बाप और अनाथ बेटा | Inspirational Story In Hindi

बाप और अनाथ बेटा Inspirational Story In Hindi

 

बाप और अनाथ बेटा

एक बार की बात है, एक लड़का अपनी बीवी और पिता के साथ रहता था। उसकी बीवी बार-बार उससे कहती थी की अपने पापा को अनाथालय में छोड़ आयो में इनकी सेवा नहीं कर सकती। सारा दिन इनकी देखभाल करते चला जाता है। एक मिनट भी आराम करने को नहीं मिलता।
लड़के ने कहा, “कैसी बात करती हो तुम? वह मेरे पिता है। उन्होंने मुझे पाल-पोस कर इतना बड़ा किया ,भला में उनको अनाथालय में कैसे छोड़ दू। अनाथालय में मैं उन्हें नहीं छोड़ सकता।”
ऐसेही कुछ दिन और समय बीतता गया।
एक दिन उसकी बीवी ने कहा, “आखिर पापा करते ही क्या है? वह घर पर पड़े ही रहते है। और तुम्हारा पैसा भी लगता है उनके दबाई में उनको छोड़ दो न अनाथालय में।”
बेटे का भी मूड बदल गया।

 

 और उसकी बीवी कहती थी, “मैं उनके बूढ़े बाप को नहीं संभाल सकती। उसकी देखभाल नहीं कर सकती। इसलिए आप उन्हें आज ही अनाथ आश्रम में डाल दीजिए।”
बेटा जब अपने बाप को अनाथ आश्रम से छोड़कर वापस आ गया दोनों आपस में ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे। कुछ महीने बीतने के बाद दिवाली का पर्ब आने वाला था।
लड़के ने अपने बीवी से कहा, “अब तो दिवाली आने वाली है। क्यों न पापा को कुछ दिन के लिए अपने पास ले आऊं।”
उसकी बीवी ने तुरंत मना कर दिया।
उसकी बीवी ने कहा, “नहीं। उनको यहाँ मत लाना। क्या करोगे उनको यहाँ लाकर। जहाँ है वही रहने दो।”
बेटा भी मान गया।

बेटे ने कहा, “ठीक है कोई बात नहीं।”

 

एक दिन, शाम को ऑफिस से आते समय उसने सोचा, “चलो दिवाली का पर्व आ गया है, पापा से मिलकर आ जाता हूँ।”

 

तभी उसकी बीवी का फ़ोन आया। और कहा, “अपने बाप को यहाँ मत लाना। त्यौहार पर भी घर आने की आवश्यकता नहीं है। और उनको त्यौहार पर भी घर मत लाना। और हमें शांति से जीने दो। मैं और नहीं कर सकती उनकी सेवा। वही रहने दो उन्हें।”
यह बात सुनकर बेटा वापस मुड़ा और अनाथ आश्रम में गया तो देखा उसका बाप अनाथ आश्रम के मैनेजर के साथ ख़ुशी-ख़ुशी गप्पे में व्यस्त था। और वह यूं बैठे थे जैसे बर्षो से एक दूसरे को जानते हो। तभी यह देखकर वह खुश हुए और सोचने लगा, “चलो ठीक है। पापा यहाँ कुछ तो खुश है।”
तभी बेटे ने मैनेजर से पूछा, “सर आप मेरे पिता को किस तरह और कबसे जानते हैं? आप दोनों ऐसे बात कर रहे है जैसे बर्षो से एक दूसरे को जानते हो।”
तभी मैनेजर ने कहा (मुस्कुराते हुए), “जब यह अनाथालय से एक बच्चे को गोद लेने आए तब से मैं तुम्हारे पिता को जनता हूँ।”
उस बेटे को यह बात सुनकर बहुत ग्लानि हुई, पीड़ा हुई। और वह रोने लगा। क्यूंकि वह बच्चा वह खुद था। बेटा अपने बाप के पैरों मेंगिर कर रोने लगा और खड़ा होकर अपने पिता को गले लगा लिया।

 

बेटे ने कहा, “मैं इतना बुरा हूँ, जिसका कोई नहीं था उसको आपने अपना बेटा बनाया। मुझ जैसे अनाथ को। और एक मैं हूँ जो जिसने उसी पिता को अनाथ आश्रम में छोड़ दिया।”
बेटा उसी वक़्त अपने पिता को अनाथ आश्रम से लेकर चला गया। तब उसे अहसास हुआ की पिता अपने बच्चों से कितना प्यार करते है। जिनके माँ-बाप जिन्दा है वह दुनिया के सबसे अमीर और सम्पन्न लोग है। दोस्तों माँ-बाप ईश्वर का दूसरा रूप होते है। अगर आपके माता-पिता आपसे खुश है तो समझो वह ईश्वर वह परमपिता परमेश्वर आपसे खुश है। जिस घर में माँ-बाप की इज्जत नहीं होती उस घर में कभी बरकत नहीं होती, उस घर में कभी ख़ुशी नहीं होती, उस घर में कभी शांति नहीं होती ,माता-पिता की ऊँगली थाम के चलना सीखा और उनकी मेहनत से पले। आज हम जो कुछ भी है हमारे माता-पिता की बहज से है। माँ बाप के प्यार और बलिदान का कर्ज हम अपने जान देकर भी नहीं चूका सकते। इस दुनिया में माँ की ममता का कोई मोल नहीं है और पिता की मोहोब्बत का कोई तोड़ नहीं। माँ-बाप अपने बच्चों के लिए अपनी हर चीज़ कुर्वान कर देते है। लेकिन आज माँ बाप की अहमियत कम होती जा रही है। जिस बेटे की लाइफ बनाने में माता-पिता की जिंदगी गुजर जाती है आज उसी बेटे के लिए शादी के बाद माँ बाप पराए हो जाते है। वह माँ बाप के त्याग और वलिदान को भूल रहे है।
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