The Golden Pigeon Story in Hindi

सोने का कबूतर | The Golden Pigeon Story in Hindi

 

The Golden Pigeon Story in Hindi

 

सोने का कबूतर

एक दिन दो कबूतर आपस में बातें कर रहे थे। पहला कबूतर बोला, “कैसे हो मित्र? आज बड़े दिनों बाद मिल रहे हो।

दूसरा कबूतर बोला, दोस्त मैं बहुत दिनों से एक मूर्ति बना रहा हूँ।
पहला कबूतर – मूर्ति?
दूसरा कबूतर – हाँ मित्र, बहुत मेहनत से मैंने एक मूर्ति बनाई है। मुझे मूर्ति बनाना बहुत पसंद है।
पहला कबूतर – पर तुमने यह सब कहाँ से सीखा?
दूसरा कबूतर – मैं एक मूर्तिकार को हमेशा देखा करता था। वह यही पास के गांव में रहता है।
पहला कबूतर – अच्छा, क्या तुम मुझे अपनी मूर्ति नहीं दिखाओगे?
दूसरा कबूतर – हाँ हाँ, क्यों नहीं, चलो मेरे साथ।
पहला कबूतर मूर्ति देख बहुत खुश होता है। पहले कबूतर ने कहा, “दोस्त क्या तुम मुझे भी मूर्ति बनाना सिखाओगे?
दूसरे कबूतर ने कहा, “हाँ हाँ, जरूर।
कबूतर ने उसे बड़ी मेहनत और लगन से मूर्ति बनाना सीखा दिया। सब कुछ सिख जाने के बाद पहले कबूतर ने एक दिन एक कबूतर की मूर्ति बनाई। जो की बिलकुल उसकी मित्र की तरह थी। और फिर एक बड़ा सा आयोजन रखा ,उसने अपने सभी मित्रों को बुलाया। जंगल के काफी जानबरों को बुलाया।
पहले कबूतर ने कहा, “दोस्तों, मैं आप सबको कुछ दिखाना चाहता हूँ और अपने गुरु को गुरुदक्षिणा देना चाहता हूँ।”
सभी जानबर इधर उधर देखने लगे। पहले कबूतर ने दूसरे कबूतर को कहा, :इधर आओ दोस्त। तुम ही मेरे गुरु हो।”
दूसरा कबूतर इधर उधर देखना लगा।
पहले कबूतर ने कहा, “हाँ मित्र, मैं तुम ही से कह रहा हूँ। तुम इधर आकर मूर्ति का उद्घाटन करो।”
दूसरे कबूतर ने जैसे ही मूर्ति से कपडा हटाया तो देखा एक खूबसूरत सुनहरे रंग कि कबूतर की मूर्ति थी। सभी ने जोर से तालिया बजाकर मूर्ति की प्रसंसा कि। सभी जानबरों ने कहा, “यह मूर्ति किसकी है?”
पहले कबूतर ने बताया, “यह मेरे मित्र कबूतर की मूर्ति है।”
कौए ने कहा, “पर तुमने इसपर सोने का रंग क्यों चढ़ाया है?”
पहला कबूतर बोला, “मेरा मित्र सोने के मन जैसा है। उसने अपनी कला मुझे सिखाई, एक गुरु की तरह। पहले वह मेरा मित्र था लेकिन अब वह मेरा गुरु भी है। उसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। उसका मन एकदम सोने जैसा है। यही सोचकर मैंने इस मूर्ति को सुनहरे रंग का कर दिया।”
दूसरे कबूतर ने कहा, “तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया दोस्त। तुमने मुझे इतना सम्मान दिया। यह सोने की मूर्ति नहीं, तुम्हारी प्रेम और हमारे मित्रता की निशानी है।”
फिर दोनों कबूतर एक दूसरे की प्रसंसा करने में लग गए।
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