अमीर और गरीब | Rich And Poor Story in Hindi

अमीर और गरीब | Rich And Poor Story in Hindi

Rich And Poor Story in Hindi

अमीर और गरीब

एक बार की बात है, एक गांव में दो दोस्त हुआ करते थे। एक का नाम था राजेश और दूसरे का नाम था दिनेश। दोनों एक साथ खेती किया करते थे। और काफी मेहनत करके अपना घर चलाते थे। एक दिन अचानक उस गांव में एक बहुत बड़ा व्यापारी आता है। और लोग उसकी चकाचौंद देखकर बहुत प्रभाबित होते है। पुरे गांव में उस व्यापारी की चर्चा होने लगती है।
ऐसेही राजेश और दिनेश भी इसी बारें में बात करने लगे। राजेश कहता है, “बाह जिंदगी हो तो ऐसी। देखो उसके कितने ठाठबाट है। उसके आसपास हमेशा हजारों लोग हाथजोड़ घूमते है। और हमें देखो रोज रोज की वही मेहनत और खाने के लिए कुछ पैसे।” दिनेश कहता है, “अरे भाई राजेश, जिसके पास जितना है हमें उतने में ही खुश रहना चाहिए। भगवान ने कमसकम हमें रहने की छद दी है, खाने की दो वक़्त की रोटी दी है। अगर ज्यादा इच्छाएं रखोगे तो भगवान वह भी तुमसे छीन लेंगे।” इसपर राजेश ने कहा, “तू भी न दिनेश हमेशा ज्ञान बांटता रहता है। छोड़ मुझे क्या? मैं कौनसा अमीर बनने वाला हूँ। वही जिंदगी है, वही फटे-पुराने कपडे।”
राजेश को उस व्यापारी की अमीरी देखकर बहुत जलन होने लगी। और वह बस उसी के सपनों में खोया रहता है। रात-दिन वह बस अमीर होने का ख्वाब देखने लगता है। उसका मन काम में नहीं लगता। वह हमेशा सिर्फ अमीरी के सपने देखने लगता है। इसी कारन उसकी खेती अच्छे से नहीं होती। वह दिन व दिन बहुत गरीब होने लगता है। खाने के भी लाले पड़ने लगते है।
राजेश की ऐसी हालत देखकर दिनेश राजेश से बोलता है, “राजेश ऐसा कब तक चलेगा? तुम दिन भर खुली आँखों से सपने देखने लगते हो। तुम्हे मेहनत करनी चाहिए और अपने काम में धियान देना चाहिए।” राजेश ने कहा, “तुम अपना काम क्यों नहीं करते? सपने देखने से ही पुरे होते है दिनेश। और तुम देखना एक न एक दिन जरूर अमीर बन जाऊँगा।” दिनेश ने कहा, “मैं तुम्हे चाहे जितना भी समझा लू पर तुम्हे तो अपनी ही करनी है। मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही बोल रहा हूँ। बाकि तुम्हारी मर्जी।” राजेश को दिनेश की बातें बेफालतू की लगती है। उसे लगता है की दिनेश हमेशा उसे डाटता ही रहता है।
 एक दिन राजेश ऐसेही गांव के बाजार में काम की तलाश में घूमता रहता है। तभी उसे एक लॉटरी वाला दीखता है जो लॉटरी के टिकट बेच रहा होता है। राजेश ने लॉटरी वाले से कहा, “अरे भाई लॉटरी लगेगी भी या यु ही बेच रहे हो।” लॉटरी वाले ने कहा, “अरे भाई बिलकुल लगेगी, गांव में जो नया व्यापारी आया है वह भी लॉटरी खरीदकर ही मालामाल हुआ है।”
राजेश ने लालच में आकर लॉटरी खरीद ली और मन ही मन करोड़पति देखने का ख्वाब देखने लगता है। अगले शाम को लॉटरी का रिजल्ट निकलने वाला था। इसलिए राजेश अपनी टिकट लेकर उसी दुकानदार के पास जाता है। वह  दुकान वाले से पूछता है, “क्यों भाई रिजल्ट आया? जरा मुझे नंबर तो बताना।” राजेश अपनी लॉटरी के नंबर को ध्यान से देखता है। उसका नंबर रिजल्ट के नंबर से मैच कर जाता है। राजेश बहुत खुश हो गया क्यूंकि वह अब करोड़पति बन गया था।
अगले ही दिन राजेश की करोड़पति बनने की बात  अख़बार में छप जाती है। राजेश ने अपने लिए एक बहुत बड़ा घर और एक महंगी गाड़ी भी खरीद ली। राजेश की इतनी तरक्की देखकर उसका दोस्त दिनेश बहुत खुश हो गया। और अगले दिन राजेश से मिलने के लिए उसके घर गया।
राजेश जब अपने घर में दिनेश को देखता है तो उसे लगता है की दिनेश उससे पैसे मांगने आया है। इसलिए राजेश ने दिनेश को बहुत बातें सुनाई  और बुरा व्यव्हार करने लगा। दिनेश को उसका बर्ताब कुछ अच्छा नहीं लगा। और वह राजेश से कहता है, “तुझ जैसा लालची इंसान कभी किसी का दोस्त नहीं हो सकता। मैं यहाँ अपनी दोस्ती निभाने आया था। सोचा था तू मेरी इज्जत करेगा लेकिन तुझे तो अपने पैसो का बहुत घमंड है। आज तेरा समय है राजेश कल मेरा भी आएगा। लेकिन तू चिंता मत कर मैं तेरे जैसा नहीं बनूँगा।” यह कहकर दिनेश वहाँ से चला गया।
कई साल बीत जाते है। राजेश और दिनेश एक दूसरे को कभी नहीं मिलते। राजेश शहर में चला जाता है और बहुत पैसे कमाने लग जाता है। एक दिन राजेश बहुत बीमार पड़ जाता है। राजेश को अपनी बीमारी के इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। और वह अपना सारा काम उसके एक जिम्मेदार आदमी को दे जाता है।
कुछ महीनों के बाद राजेश पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर वापस आता है। लेकिन जैसे ही वह वापस आता है तो वह देखता है की उसका  काम पूरी तरह से बदल चूका है। यह सब देखकर राजेश बहुत परेशान हो जाता है। और अपने उस जिम्मेदार इंसान के पास जाता है और कहता है, “धोखेबाज तूने यह ठीक नहीं किया। मैंने तुझे अपना सारा काम और कंपनी कुछ महीने के लिए संभालने के लिए दी थी और तूने कंपनी ही अपने नाम करवाली।” पर उस आदमी ने राजेश को अपनी कंपनी से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। और राजेश सड़को पर आ जाता है।
एक दिन जब राजेश सड़क पर सोया हुआ था तो तभी उसका पुराना दोस्त दिनेश बहुत बड़ी गाड़ी लेकर वहाँ से गुजरता है। दिनेश से अपनी दोस्त की यह हालत देखि नहीं गई और उससे पूछा की यह सब कैसे हुआ? राजेश ने दिनेश को सारी बातें बताई। यह सुनकर दिनेश को काफी गुसा आया। वह राजेश को अपनी गाड़ी में बैठाकर अपने महल जैसे घर में ले गया। दिनेश ने भी काफी तरक्की करके घर और गाड़ी खरीद ली थी। उसने राजेश  की बहुत खातिरदारी की और अपने साथ अपने घर में रहने के लिए बोला। दिनेश की बातें सुनकर राजेश के आँखों में आंसू आ गए और कहा, “दोस्त, मुझे उस दिन के लिए माफ़ करदो। मैंने उस दिन तुम्हारे साथ काफी बुरा व्यबहार किया।” दिनेश बोला, ‘दोस्त, छोड़ो भी वह बातें।” इस तरह दोनों दोस्त एक साथ ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे।
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