मिल जाएगा। लेकिन नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को यही लगेगा की यह समय की बर्बादी है। यह हम पर निर्भर है की हम कौनसी कहावत पसंद करते है।

 

 

2. परिस्तिथियों से बाहर निकलना / Best Motivational Story in Hindi

परिस्तिथियों से बाहर निकलना / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

क्या आप जानते है की अगर एक मेंढक को ठन्डे पानी के बर्तन में डाला जाए और उसके बाद पानी को धीरे धीरे गर्म किया जाए तो मेंढक पानी के तापमान के अनुसार अपने शरीर के तापमान को एडजस्ट कर लेता है। जैसे जैसे पानी का तापमान बढ़ता जाएगा वैसे वैसे मेंढक अपने शरीर के तापमान को भी पानी के तापमान के अनुसार एडजस्ट करता जाता है। लेकिन पानी के तापमान के एक तेइसीमा के ऊपर हो जाने के बाद मेंढक अपने शरीर के तापमान को एडजस्ट करने में असमर्थ हो जाएगा। अब मेंढक खुद को पानी से बाहर निकालने की कोशिश करेगा। लेकिन वह अपने आप को पानी से बाहर नहीं निकाल पाएगा। वह पानी के बर्तन से एक छलान में बर्तन बाहर निकल सकता है लेकिन अब उसमे छलान लगाने की शक्ति नहीं रहती। क्यूंकि उसने अपनी सारि शक्ति शरीर के तापमान को पानी के अनुसार एडजस्ट करने में लगा दी। आखिर में वह तड़प तड़प कर मर जाता है।

 

अब मेंढक की मौत क्यों होती है? ज्यादातर लोगों को यही लगेगा की मेंढक की मौत गर्म पानी की बजह से हुई है। लेकिन यह सच नहीं है। सच यह है की मेंढक की मौत सही समय पर पानी से बाहर न निकल पाने की बजह से होती है। अगर मेंढक शुरू से ही बर्तन से बाहर निकलने का परियास करता, तो वह आसानी से बाहर निकल सकता था।

 

हम इंसानो को भी परिस्तिथि और लोगों के अनुसार एडजस्ट करना पड़ता है। लेकिन हमें यह निर्णय लेना चाहिए की कब एडजस्ट करना है? और कब परिस्तिथियों से बाहर निकलना है। अगर हम सही समय पर परिस्थियों से बाहर नहीं निकल पाते तो हमे बुरे समय का और बुरे लोगों का सामना करना पड़ेगा। इससे हम धीरे धीरे कमजोर होते जाएंगे। फिर हमारा लक्ष, हमारा मोटिव सब हमसे छूटता चला जाएगा। और कभी न कभी ऐसा होगा की हम कभी उस परिस्तिथियों से बाहर न निकल पाए। इसलिए पहले उन परिस्तिथियों को समझलो की आगे क्या करना है? कैसे करना है?  अगर आप उसमे कुछ बदल सकते हो तो करो वरना छोड़ दो।

 

दोस्तों यह कहानियां हमे बहुत कुछ सिखाती है। हमें जीने का तरीका बताती है, हमें हमारी सोच बदलने का तरीका बताती है। जिंदगी सब जी रहे है और दुःख सबके पास है। उससे कैसे लिपटना है ? कैसे उससे सामना करना है? यह हमारे हाथ में होता है।

 

 

3. पैसे की लालच / Best Motivational Story in Hindi 

पैसे की लालच / Best Motivational Story in Hindi 
Best Motivational Story in Hindi

एक बहुत अमीर व्यक्ति था। उसने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में लगा दिया। उसके पास इतना पैसा था की वह जो चाहे खरीद सकता था। लेकिन उसने अपने पुरे जीवन में किसी की भी मदद नहीं की। इतना अपर धन होने के बाद भी उसने अपने लिए भी कभी धन का उपयोग नहीं किया। न कभी अपने पसंद के कपडे पहने, न अच्छा भोजन किया और न ही अपने इच्छाओं की अपने सपनो को पूरा किया। वह सारी जिंदगी बस पैसे कमाने में ही बिजी रहता था। और पैसे कमाने में वह इतना ज्यादा व्यस्त हो गया की उसे पता ही नहीं चला कब उसका बुढ़ापा आ गया। और वह जिंदगी के आखरी मोड़ पर आ गया।

 

इस तरह आखिर वह दिन भी आ गया जो उसके जिंदगी का आखरी दिन था। और एक दिन उसे लेने के लिए मृत्यु खुद आ गई। मृत्यु ने उस व्यक्ति से कहा की, “तेरा अंतिम समय आ गया है।  और मैं तुझे अपने साथ ले जाने आई हूँ।” मृत्यु की यह बात सुनकर वह आदमी बोला, “अरे मैंने तो अपनी जिंदगी को ठीक से जिया भी नहीं है। मैं तो पैसा कमाने में, काम करने में इतना ज्यादा व्यस्त हो गया था की मुझे अपने पैसो का उपयोग करने का समय ही नहीं मिला। लेकिन अब उन पैसो को खर्च करने का मुझे थोड़ा समय चाहिए।” लेकिन मृत्यु ने उससे कहा, “मैं तुम्हे अब और समय नहीं दे सकती। तुम्हारी जिंदगी का सारा समय समाप्त हो चूका है। और अब उन दिनों को बढ़ाया नहीं जा सकता।”

 

मृत्यु की इस बात को सुनकर उस आदमी ने कहा, “मेरे पास बहुत पैसा है अगर तुम चाहो तो मैं अपना आधा धन तुमको दे सकता हूँ। लेकिन मुझे एक साल और दे दो जीने के लिए।” लेकिन मृत्यु ने कहा, “ऐसा सम्भब ही नही है।” इस पर उस आदमी ने बोला, “अगर तुम चाहो तो मैं अपना 90 प्रतिशत धन तुम्हे दे सकता हूँ। लेकिन मुझे सिर्फ एक महीने का समय दे दो जिससे मैं अपने इच्छाओं को पूरा कर सकूँ। अपने सपनो को जी सकूँ। जिन कामो को मैंने कल पर टाल रखा था वह सारे काम कर सकूँ।” लेकिन मृत्यु ने फिर मना कर दिया और कहा, “नहीं, मैं तुम्हे एक महीने का समय नहीं दे सकती।” फिर उस आदमी ने कहा, “तुम मेरा सारा धन ले लो लेकिन मुझे एक दिन का समय दे दो।” तब मृत्यु ने उसे समझाया, “एक दिन का क्या मैं तुम्हे अब एक घंटे का भी समय नहीं दे सकती।” फिर मृत्यु ने उसे समझाते हुए कहा, ” तुम अपने समय से धन को तो प्राप्त कर सकते हो लेकिन धन से समय को कभी प्राप्त नहीं कर सकते।”

 

जब उस व्यक्ति को यह समझमे आया की मैं अपनी सारी जिंदगी की दौलत देकर भी अपने लिए एक दिन भी नहीं खरीद सकता तो इस जिंदगी का मौल धन से कितना ज्यादा बढ़कर है।

 

दोस्तों यह कहानी हमारी जिंदगी से ही जुड़ी है। हम लोग भी सारी जिंदगी ऐसे दौड़ते रहते है की एक दिन जिंदगी में जिएंगे, भबिष्य में कभी आराम करेंगे, रिलैक्स करेंगे लेकिन वह दिन कभी आता ही नहीं है। क्यूंकि हम सारी जिंदगी बस दौड़ने का, भागने का अभ्यास करते है और जो अभ्यास जिंदगी भर किया है वही अभ्यास हमारी आदत बन जाती है। बहुत सारे लोग जो रिटायर हो जाते है काम से लेकिन उसके बाद भी उनका यह अनुभव रहता है की हम भले काम से रिटायर हो गए है लेकिन जिंदगी में आराम नहीं है। क्यूंकि हमारे मन ने जिंदगी भर दौड़ने का अभयास किया है तो आज भी हमारा मन दौड़ता ही रहता है।

 

तो दोस्तों इस कहानी से हमे यह शिक्षा लेनी चाहिए की हमारे जिंदगी में जो कुछ भी जरुरी है न उसे कल पर मत टालो, उसे आज ही कर डालो क्यूंकि कल कभी नहीं आता। हम हमेशा आज में जीते है। कल तो सिर्फ हमारे योजनाओं में, हमारे बातों में होता है, शब्दों में होता है। बास्तविक्ता में कल तो कभी होता ही नहीं है। भले आप अपनी जिंदगी में कुछ भी करो आप पैसा कमाओ कामयाबी को हासिल करो पर इन सब चीजों के पीछे इतना ज्यादा भी मत पड़ जाना की आप अपनी जिंदगी ही जीना भूल जाओ।

 

 

4. महाराज जुधिष्ठिर और भीम / Best Motivational Story in Hindi 

 

यह कहानी है महाभारत की समय की। महारज जुधिष्ठिर बहुत बड़े धर्मात्मा थे। जो भी उनके पास कुछ मांगने आता था वह उसकी इच्छा जरूर पूरी करते थे। एक दिन एक ब्राह्मण उनकी बेटी के शादी के लिए उनसे कुछ आर्थिक सहायता लेने आया। उनसे धन मांगने के लिए आया। जुधिष्ठिर महाराज उस दिन बहुत व्यस्त थे। उन्होंने ब्राह्मण से कहा, “मैं आपकी मदद जरूर करूँगा। लेकिन आप कल आना क्यूंकि आज मैं बहुत व्यस्त हूँ।”

 

वह ब्राह्मण उदास होकर महल से निकला। रास्ते में उनकी मुलाकात भीम से हुई। भीम ने उस ब्राह्मण से कहा, “आप ऐसे उदास होकर महल से क्यों जा रहे है? क्यूंकि जो भी कोई हमारे महल में आता है वह हमेशा खुश होकर ही जाता है। तुम इतने उदास होकर क्यों लौट रहे हो?” तो उस ब्राह्मण ने कहा, “मुझे अपनी बेटी के शादी के लिए कुछ पैसे की जरुरत थी। लेकिन महाराज जुधिष्ठिर ने कहा, “आज मैं बहुत व्यस्त हूँ आप कल आना मैं आपकी मदद जरूर करूँगा।”

 

भीम ने जब उस ब्राह्मण की बात सुनी तो उसने सारे शहर में ढिंढोरा पिटवा दिया की मेरे बड़े भ्राता महाराज जुधिष्ठिर ने काल पर विजय प्राप्त कर ली है। थोड़ी देर में यह बात महाराज जुधिष्ठिर को भी पता चली। उन्होंने भीम को महल में बुलाया और पूछा, “तुमने सारे शहर में यह कैसा ढिंढोरा पिटवाया है? की मैंने काल पर विजय प्राप्त कर ली है। क्यों तुम ऐसी अक्वाहे फैला रहे हो?” तो भीम ने कहा, “आज आपसे एक ब्राह्मण सहायता मांगने के लिए आया था। लेकिन आपने उनसे कहा की कल आना। इसका मतलब आपको पक्का पता है की आप कल तक जीवित रहेंगे। और यह ब्राह्मण भी जीवित रहेगा। और कल तक आपके पास राज्य भी रहेगा, धन बी रहेगा। तो मतलब यही निकलता है की आपने काल पर विजय प्राप्त कर ली है।”

 

भीम की इस बात को सुनकर महारज जुधिष्ठिर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने उसी समय उस ब्राह्मण को बुलाया और उसकी बेटी के शादी के लिए उसे बहुत सारा धन दान में दिया।

 

कहानी तो छोटी से है लेकिन इसमें शिक्षा बहुत बड़ी छुपी हुई है की जिंदगी के जो भी जरुरी काम है उन्हें हमे कल पर कभी नहीं डालना चाहिए। और जो लोग कहते है की हम यह काम कल से करेंगे वह लोग उस काम को कभी नहीं करते। उनका कल कभी नहीं आता। लेकिन जो लोग यह थान लेते है की हम इस काम को आज से ही शुरू करेंगे, अब से ही शुरू करेंगे वही लोग जिंदगी में कुछ हासिल कर पाते है। वही लोग हर काम में सफल हो पाते है।

 

 

5. कमजोर यादास्त / Best Motivational Story in Hindi 

कमजोर यादास्त / Best Motivational Story in Hindi 
Best Motivational Story in Hindi

एक व्यक्ति अपने जिंदगी में बहुत अमीर बनना चाहता था। और इसकी बजह से वह  एक साथ बहुत सारे काम करने लगा। जिसके कारन वह बहुत सारे कामो में उलझ जाता था। और इसकी बजह से धीरे-धीरे उसकी यादास्त कमजोर होने लगी। वह जरुरी बातों को भी भूल जाता था। और धीरे-धीरे उसकी यह भूलने की बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ गई। वह हर बात को थोड़ी सी ही देर में भूल जाता था।

 

एक दिन उसकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गई। उसके पेट में बहुत दर्द होने लगा। पुराने समय की बात है, उस समय डॉक्टर तो होते नहीं थे, बैद्य होते थे। तो वह व्यक्ति बैद्य के पास गया। बैद्य ने व्यक्ति से पूछा, “तुम्हे क्या हुआ है?” वह व्यक्ति कहने लगा, “मेरे पेट में बहुत दर्द है।” तो बैद्य ने उससे सारी बात जानी। फिर बैद्य को पता चला की यह इंसान काम में बहुत ज्यादा उलझा हुआ है। और उल्टा-सीधा कुछ भी खा लेता है। तो उस बैद्य ने उस व्यक्ति से कहा, “तुम्हारे पेट में जो दर्द है वह गलत खान-पान के कारण हुआ है। इसलिए थोड़े दिन के लिए तुम सिर्फ खिचड़ी खाना।” उस व्यक्ति ने कहा, “ठीक है, अब मैं खिचड़ी ही खाऊँगा।”

 

फिर उस आदमी ने बैद्य से कहा, “मुझे भूलने की भी बीमारी है। कही ऐसा न हो की घर पॅहुचते-पॅहुचते मैं यही भूल जाऊँ की मुझे क्या खाना है।” तो बैद्य ने उसे कहा, “आप बिलकुल भी चिंता मत करो। आप यहाँ से लेकर अपने घर तक खिचड़ी खिचड़ी बोलते जाओ जिससे यह नाम आप भूलेंगे नहीं।” उस व्यक्ति ने कहा, “यह आईडिया सही है। मैं पुरे रास्ते खिचड़ी-खिचड़ी बोलता हुआ जाऊँगा।” अब उसे भूलने की आदत तो था ही। इसलिए अब वह खिचड़ी की जगह खाचड़ी हो गया। वह खाचड़ी-खाचड़ी बोलता जा रहा था।

 

रास्ते में एक किसान अपने खेत से चिड़ियाओं को भगा रहा था। लेकिन तभी उसने सुना की कोई व्यक्ति यह कह रहा की खाचड़ी-खाचड़ी। उसकी इस बात को सुनकर किसान को बहुत गुस्सा आया। किसान ने उस व्यक्ति को डाटते हुए कहा, “यह तुम क्या कह रहे हो?” उस व्यक्ति ने कहा, “मैं कह रहा हूँ खाचड़ी।” तो उस किसान ने कहा, “क्या तुम्हे जरा भी अकल नहीं है, तुम्हे दिख नहीं रहा की मैं अपने खेत से चिड़ियाओं को भगा रहा हूँ और तुम उन्हें खाने के लिए बुला रहे हो।” तो वह व्यक्ति बोला, “मुझे तो बैद्य ने कहा है।” किसान ने कहा, “किसी ने भी कहा हो लेकिन अब तुम खाचड़ी नहीं बोलोगे।” उस व्यक्ति ने पूछा, “फिर मुझे क्या कहना चाहिए।” तो किसान ने बोला,  “अब तुम ऐसा बोलो उड़ छिड़ी, उड़ छिड़ी। इसे सुनकर सारी चिड़िया भाग जाएगी।” उस व्यक्ति ने कहा, “ठीक है।”

 

अब वह आदमी उड़ छिड़ी, उड़ छिड़ी कहने लगा। वह थोड़ा ही आगे चला था की रास्ते में एक शिकारी चिड़ियाओं को फँसा रहा था। जब उसने यह सुना की वह व्यक्ति उड़ छिड़ी, उड़ छिड़ी कह रहा है तब शिकारी को बहुत गुस्सा आया और उस शिकारी ने व्यक्ति को जोर से थप्पड़ मारी। और उसे डाटने लगा, “यह तुम क्या कह रहे हो?” मैं यहाँ इतनी मुश्क्लि से चिड़ियाओं को फँसा रहा हूँ और तुम कह रहे हो उड़ छिड़ी।” उस व्यक्ति ने कहा, “मैं क्या करूँ? मुझे तो बैद्य ने कहा है।” तो शिकारी ने कहा, “किसी ने भी कहा हो लेकिन अब तुम यह मत कहना।” फिर उस व्यक्ति ने कहा, “तो फिर अब मैं क्या कहूँ?” तो उस शिकारी ने कहा, “अब तुम यह कहो की आते जाओ और पिंजरे में फँसते जाओ।” फिर वह व्यक्ति यही बोलने लगा, “आते जाओ और पिंजरे में फंसते जाओ।”

 

थोड़ी देर बाद रास्ते में कुछ चोर चोरी का धन लेकर भाग रहे थे। और जब उन्होंने यह सुना की एक व्यक्ति यह कह रहा है आते जाओ और पिंजरे में फँस जाओ।” चोरो ने कहा, “यह हमें फँसाना चाहता है। यह हमें पुलिस को पकड़वाना चाहता है।” उन चोरो ने इस व्यक्ति की बहुत पिटाई की। और कहा, “ख़बरदार दुबारा अगर तुमने यह बात कही तो।” वह व्यक्ति बोला, “फिर मैं क्या कहूं?” तो उन चोरो ने कहा, “अब तुम यह कहना की इसे छोड़कर आओ और दूसरा लेकर आओ।” फिर वह व्यक्ति यही कहने लगा, “इसे छोड़कर आओ और दूसरा लेकर आओ।”

 

वह व्यक्ति ऐसे कहते हुए जा ही रहा था की रास्ते में कुछ लोग एक मृत व्यक्ति को शमशान ले जा रहे थे। और जब उन्होंने यह सुना की “इसे छोड़कर आओ दूसरा लेकर आओ” यह सुनकर सारे लोगो को बहुत गुस्सा आया ऊपर उन्होंने उस व्यक्ति को बहुत फटकार लगाई। और कहा, “हमारे गांव का मुखिया मर गया है। तुमने मजाक समझकर रखा है क्या? इतना भला आदमी मर गया और तुम यह कह रहे हो की इसे छोड़कर आओ दूसरा लेकर आओ।” तो उस व्यक्ति ने कहा, “तुम ही बताओ मैं क्या कहूं?” तो उन सारे पंचायत के लोगो ने कहा, “अब तुम यह कहना की ऐसा किसी के साथ भी न हो।” अब वह व्यक्ति यही कहने लगा, “ऐसा किसी के साथ भी न हो।”

 

वह थोड़ा ही आगे चला था की रास्ते में किसी की बारात गुजर रही थी। और जब लोगो ने सुना की ऐसा किसी के साथ भी न हो तो उन लोगों ने उसे सबके सामने डाटा। कुछ लोगों ने तो उसे मारा भी।  और कहा, “हमारे घर में शादी का मोहोल है, शादी हो रही है हमारे घर में। एक तो बहुत मुश्किल से हमारा बेटा शादी के लिए तैयार हुआ है और तुम यह मनहूष बातें का रहे हो। तुम्हे शर्म है की नहीं है।” वह व्यक्ति बोला, “मुझे मारते क्यों हो।” तुम ही बताओ मैं क्या कहूं? तो उन बारातियों ने कहा, “अब तुम यही कहना की ऐसे घर-घर में हो।”

 

अब वह व्यक्ति यही कहने लग की ऐसा घर-घर में हो। अभी वह थोड़ा चला ही था की रास्ते में कही आग ला गई थी। और सब लोग उस घर की आग बुझाने में लगे थे। और जब वहाँ के लोगों ने यह सुना की ऐसा घर-घर में हो यह कौन कह रहा है? जब उन्होंने उस व्यक्ति को देखा तो उसे बहुत मार लगाई। और बोलने लगे, “लगता है तुमने ही यहाँ पर आग लगाई है तभी तू कह रहा है की ऐसा घर-घर में हो। ” वह व्यक्ति बोला, “मैं तो किसी को यहाँ जानता भी नहीं हूँ। मैं कैसे आग लगाऊँगा। मुझे तो बैद्य ने कहा था।” उन लोगो ने कहा, “अब तुम यह बात कभी मत कहना।” तो उस व्यक्ति ने पूछा, “तो आप ही बताइए मैं क्या करूँ।” फिर उसे सारे लोगो ने मिलकात उस  व्यक्ति से कहा, “अब तुम यह कहना की हे भगवान इस आग को बुझादे।”

 

अब वह ऐसा कहते ही जा रहा था। रास्ते में उसे एक कुम्हार मिला जो अग्नि से मिटटी के घड़े बना रह था। और जब उसने यह सुना की कोई व्यक्ति यह कह रहा है की की हे भगवान इस आग को  बुझाओ।” तो उस कुम्हार को बहुत गुस्सा आया और उस व्यक्ति को जोर से थप्पड़ मारी। और उससे कहने लगा, ‘ख़बरदार जो यह बात तुमन दुबारा कही। अगर यह बात तुमने दुबारा कही तो मैं तुम्हारी खिचड़ी निकाल दूंगा। और यह खिचड़ी शब्द सुनते ही उस व्यक्ति को सब याद आ गया और कहने लगा, “यही तो वह शब्द है जो मुझे बैद्य ने कहा था। हाँ खिचड़ी यही तो मुझे उस बैद्य ने कहा था।”

 

फिर वह व्यक्ति मन ही मन सोचने लगा, “मैं सिर्फ एक शब्द को भुला हूँ तो मुझे इतनी मार मिली है की जो लोग जिंदगी को ही जीना भूल गए है, जो लोग खुश रहना भूल गए है, जो लोग हसना भूल गए है, जो लोग जिंदगी के हर जरुरी बात को भूल हो गई है न उन लोगों को कितनी उलझने की, कितनी परेशानी की मार मिलती होगी।

 

6. एक राजा और उसकी चार पत्नियां / Best Motivational Story in Hindi

एक राजा और उसकी चार पत्नियां / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

एक राजा की चार पत्नियां थी। वह सबसे ज्यादा प्यार अपनी चौथी पत्नी से करता था। उसका बहुत ध्यान रखता था। उसकी बहुत परवा करता था। वह अपनी तीसरी पत्नी से भी प्यार करता था। लेकिन उसे अपने मित्रों से मिलवाने में, अपने मित्रों को दिखाने में बहुत डरता था। उसे हमेशा यह डर लगा रहता था की यह किसी दूसरे इंसान के साथ भाग न जाए।

 

वह अपनी दूसरे पत्नी से भी प्यार करता था। जब भी उसे कोई परेशानी आती तो वह अपनी दूसरे पत्नी के साथ जाता। और वह उसकी समस्या सुख्झा देती थी। लेकिन वह अपनी पहली पत्नी से बिलकुल भी प्यार नहीं करता था। जब की वह पत्नी उससे बहुत प्यार करती थी। उसकी बहुत देखभाल करती थी।

 

एक दिन वह राजा बहुत बीमार पड़ गया। और उसे अब यह एहसास हो गया की वह अब मर जाएगा। उसने अपने आप से कहा, “मेरी चार पत्नियां है। उनमे से किसी एक को मैं अपने साथ ले जाऊँगा। जब मैं मरू तो मरने में वह मेरा साथ दे।” तब उसने चौथी पत्नी से कहा, “क्या तुम इस मौत में मेरा साथ दोगी? मेरे साथ चलोगी?” तो चौथी पत्नी बोली, “अभी तो मेरी उम्र बहुत छोटी है। अभी तो मैंने कुछ देखा ही नहीं है। मैं आपके साथ नहीं चल सकती।”

 

फिर उसने तीसरी पत्नी से पूछा, “क्या तुम मेरे साथ चलोगी?” तीसरे पत्नी ने जवाब दिया, “नहीं, मुझे अपनी जिंदगी से बहुत प्यार है। और जब तुम मर जाओगे तब मैं दूसरी शादी कर लुंगी।”

 

फिर उसने अपनी दूसरी पत्नी से कहा। दूसरी पत्नी बोली, “मुझे माफ़ करदो। इस चीज में मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती। ज्यादा से ज्यादा मैं तुम्हारे दफ़नाने तक तुम्हारे साथ रह सकता हूँ।”

 

अब उस राजा का दिल बैठ गया। वह बहुत दुखी हो गया। तब उसे एक आवाज सुनाई दी। और उस आवाज ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ। तुम जहाँ भी जाओगे मैं तुम्हारे साथ चलूंगी।”

 

जब उस राजा ने देखा तो वह उसकी पहली पत्नी थी। लेकिन वह बहुत बीमार सी हो गई थी। क्यूंकि उसका कोई ख्याल नहीं रखता था। कोई उससे प्यार नहीं करता था।

 

अंत में वह राजा बहुत पछताने लगा और बहुत रोने लगा। राजा ने कहा, “मुझे तुम्हारी देखभाल करनी चाहिए थी, तुम्हारी परवा करनी चाहिए थी, तुम्हे प्यार करना चाहिए था और मैं यह सब कुछ कर सकता था लेकिन फिर भी मैंने तुम्हारी कभी परवा नहीं की। कभी तुम्हे प्यार नहीं किया जबकि तुमने मुझे हमेशा प्यार दिया।

 

क्या आप जानते है वह राजा कौन था? वह राजा है आप खुद। दरहशल एक इंसान की चार पत्नियांहोती है। पहली पत्नी होती है शरीर। चाहे हम उसे जितना भी सजाले, जितना भी सवारले पर जब आप मरेंगे तो यह आपका साथ छोड़ देगा। तीसरी पत्नी होती है आपका धन, सम्पत्ति और रुद्बा। लेकिन आप जब मरेंगे तो यह किसी और के पास चले जाएंगे। आपकी दूसरी पत्नी है आपके दोस्त, आपके रिश्तेदार। चाहे वह कितने भी हमारे करीबी क्यों न हो लेकिन मरने के समय पर वह ज्यादा से ज्यादा दफ़नाने के समय तक आपके साथ रहते है। लेकिन आपकी पहली पत्नी होती है आपकी आत्मा, आपकी चेतना जो इस संसार के आकर्षण में, संसार के मौ में कही खो जाती है जिसकी तरफ हम ध्यान ही नहीं देते, इसे हम भुला देते है। लेकिन वह आत्मा, वह चेतना आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। चाहे कितना भी बड़ा दुःख आ जाए, चाहे मौत ही क्यों न आ जाए पर आपकी चेतना और आत्मा आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

 

इस कहानी का यही सबक है की हर इंसान को अपनी आत्मा को जानना चाहिए, हर इंसान को आत्मा से जुड़ा रहना चाहिए क्यूंकि यह आत्मा परमात्मा से जुडी है। यह आत्मा उस इस्वर से जुडी है जो हमेशा हमारे साथ देते है। लेकिन यह शरीर, यह धन-सम्पत्ति, यह रिश्तेदार और यह दोस्त आखिर एक दिन साथ छोड़ ही देते है। इसलिए हमे सबसे ज्यादा प्रेम अपनी आत्मा सेम और अपनी चेतना से करनी चाहिए।

 

 

7. राजा का दावत / Best Motivational Story in Hindi

राजा का दावत / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

एक राजा ने अपने राज्य के सभी ब्राह्मण सभी साधु महात्माओं को भोजन के लिए बुलाया। वह राजा बहुत धर्मात्मा था। लेकिन जहाँ पर भोजन बन रहा था वहाँ आसमान में एक चील गुजर रहा था। उस चील के पंजे में एक सर्प था जो उसके पंजो से छूटकर उस बनते हुए भोजन में आकर गिरा। जिसके कारन वह भोजन बिषैला हो गया। उसमे जहर आ गया। और उस भोजन को खाने से कई लोग मर गए।

जब राजा के यहाँ भोजन खा कर बहुत से लोग मरने लगे तो सारे शहर में उस राजा की निंदा होने लगी। सब उस राजा को गालिया देने लगे। उसकी बबुराई करने लगे। राज्य के सभी लोग कहने लगे, “यह कैसा राजा है। अपने घर ब्राह्मणों को, महात्माओं को बुलाकर उनकी हत्या कर दी। बड़ा अधर्मी राजा है।”

 

वह राजा भी मन ही मन बहुत रोने लगा। वह मन ही मन कहने लगा, “यह क्या अनरथ हो गया? मैं तो महात्माओं को खुश करना चाहता था। और बदले में मुझसे इतना बड़ा पाप हो गया।”

 

यह लोग मरकर जब परलोक में गए तो वहाँ पर चर्चा होने लगी की इन लोगों की मौत का पाप किसको लगेगा। “क्या यह पाप राजा को लगेगा? क्या यह पाप खाना बनाने वाले को लगेगा? क्या यह पाप चील को लगेगा? या सर्प को लगेगा? किसका दोष है यह?” तो वहाँ पर बैठे किसी बिद्वान ने कहा, “यह पाप राजा को नहीं लग सकता। क्यूंकि राजा को पता ही नहीं था की भोजन में बिष मिला हुआ है। और यह पाप खाना बनाने वाले को भी नहीं लग सकता। क्यूंकि उन्हें भी इस बात का ज्ञान नहीं था। और यह पाप चील और सर्प को तो लग ही नहीं सकता। क्यूंकि उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था की निचे क्या हो रहा है।” फिर सबने प्रश्न किया, “तो आखिर यह पाप किसको लगेगा? किसको सजा मिलेगी?”

 

उस बिद्वान ने कहा, “उस राज्य में जितने भी लोग राजा की निंदा कर रहे है, उसकी बुराई कर रहे है इस पाप का फल उन सबको मिलेगा। क्यूंकि जब किसी व्यक्ति से अनजाने में कोई दोष हो जाता है, अनजाने में कोई पाप कार्य हो जाता है और दूसरे लोग जब उसकी बुराई करते है उसकी निंदा करते है उस पापा का फल करने वालों को नहीं उसकी निंदा करने वालों को मिलती है।

 

यह कहानी भी हमारी जिंदगी से जुडी है। हमारी ज़िंगगी में बहुत सारे लोग ऐसे होते है जो हमारे लिए बे बजह उलटा सीधा बोलते है। हमारे पीठ पीछे हमारी बुराइया करते है। हमारे मुँह पर तो मीठे बनते है लेकिन हमारे पीठ पीछे हमारे लिए बहुत उल्टा सीधा बोलते है। अगर आपके जिंदगी में भी ऐसे लोग है तो आप बिलकुल भी चिंता करें। क्यूंकि आपसे जो भी गलतिया होती है, जो भी भूल हो जाती है आपके उन सारी कर्मो का दोष उन सब लोगों में बट जाता है।

 

किसी ने सच ही कहा है, “जो हमारी निंदा करता है, जो हमारी बुराई करते है उसको बिलकुल हमारे घर के पास होना चाहिए। क्यूंकि वह हमें हमारे हर दोष से मुक्ति कर देता है।”

 

 

8.महाराज गन्धर्वसेन की कहानी / 3 Best Motivational Story in Hindi

महाराज गन्धर्वसेन की कहानी / 3 Best Motivational Story in Hindi
3 Best Motivational Story in Hindi

यह कहानी है अंधबिश्वास की, अंधजलान की। एक नगर में एक शेठ के यहाँ धोबी आया करता था। लेकिन कुछ दिन तक वह धोबी शेठ के पास नहीं आया। और थोड़े दिन बाद जब वह धोबी उस शेठ के पास आया तो शेठ ने पूछा, “तुम इतने दिन कहाँ चले गए थे।” तो धोबी ने कहा, “तुमको पता नहीं! महाराज गन्धर्वसेन परलोक सिधार गए। उनकी मृत्यु हो गई। और उसी के शोक में मैंने अपने बाल मुंडवा लिए। मैंने अपना सिर गंजा कर लिया। और उसी की दुःख की बजह से मैं आपके पास नहीं आ पाया।

 

जब उस शेठ को पता चला की महाराज गन्धर्वसेन  मर गए तो उसे लगा, “जब यह धोबी होकर उनके शोक में, उनके गम में अपने बाल दे सकता है तो मैं तो एक शेठ हूँ मुझे भी उनके शोक में, उनके श्रद्धांजलि में अपने बाल देने चाहिए।” फिर यह सोचकर उस शेठ ने भी अपने बाल मुंडवा लिए। और अपने सारे परिवार में जो उसके बच्चे थे उसने सबके बाल मुंडवा लिए।

 

एक दिन वजीर शेठ के पास आए। वह शेठ से पूछने लगा की, “आप सब लोगों ने बाल क्यों मुंडवा रखे है?” तो शेठ कहने लगा, “अरे तुम्हे पता नहीं! महाराज गन्धर्वसेन परलोक सिधार गए। उनकी मृत्यु हो गई। और उन्ही को श्रद्धांजलि देने के लिए हम सबने अपने बाल मुंडवा लिए।” वजीर ने कहा. “अगर ऐसी बात है तो मैं भी उन्हें श्रद्धांजलि दूंगा।” वजीर ने भी अपने बाल मुंडवा दिए।

 

उस वजीर को देखकर राजा पूछने लगा, “आपने अपने बाल क्यों मुंडवाए है?” तो वजीर ने भी वही कहा, “क्या आपको नहीं पता? महाराज गंधर्वसेन परलोक सिधार गए। और उनकी श्रद्धांजलि में मैंने अपने बाल मुंडवा लिए।” राजा ने कहा, “अगर ऐसी बात है तो हम भी अपने बाल मुंडवा लेंगे। और नगर में जितने भी लोग है सबको बोल दो बाल मुंडवा लेने के लिए। हम सब मिलकर महाराज गंधर्वसेन को श्रद्धांजलि देंगे।”

 

नगर के सारे लोगों ने अपने बाल मुंडवा लिए। कुछ दिन बाद वहाँ पर एक महात्मा आया। नगर में सारे गंजे लोगों को देखकर वह बड़ा हैरान हो गया की यहाँ के सभी लोग अपने बाल मुंडवाकर बैठे है। ऐसी क्या बात है? जब उसने सभी लोगों से पूछा तो लोगों ने कहा, “आपको पता नहीं! महाराज गंधर्वसेन परलोक सिधार गए। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए सबने अपने बाल मुंडवाए है।” तो वह महात्मा पूछने लगे, “आखिर यह महाराज गंधर्वसेन है कौन?” तो नगरबासी कहने लगे, “हमें नहीं पता, हमें तो राजा का आदेश आया और हमने बाल मुंडवा लिए।” तो महात्मा ने कहा, “मुझे राजा के पास लेकर चलो।”

 

महात्मा राजा के पास आए। उसने वही प्रश्न राजा से किया, “यह महाराज गंधर्वसेन है कौन? जिसके लिए सारे शहर ने अपने बाल मुंडवा लिए।” तो महाराज कहने लगे, “मुझे कुछ नहीं पता, मुझे तो वजीर ने बताया।” फिर वजीर को बुलाया गया।” वजीर ने कहा, “मुझे भी कुछ नहीं पता, मुझे तो शेठ ने बताया।” फिर सेठ को बुलवाया गया। सेठ ने कहा, “मुझे भी नहीं पता, मुझे तो मेरे धोबी ने बताया।” फिर धोबी को बुलवाया गया। और धोबी से पूछा गया, “कौन है आखिर यह महाराज गंधर्वसेन?” तो वह धोबी बोला, “गंधर्वसेन तो मेरे गधे का नाम था। और मैं उससे बहुत प्यार करता था। क्यूंकि मेरे सारे काम वही करता था। मेरी रोजी रोटी उसी से चलती थी। और जब उसकी मृत्यु हो गई तो उसको सम्मान देने के लिए मैंने महाराज गंधर्वसेन शब्द का उपयोग किया।”

 

धोबी की उस बात को सुनकर राजा ने, वजीर ने, उस शेठ ने सब ने अपना सिर पिट लिया और बोला, “हम न जाने बिना समझे एक दूसरे को अनुसरण करने लग गए की उसने जो किया है मुझे भी वह करना है।”

 

दोस्तों सायद आप सोच रहे होंगे की यह कहानी तो बहुत पुरानी है। लेकिन नहीं, यह कहानी बिलकुल नई है। यह कहानी आज की समय की है। हम भी यही करते है। कोई भी एक इंसान कुछ पागलपन करता है, कुछ अजीब करता है तो उसको देखकर सब भी वही करने लग जाते है। एक इंसान फटी हुई जीन्स पहनता है तो उसको देखकर लाखो करोड़ों लोग वही फटी जीन्स पहनना शुरू कर देता है। अगर कोई चस्मा उल्टा करके पहनता है तो उसको देखकर पता नहीं कितने लोग उल्टा चस्मा पहनना शुरू कर देते है। अगर कोई लड़की छोटे कपडे पहनती है तो उसको देखकर पता नहीं कितने लड़किया छोटे कपडे पहनना चालू कर देते है।

 

बिना सोचे समझे उसका मतलब क्या है? उसका परिणाम क्या होगा? यह नहीं सोचते। आज-कल बहुत सारी चीजे लोग इसी लिए करते है की सब कर रहे है। लोग सोचते है की अगर वह यह सब कुछ कर रहा है और हम नहीं करेंगे तो हम भोंदू दिखेंगे। हम मॉडर्न नहीं दिखेंगे। पर सच तो यह है की हम मॉडर्न बनने के चक्कर में बेबकुफ़ बन जाते है, मुर्ख बन जाते है। जिन बातों को, जिन कामों को हमें करने की कोई जरुरत नहीं हम वह सिर्फ इसलिए कर जाते है क्यूंकि सब कर रहे है इसलिए हमें भी करना है। फिर लोग कहते है, यह तो आज-कल का फैशन है। आज -कल सभी ऐसा करते है।

 

 

9. ईश्वर और परेशान व्यक्ति / Best Motivational Story in Hindi

ईश्वर और परेशान व्यक्ति / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

एक व्यक्ति के जिंदगी में बहुत उलझने और परेशानी आती रहती थी। एक दिन वह अपने जिंदगी से बहुत ज्यादा परेशान हो चूका था। वह इंसान बहुत गुस्से में था और रात के समय ईश्वर से कहने लगा, “आपने आज मेरा पूरा दिन ख़राब कर दिया। आपने क्यों मेरे साथ ऐसा किया?” तो ईश्वर ने पूछा, “क्यों ऐसा क्या हुआ तुम्हारा साथ?” तो वह व्यक्ति बोला, “मुझे सुबह को जल्दी उठना था लेकिन मेरा अलार्म नहीं बजा। और मुझे उठने में देर हो गई। एक तो पहले ही मुझे देर हो गई थी और जैसे ही मैंने अपना स्कूटर स्टार्ट (Start) किया तो मेरा स्कूटर ही ख़राब हो गया। बहुत मुश्लिक से मुझे एक रिक्शा मिली और देर होने की बजह से मैं अपने ऑफिस (Office) में अपना टिफिन ले जाना भी भूल गया। और जब ऑफिस (Office) पहुँचा तो वहाँ कैंटीन भी बंध थी। बड़ी मुश्किल से मुझे कही से एक सैंडविच (Sandwich) मिला और पूरा दिन मुझे वही खा कर रहना पड़ा। लेकिन वह सैंडविच (Sandwich) भी ख़राब था। मुझे कही से फ़ोन पर एक बहुत अच्छा ऑफर (Offer) आया लेकिन उसी समय मेरा फ़ोन खराब हो गया। फिर मैंने सोचा की घर जाकर AC चलाकर सो जाऊँगा लेकिन मैं जैसे ही घर पहुँचा तो लाइट गई हुई थी। मुझे समझ नहीं आता की यह सारी तकलीफे आप मुझे ही क्यों देते है? आपको कोई और नहीं मिलता क्या?”

 

तो ईश्वर ने उससे कहा, “तुम मेरी बात ध्यान से सुनो। आज सारादिन तुझपर मुश्किलें और आफ़ते आनी थी, परेशानिया आनी थी। इसलिए मैंने देवदूत को भेजकर तुम्हारा अलार्म बजने ही नहीं दिया। और आज तुम्हारा स्कूटर से एक्सीडेंट होने वाला था इसलिए तेरा स्कूटर बिगाड़ दिया। और जिस कैंटीन की तुम बात कर रहे हो, उसका खाना ख़राब हो चूका था जो तुम्हारे शरीर को भयानक नुकशान पहुँचा सकता था। और जिस इंसान से तुम फ़ोन पर बात कर रहे थे, वह इंसान एक नंबर का घोटालेबाज था। वह तुम्हे बहुत बड़ी मुश्किल में फँसा देता था इसलिए तुम्हारा फ़ोन ख़राब करवा दिया। और आज तुम्हारे घर में शॉट-शर्किट से आग लगनी वाली थी इसलिए मैंने तुम्हारी बिजली ही बंद करवा दी। मैंने तुम्हे दुःख देने के लिए या परेशान करने के लिए यह सारी उलझने नहीं दी। मैंने तुम्हे बचाने के लिए यह सारी चीजे की है।”

 

जब उस व्यक्ति को यह पता चला की यह सारी चीजे मेरे रक्षा के लिए हुई है तो वह ईश्वर से माफ़ी मांगने लगा। और बोलने लगा, “आप मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं आपको समझ नहीं पाया।” तो ईश्वर ने कहा, “माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं है लेकिन विश्वास रख मैं हमेशा तेरे साथ हूँ, मैं हमेशा सबका भला करता हूँ, मैं जो भी करूँगा तेरे भले के लिए करूँगा।

 

कई बार हमारे जिंदगी में भी ऐसी मुश्लिक घड़िया आ जाती है, ऐसे हालात आ जाते है जो हमें समझ नहीं आता की हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है? लेकिन भविष्य में जाकर हमें यह ख्याल आता है की अगर हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ होता तो आज हम बहुत बड़ी मुशीवर्त में पड़ जाते।

 

दोस्तों यह कहानी हमें शिक्षा देती है की आपकी जिंदगी में कितनी भी मुस्किले क्यों न आए, कोई उलझन क्यों न आए, आप सिर्फ मन में यह विश्वास रखना की इसमें भी आपकी भलाई छुपी हुई है। इसमें भी आपके लिए कुछ अच्छा छुपा हुआ है। मुश्किलें आए तो घबराना मत, मन में यह विश्वास रखना की वह ईश्वर  हमारी रक्षा कर रहा है। जितनी कठिन यह राते होगी उतना मजबूत तुम्हारा आने वाला सभेरा होगा। जिंदगी में कभी निराश मत होना क्या पता कल वह दिन आए जिसका तुम्हे बेसब्री से इंतजार था। सफर में मुश्किलें आए तो हिम्मत और बढ़ती है। अगर कोई रास्ता रोके तो जरुरत और बढ़ती है। तो जब भी आपकी जिंदगी में मुश्किलें आए तो मन में यह पक्का भरोसा रखना की ईश्वर हमेशा तुम्हारे साथ खड़े है और हमेशा तुम्हारा भला करेंगे।

 

 

10. राजा और तीन मंत्रिया / Best Motivational Story in Hindi

 

एक दिन एक राजा ने अपने तीन मंत्रियों को दरबार में बुलाया। और तीनो को आदेश दिया की एक एक थैला लेकर बगीचे में जाए और वहाँ जो अच्छे से अच्छे फल मिले वह उस थैले में डालकर ले आए। वह तीनों मंत्री अलग-अलग बगीचे में चले गए।

 

पहले मंत्री ने कोशिश की की वह राजा के लिए अच्छे से अच्छे फल लेकर जाए, जो ,मीठे भी हो और स्वस्थबर्धक भी हो। उसने बहुत मेहनत करके अच्छे और मीठे फल चुने। दूसरे मंत्री ने सोचा की, “राजा कौनसा हर फल को चेक करने वाले है।” तो उसने जल्दी जल्दी में कुछ अच्छे फल और कुछ सड़े-गले फल उस थैले में डाल दिए। और तीसरे मंत्री ने सोचा, “राजा की नजर तो सिर्फ भरे हुए थैले पर जाएगी, अंदर क्या है? वह चेक करके थोड़ी देखेगा।” तो उसने अपना समय बचाने के लिए जल्दी जल्दी उसमे घास और पत्ते भर दिए।

 

दूसरे दिन राजा ने तीनों मंत्रियों को उनके थैले समेत दरबार में बुलाया। लेकिन राजा ने उनके थैले खोलकर भी नहीं देखे। और आदेश दे दिया की, “तीनों को इनके थैले समेत दो महीने के लिए जेल में बंद करदो। और खाने के लिए जो कुछ भी इनके थैले में है उसी से यह अपना काम चलाएंगे।”

 

उन तीनों मंत्रियों को  उनके थैले समेत जेल में बंद कर दिया। अब जेल में उनकेपास खाने पिने के लिए कुछ भी नहीं था सीबाई उन फलों के। तो जो पहला मंत्री था, उसके पास मीठे और स्वस्थबर्धक फल थे। और वह मजे से खाता रहा। और जो दूसरा मंत्री था, उसको कुछ फल अच्छे मिले और कुछ सड़े-गले फल मिले। लेकिन जो तीसरा मंत्री था, उसके पास खाने के लिए सिर्फ घास पूस और पत्ते थे।
दो महीने के कैद के बाद जो पहला मंत्री था, वह बिलकुल चुस्त-दुरुस्त था। लेकिन जो दूसरा मंत्री था, वह बहुत बीमार होकर निकला। और जो तीसरा मंत्री था, वह उन दो महीनों की कैद में मर गया। क्यूंकि उसके पास खाने के लिए सिर्फ घास पूस और पत्ते थे।

 

यह कहानी भी हमारे जिनगी से ही जुडी है। यह जो फल है न, यह हमारे ही किए हुए कर्म है। और यह जो कैद है जो जेल है, यह हमारा बुरा वक़्त है। हम जिंदगी में जो भी कर्म कमाते है, हमारे बुरे वक़्त में हमें उन्ही कर्मो का फल मिलता है। अगर हमने जिनगी भर बुरे कर्म किए है, किसी का भला नहीं किया है, सबको दुःख पहुँचाया है तो हमारे भी बुरे वक़्त में हमारा कोई साथ नहीं देता। बल्कि लोग खुश होते है और कहते है, “अच्छा हुआ जो इसके साथ ऐसा हुआ। क्यूंकि इसके कर्म ही ऐसे थे। लेकिन जो इंसान सबका भला करता है, सबके साथ अच्छा करता है, जब उसके ऊपर मुशीवर्त आती है, मुश्किलें आती है तो वह कर्म किसी न किसी इंसान के रूप में उसे जरूर वापस मिलता है।

दोस्तों यह कहानी हमें शिक्षा देती है की आप हमेशा अच्छे कर्म करते रहो। एक दिन आपको भी आपके किए गए सारे अच्छे कर्मो का फल अच्छा ही मिलेगा।

 

 

11. एक ग्वालन की प्रेम / Best Motivational Story in Hindi

एक ग्वालन की प्रेम / Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

एक बार एक गोयलानु दूध बेच रही थी। और सब लोगों को दूध नाप-नापकर देती थी। उस समय वहाँ एक नौजवान लड़का दूध लेने के लिए आया। ग्वालन ने उस नौजवान को बिना नापकर ही दूध से उसका बर्तन भर दिया। वही थोड़ी दूर पर एक साधु, हाथ में माला लेकर मनको को गिन-गिनकर माला फेर रहा था। तभी उसकी नजर उस ग्वालन पर पड़ी। और उसने यह सब देखा। उसने पास बैठे हुए व्यक्ति को सारी बात बताकर इसका कारन पूछा। तो उस व्यक्ति ने बताया, “जिस नौजवान को उस ग्वालन ने बिना नापे दूध दे दिया है वह उस नौजवान से प्रेम करती है इसलिए उसने बिना नापे ही उसे दूध दे दिया।”

 

यह बात उस साधु के दिल को छू गई की,  “एक दूध बेचने वाली ग्वालन, जिससे प्रेम करती है वह उसका हिसाब नहीं रखती। और मैं जिस ईश्वर से प्रेम करता हूँ उनका नाम माला में गिन-गिनकर लेता हूँ। मुझसे अच्छी तो वह ग्वालन है। ”

 

दोस्तों यह कहानी भी हमारी जिंदगी से ही जुडी है। हम भी जिनसे प्रेम करते है, हमें उनके साथ हिसाब-किताब नहीं रखना चाहिए। क्यूंकि जहाँ हिसाब-किताब होता है वहाँ प्रेम नहीं होता। और जहाँ प्रेम होता है वहाँ कैसा हिसाब-किताब? पर आज के इस कलयुग के युग में लोग प्रेम भी हिसाब-किताब देखकर करते है की अगर उसने मेरे लिए किया है तो ही मैं करूँगा। अगर वह मेरे लिए कुछ नहीं करता तो मैं क्यों करूँ? यह प्रेम नहीं है, यह व्यापर है। इसलिए हमारे रिश्तों के मधुरता खो गई है। इसलिए हमारे रिश्तों में वह प्रेम कही खो गया है।

 

यह कहानी हमे शिक्षा देती है की अगर आप अपने रिश्तों में प्रेम बढ़ाना चाहते है तो किसी भी तरह का हिसाब-किताब करना छोड़ दो की उसने क्या किया? आपने क्या किया? वह क्या करता है? आप क्या करते है? अगर आप किसी से प्रेम करते हो तो बेस निश्वार्थ होकर उससे प्रेम करो।

 

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको यह “11 सर्वश्रेष्ठ प्रेरक कहानियां – 11 Best Motivational Stories in Hindi For Success” अच्छी लगी होगी अगर अगर अच्छा लगा हो तो एक कमेंट जरूर करें और साथ ही हमारे इस ब्लॉग kahanikidunia.com को सब्सक्राइब करें ताकि इसी तरह के और भी Motivational Stories आप आने वाले समय में पढ़ सके।

 

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