यह प्रेम कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी | | Very Emotional Love Story in Hindi

यह प्रेम कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी | Very Emotional Love Story in Hindi

यह प्रेम कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी | Very Emotional Love Story in Hindi, यह एक रुला देने वाली इमोशनल लव स्टोरी है मुझे उम्मीद है आप सबको यह लव स्टोरी जरूर पसंद आएगी। 

 

 Very Emotional Love Story in Hindi 

 आस्था का आज कॉलेज में पहला दिन था। वह इस दिन को लेकर बहुत खुश थी। नए दोस, नया माहौल। आस्था के कॉलेज में प्रवेश करते ही उसकी मुलकात राकेश से हुई। ऊँचा कद, गोरा, घने बाल, दिखने में एकदम आकर्षक। आस्था उसे देख कही खो गई थी। राकेश ने आस्था को नहीं देखा और उसके पास से निकल गया। अचानक से एक लड़की आई और हँसकर बोली,

“क्या देख रही हो? कॉलेज की हर लड़की उस पर इसी तरह फ़िदा है। पर वह ज्यादा किसी को घास नहीं डालता है।”

 

हाथ आगे बढ़ाते हुए लड़की ने कहा,

“हेलो, मेरा नाम प्रीति है। और मैं 2nd year में पढ़ती हूँ।”

 

आस्था ने कहा,

“ओह, तो फिर आप मेरी सीनियर हुई। मेरा नाम आस्था है।”

 

प्रीति ने कहा,

“अच्छा न्यू एडमिशन। अच्छा क्लास का समय हो रहा है मैं चलती हूँ।’

 

यह कहकर प्रीति वहाँ से चली गई।

 

आस्था अब रोज राकेश को छुप-छुप के देखती और सोचती,

“कहाँ मैं और कहाँ वह सुंदर सा राजकुमार जैसा। वह मुझे देखता ही नहीं।”

 

एक दिन कॉलेज में सिंगिंग कम्पटीशन थी। आस्था बहुत अच्छा गाना गाती थी। उसने गाना गाया। राकेश भी वहाँ मौजूत था।

 

आस्था की आवाज ने उसका दिल छू लिया। कॉलेज में सभी ने उसकी बहुत तारीफ की। और राकेश का ध्यान आस्था की तरफ जाने लगा। उसके नैन, नक्श, सादगी उसको आकर्षित कर रहे थे।

 

एक दिन जोरों की बारिश हो रही थी। आस्था बस स्टॉप पर कड़ी थी। बारिश के बूंदो से खेल रही थी। राकेश बाइक लेकर कॉलेज से घर जा रहा था। अचानक से आस्था को देखा और रुक गया। कुछ देर दूर से आस्था को बारिश के बूंदो के साथ खेलते देख उसको सुकून मिल रहा था।

 

राकेश आस्था के पास गया और कहा,

“हेलो आस्था। मेरा नाम राकेश है। मैंने तुम्हे गाना गाते कॉलेज में देखा था। इसलिए तुम्हे जनता हूँ।”

 

आस्था बिलकुल चुप चाप खड़ी थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था की सपना है या हक़ीक़त।

 

राकेश ने कहा,

“आपको कहाँ जाना है? चलो मैं छोड़ देता हूँ।”

 

आस्था चुप चाप बाइक पर बैठ गई और बता दिया कहाँ जाना है। रागिनी को मानो जैसे पंख लग गए हो। बाइक, राकेश और ऊपर से बारिश। राकेश ही बोले जा रहा था। आस्था को समझ ही नहीं आ रहा था कुछ, उसे लग रहा था की बस वक़्त थम जाए।

 

देखते देखते हॉस्टल आ गया। आस्था बाइक से उतरी और राकेश को धन्यवाद कहा। और बाई बोलकर अपने हॉस्टल में चली गई। हॉस्टल की कुछ लड़किया जो उसकी रूममेट थी उसको छेड़नी लगी, ओह आज तो कॉलेज के सबसे हैंडसम लड़के के साथ बारिश में…..

 

आस्था ने कहा, “चुप रहो ऐसा कुछ नहीं है।”

पर मन ही मन लडडू फुट रहे थे। उधर राकेश भी आस्था के यादों में खोया हुआ था। जो गाना आस्था ने गाया था, उसने उसे मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया था और वही बार-बार सुन रहा था।

 

अब यह रोज का हो गया। राकेश आस्था को लेने भी जाता और हॉस्टल तक छोड़ भी आता। नजरे तो इज़हार कर चुकी थी बस इकरार बाकि था।

 

आस्था का आज आखरी पेपर था। उसके बाद वह अपने गांव जाने वाली थी।

 

राकेश सुबह से बेचैन सा है। वह सोचता है,

“आज तो बोल ही दूंगा।”

 

जैसे ही आस्था बाहर आई, राकेश ने उसको कहा,

“क्या तुम आज रुक सकती हो? मैं तुम्हे कही ले जाना चाहता हूँ।”

 

आस्था ने कहा,

“माँ से पूछ कर बताती हूँ।”

 

आस्था ने माँ को फ़ोन लगाया और कहा,

“आज मेरी सहेलियाँ रुकने को बोल रही है। क्या मैं कल आ जाऊँ?”

 

इस पर माँ ने कहा,

“ठीक है। पर कल आ ही जाना, नहीं तो तू जानती ही है अपने बाबूजी को वह कितना गुस्सा करते है। उन्हें लड़कियों का ऐसा घूमना फिरना पसंद नहीं है। कैसे शहर पढ़ने भेज दिया ”

 

यह बोलकर उसकी माँ ने फ़ोन रख दिया।

 

आस्था ने राकेश से कहा,

“कहाँ चलना है”

 

आस्था राकेश के बाइक पर सवार हो जाती है। रास्ते में वह आस्था की पसंदीदा पानी पूरी खाते है, गन्ने का जूस पीते है और चलते जाते है। राकेश आस्था को गाना गाने के लिए बोलता है।

 

युही गुनगुनाते-गुनगुनाते 2 घंटे के सफर के बाद वह दोनों एक समुद्र के किनारे पर पहुँच जाते है। आस्था ने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा। वह बहुत खुश होती है।

 

थोड़ी देर बाद, आस्था रेत पर एक दिल बना देखती है जिसमे आस्था और राकेश लिखा होता है।

 

राकेश घुटनो पर बैठकर उसको कहता है,

“क्या तुम जिंदगी के इस सफर पर मेरा हमसफ़र बनोगी आस्था?”

 

आस्था बोलती है,

“हाँ राकेश। मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ। कुछ देर बाद बीच पर लाइट जल जाती है। अच्छा डिनर उनका इंतजार कर रहा होता है।

 

राकेश आस्था से कहता है,

“यह सब तुम्हारे लिए है आस्था।”

 

आस्था कहती है,

“इतना सब कैसे किया?”

 

राकेश बताता है,

“उसके पापा शहर के नामी बिजनेसमैन है। पैसो की कोई कमी नहीं है।”

 

आस्था को उसके बारे में कुछ पता ही नहीं था। वह सोच में पड़ जाती है।

 

फिर राकेश बोलता है,

“कहाँ खो गई आस्था?”

 

आस्था सोच से बाहर आती है। और फिर दोनों  समुद्र के किनारे पर आसमान में चाँद तारे देख बिताते है। पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई।

 

राकेश ने आस्था से कहा,

“तुम रुक नहीं सकती क्या?”

 

आस्था बताती है,

” अब माँ रुकने नहीं देगी, जाना पड़ेगा। 20-25 दिन की ही तो बात है, छुट्टियां ख़त्म होते ही आ जाऊँगी। तुम फ़ोन पर बात करते रहना। ”

 

राकेश बोलता है,

“ठीक है। और जैसे ही कॉलेज खत्म हो जायेगा, मैं घर में शादी की बात भी कर लूंगा आस्था।”

 

फिर राकेश आस्था को बस स्टैंड ले जाता है। और बस में बैठा देता है। आस्था बस स्टैंड में बैठी है पर थोड़ी चिंतित है की क्या उसके बाबूजी उसके और राकेश के रिश्ते को स्वीकार करेंगे? और तो और क्या राकेश के घरवाले भी मानेंगे? पर खुश भी थी क्यूंकि उसको राकेश का साथ मिल गया था।

 

इन सब बातों को सोचते-सोचते वह अपने गांव में आ गई। उसका भाई उसे लेने आया था। दोनों घर पहुँचे। पर आस्था खोई-खोई सी थी। मन तो उसका राकेश के पास ही था। यह 24 दिन दोनों को महीने से कम नहीं लग रहे थे। जब घरवाले सो जाते तो दोनों घंटो तक फ़ोन में बातें करते। अपने भबिष्य के सपने सजाते।

 

24 दिन निकल गए। और फिर छुट्टियां ख़त्म हो गई। राकेश आस्था को लेने बस स्टैंड गया। दोनों बहुत ही खुश थे। धीरे-धीरे कॉलेज के दिन भी खत्म हो गए। और आस्था के गांव जाने का समय आ गया।

 

राकेश ने आस्था से कहा,

“मैं बहुत ही जल्द पिताजी से बात करूँगा रिश्ते की और गांव जाऊँगा।”

 

आस्था ने भी कहा,

“मैं भी गांव जाकर मा -बाबूजी से बात करुँगी।

 

फिर आस्था अपने गांव चली गई।

 

राकेश ने अपने पिताजी को आस्था के बारे में बताया। इस पर उसके पिताजी ने कहा,

“वह न तो हमारे बिरादरी के है और न ही उनकी हैसियत हमारे बराबर है।”

 

उधर आस्था ने डरते-डरते अपने माँ को सब बताया। उसकी माँ ने उसके पिताजी को कहा।

 

इस पर पिताजी ने आस्था से कहा,

“मुझे यह रिश्ता मंजूर नहीं है आस्था। क्यूंकि इस गांव में मेरी इज्जत है। कैसे मैं तुम्हारी शादी अपनी बिरादरी बाहर शहर के अनजान लोगों के वहाँ कर दूँ। मैं गांव के लड़के के साथ तुम्हारी शादी करवाऊँगा। और  शहरी लोगों का क्या भरोसा।

 

इस पर आस्था ने कहा,

“पिताजी आप एक बार राकेश से मिल ले और उसके परिवार से भी। फिर आप अपना फैसलासुनाना।”

 

बहुत बोलने के बाद दोनों के परिवार मिलने से राजी हो गए। राकेश अपने पिताजी और माँ के साथ आस्था के गांव आया। दोनों बहुत खुश थे अब उनको कोई भी शादी के बंधन से बंधने से रोक नहीं सकता था। दोनों के घरवाले आपस में बात करते है। और शादी के लिए मान जाते है।

 

इस पर आस्था के पिताजी बोलते है,

“क्यों न पंडितजी को बुलाकर शादी का शुभ महूर्त भी निकलवा दे?”

 

पंडितजी आते है और दोनों की कुण्डलिया मांगते है।

 

कुंडली देखकर पंडितजी बोलते है,

“अगर आप बुरा न माने तो मैं एक बात बताना चाहता हूँ की यह शादी आप न ही करें तो अच्छा है।”

 

आस्था के पिताजी बोलते है,

“क्यों ऐसा क्या हुआ?”

 

पंडितजी बोलते है,

“लड़के का मंगल भारी है। इसकी शादी किसी मांगलिक से ही करें तो अच्छा होगा नहीं तो लड़के का अहित होगा। और हो सकता है की जान का भी खतरा हो।”

 

इस पर राकेश बोलता है,

“मैं यह सब बातें नहीं मानता और आप सब भी यह सब न माने।”

 

पंडितजी चले जाते है।

 

आस्था के पिताजी बोलते है,

“मैं इन सब बातों में बहुत बिश्वास करता हूँ। मैं आस्था की शादी तुम्हारे साथ नहीं करा सकता।”

 

राकेश अपने पिताजी को कहता है की आस्था के पिताजी से बात करें। राकेश के पिताजी उन्हें बहुत समझाते है पर आस्था के पिताजी नहीं मानते।

 

आस्था अपने पिताजी से कहता है,

“पिताजी मान जाओ ऐसा कुछ ऐसा कुछ नहीं होगा। वैसे भी भबिष्य किसने देखा? जो किस्मत में लिखा होगा वही होगा।”

 

आस्था के पिताजी कहते है,

“ठीक है मैं सोचकर देखूंगा।”

 

फिर राकेश के घरवाले वहाँ से चले जाते है।

 

घर जाने के बाद राकेश की माँ उसके पिताजी से कहती है,

“मैं नहीं चाहती की मेरे बेटे की जान को कोई भी खतरा हो। मुझे यह शादी बिलकुल भी मंजूर नहीं है। आप राकेश को समझाइए। मैं अपना बेटा नहीं खोना चाहती।”

 

राकेश के पिताजी कहते है,

“बात तो तुम्हारी सही है। अगर शादी के बाद कुछ बुरा हुआ तब क्या होगा?”

 

इधर आस्था के माता-पिता उसके कमरे में जाते है और उसकी माँ कहती है,

“देख बेटा मुझे पता है की तुम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हो लेकिन तुम ही सोचो कल को अगर राकेश को कुछ हो जाएगा तो क्या तुम देख पाओगी? हम तुझे उस हालात में नहीं देख पाएंगे बेटा।

 

उसके पिताजी उसके सिर पर हाथ रखते है और बोलते है,

“बेटा यह सब तुम दोनों के भलाई के लिए है। क्या क्या राकेश के माता-पिता अपने बेटे को खोने का दुःख बर्दाश कर पाएंगे? तू सोच कर देख।”

 

इन सब बातों को सोचते ही आस्था डर जाती है। आस्था बहुत सोचती है। फिर जब राकेश का फ़ोन आता है तो आस्था उसे बताती है,

तुम भूल जाओ मुझे । माँ-पिताजी ठीक कहते है अगर तुम्हे कुछ हो गया तो हम सबका क्या होगा? मैं तुम्हारे बिना कैसे जियूँगी? इससे अच्छा है की तुमसे दूर हो जाऊँ।

 

राकेश आस्था को बहुत समझती है और कहता है की यह सब अंधबिश्वास है। पर आस्था उसकी बात नहीं मानती है।

 

राकेश कहता है,

“मैं अभी तुम्हारे घर आता हूँ। हम दोनों बैठकर बातें करते है।”

 

इसपर रागिनी कहती है,

अगर तुम मेरे घर आए और मुझसे मिलने की कोशिश की तो मैं मर जाऊँगी।”

 

यह कहकर आस्था फ़ोन रख देती है। उसके बाद आस्था बहुत रोती है। और राकेश का हाल भी बेहाल है।

 

अब राकेश और आस्था के रास्ते अलग-अलग हो चुके थे। कुछ साल निकल जाते है। आस्था के माता-पिता गांव में आस्था के लिए एक लड़का पसंद करता है। आस्था दिल पर पत्थर रखकर शादी के लिए हाँ बोल देती है। और आस्था की शादी विशाल नाम के लड़के के साथ कर देता है। आस्था बहुत दुखी है। राकेश की यादें अभी तक नहीं गए। और वह मन से विशाल को अपना भी नहीं पा रही थी।

 

एक साल बाद आस्था का एक बेटा हुआ। जब उसका बेटा 3 साल का हुआ तब अचानक एक दिन उसके बच्चे की हालत बहुत बिगड़ गई। आस्था अपने बेटे को लेकर हॉस्पिटल पहुँची। वहाँ के डॉक्टर ने कहा की वह अपने बच्चे का इलाज शहर के हॉस्पिटल में करें।

 

इस पर सब घबरा जाते है और आस्था अपने पति और अपने पिताजी के साथ अपने बेटे को लेकर शहर जाती है। हॉस्पिटल में जाकर कुर्सियों पर बैठ जाते है और अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करते है। आस्था का बेटा खेलते-खेलते एक आदमी के पास कुर्सी पर जाकर बैठ जाता है। आस्था अपने बच्चे को लेने जाती है और देखती है की वह आदमी और कोई नहीं बल्कि राकेश है। वह उसे देखती रहती है। पर राकेश के चेहरे पर कोई भाब नहीं रहते। और वह इधर उधर ही देखता रहता है जैसे की वह आस्था को जानती ही न हो।

 

इतने में राकेश के पिताजी आ जाते है और आस्था को देखकर रोने लगते है।

 

राकेश के पिताजी कहते है,

“काश उस समय हमने तुम्हारी बात मान ली होती।”

 

इतने में आस्था के पिताजी आते है और राकेश के पिताजी से पूछते है,

“आप यहाँ कैसे?”

 

राकेश के पिताजी कहते है,

“राकेश ने मानसिक संतुलन खो दिया है। और 2 सालो से उसका इलाज चल रहा है।”

 

इतने में आस्था के पति उन्हें बात करते हुए देख लेता है और पूछा,

“यह कौन है?”

 

आस्था के पिताजी बोलते है,

“यह आस्था के कॉलेज का दोस्त है।”

 

सब बड़े दुखी होते है। आस्था अपने बच्चे को हॉस्पिटल से घर लेकर आती है। और अकेले में अपने पिताजी से बोलता है,

“देख लिया यह कुंडली कुछ नहीं होती जो होना है वह हो जाती है।”

 

तो दोस्तों आपको यह छोटी सी लव स्टोरी “यह प्रेम कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी | | Very Emotional Love Story in Hindi “  कैसी लगी, अच्छा लगे तो कमेंट जरूर करें। और सभी के साथ शेयर भी करें। 

 

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5 thoughts on “यह प्रेम कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी | Very Emotional Love Story in Hindi”

  1. bahut sundar
    do line kahani se judi..
    mana khuda hai tu, sab janta hoga
    hathon ki hame kathputli manta hoga
    pyar ek chij hai jis par nahi tera bas rab
    laila ki dhadkan majnu pahchanta hoga.

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