2020 में सुशांत की आखिरी फिल्म “दिल बेचारा” की कहानी | Dill Bechara Full Story in Hindi

 

Dill Bechara Full Story in Hindi

 

“दिल बेचारा” की कहानी

“दिल बेचारा” यह फिल्म रिलीज हुई है हॉटस्टार पर। लगभग पौने दो घंटे की यह फील आप चाहे तो हॉटस्टार पर देख सकते है। आपको इस फिल्म के लिए हॉटस्टार पर कोई भी चार्ज नहीं देना पड़ेगा।
यह फिल्म हमारे लिए बहुत खास है यह सुशांत सिंह राजपूत की आखरी फिल्म है। जैसा की आप सबको पता है की हाल ही में उनका देहांत हो गया है। इतने टैलेंटेड कलाकार से हमे और भी अच्छे अच्छे फिल्मों की उमीद थी पर यह हो नहीं पाया।
दोस्तों जिंदगी को दो तरीके जिओ पहला, आप जिंदगी में एक गोल सेट करिए, दिन-रात प्लानिंग कीजे और जुट जाइए अपने सपनों को पूरा करने में। और दूसरा, कोई गोल नहीं, कोई सपना नहीं बस आप जिंदगी को जिए जाते हो। दोनों तरीके बहुत अलग है और सिर्फ आपको ही यह डीसाइड करना है की आप क्या चुनते है।
दिल बेचारा की कहानी है किज्जी बासु की। किज्जी को थाइरोइड कैंसर है। जिंदगी में दिन बहुत कम बचे है। उसकी नानी हमेशा कहा करती थी की, “एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए ख़तम कहानी।” और वह कहानी उसे सच भी लगती है। बाकि जो फिल्मों में दिखाया जाता है घोड़े पर सवार एक राजकुमार आता है अपनी राजकुमारी को ले जाता है और कहानी में हैप्पी एंडिंग हो जाती है यह सब किज्जी जानती है की यह सब रियल लाइफ में नहीं होता। फिर भी उसका यह सपना है की कोई राजकुमार सा लड़का उसे बहुत प्यार करे और उसे वह सारी खुशिया दे जो एक लड़की अपने राजकुमार से चाहती है।
 
इन सबके साथ ही वह यह भी जानती है की उसके पास दिन बहुत कम है। ऐसे में उसने जिंदगी से उमीदे पालना छोड़ दी है। उसे लगता था की जो जैसा है वह वैसा है। जितना मिला है उसी से वह खुश है। उसे इतने अच्छे पेरेंट्स मिले है। उसके पिता उससे बहुत प्यार करते है। उसकी हर एक जिद पूरी करती है। वह जानते है की किज्जी मरने वाली है लेकिन फिर भी वह अपने आँखों में आँसू नहीं आने देते। क्यूंकि वह जानते है की अगर वह कमजोर पड़ गए तो किज्जी भी कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए जब भी उसके पिता किज्जी से मिलते है उनके चेहरे पर मुस्कान होती है।
 और उसकी माँ को किज्जी की इतनी फिक्र रहती है की सायद कुछ कहे भी तो कम है। किज्जी सोचती है की इन दोनों के रूप में उसे जिंदगी ने जो अनमोल तौफा दी है तो वह भला क्यों दुःखी हो। किज्जी यह सब सोचकर बहुत खुश है। उसकी ऑक्सीजन सिलिंडर को डॉ झा ने उसे दे रखा है किज्जी ने उसका नाम पुष्पेन्द्र रखा है। पुष्पेन्द्र हमेशा किज्जी के साथ रहता है। वह उसके जीवन का साथी है। उसकी साँस लेने की वजह है।
किज्जी के जिंदगी में एक और बड़ा सरप्राइस आना बाकि था और वह था मैनी। वैसे तो मैनी का पूरा नाम एमैनुएल राजकुमार जूनियर है पर सब उसे मैनी ही बुलाते है। मैनी बड़ा ही खुशमिजाज है। मैनी को देखकर ऐसा लगता है की भगवान ने सारी ख़ुशी उसके झोली में डाल दी है। पर ऐसा नहीं है। मैनी की जिंदगी ऑस्टियो सार्कोमा (osteosarcoma) की बजह से ज्यादा दिन तक नहीं है। पर फिर भी वह हमेशा खुश रहता है। लोगों को अपने हसमुख मिजाज से हँसाता रहता है। यह तो तेइ है की कोई भी अगर उसके करीब होता है तो वह हँसे बिना रह नहीं पाता।
उसे इस बात का कोई दुःख नहीं है की अब वह कितने दिन तक बचेगा। मैनी का ही एक दोस्त है जगदीश पांडे (JP) . जेपी को ऑय कैंसर है। मैनी जब 19 साल का था तब जेपी उसे मिला था। दोनों की दोस्ती चार साल से चली आ रही है। दोनों को अपनी फिल्म बनानी है। उन्हें इंतजार है तो अपनी हीरोइन का।
आखिर ढूंढते-ढूंढते उन्हें अपनी हीरोइन मिल ही गई। और वह है किज्जी। जब मैनी किज्जी से मिला तब उसने उसका नाम पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?” उसने बताया, “किज्जी।” मैनी को यह नाम बड़ा फनी (Funny) लगा। उसने अपने फ्लिर्टी (Flirty) अंदाज से किज्जी को रिजाने की कोशिश की पर किज्जी वहाँ से चली गई। पर न जाने मैनी में ऐसा कौनसा बात है की किज्जी उसकी तरफ खींची चली जाती है। जब भी वह उससे मिलती है उसे लगता है की वह अपने आप से मिल रही है।
पहले तो किज्जी ने मैनी को अवॉयड किया पर ज्यादा दिन तक नहीं कर सका। धीरे-धीरे किज्जी ने मैनी की दोस्ती को कबूल किया। अभी किज्जी को मैनी से प्यार नहीं हुआ लेकिन किज्जी मैनी के फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गई। मैनी को भी अपने फिल्म के लिए हीरोइन मिल गई है। फिल्म की शूटिंग शुरू होती है। इसी बीच किज्जी ने वह गाना जो की अधूरा है वह मैनी को सुनने को दिया। दरहसल किज्जी फेमस म्यूजिशियन अभिमन्यु वीर के गानो की फैन है। अभिमन्यु वीर से मिलना किज्जी का सपना है।
यह गाना मैनी ने भी सुना और वह समझ पाया की किज्जी किस हद तक अभिमन्यु वीर से मिलने के लिए पागल है। एक दिन मैनी ने अभिमन्यु को कोई मेल कर दिया  और जब उधर से रिप्लाई आया तो उसने किज्जी को दिखाया। किज्जी तो जैसे ख़ुशी के मारे पागल हो गई। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था की अभिमन्यु वीर ने उसे रिप्लाई भेजा है। उस रिप्लाई के जवाब में किज्जी ने पूछा, “आपका आखरी गाना अधूरा क्यों है?” उधर से जवाब आया, “यह में शब्दों में नहीं बता सकता। अगर आपको जानना है तो पेरिस जहाँ में हूँ वहाँ आपको आना पड़ेगा।”
फिर किज्जी पागल हो गई पेरिस जाने के लिए। पर उसके पेरिस जाने में काफी बाधाए थी। सबसे पहले तो किज्जी की माँ ने उसे पेरिस जाने से इंकार कर दिया और कहा, “इस हालत में हम तुम्हे अकेले नहीं जाने दे सकते।” इस बार तो किज्जी के पापा ने भी उसे इंकार कर दिया। पर किज्जी के जिद पर यह तीनों पहुंचे डॉ. झा के पास। डॉ. झा को भी इस हालत में किज्जी का पेरिस जाना अच्छा नहीं लगा। इसलिए उन्होंने पहले तो किज्जी को इजाजत देने से इंकार कर दिया पर किज्जी के जिद के बजह से उन्होंने एक शर्त पर इजाजत दी। उन्होंने किज्जी से कहा, “अगर तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ जाए तो तुम जा सकती हो।” किज्जी के माँ ने भी आखिरकार किज्जी के जिद के आगे पेरिस जाने की हामी भर दी।
अब किज्जी खुश थी की वह मैनी और उसके माँ के साथ पेरिस जाकर अपने फेवरेट म्यूजिशियन अभिमन्यु वीर से मिल सकेगी। कुछ पल के लिए ही सही लेकिन जिंदगी ने उसे कुछ तो खुशिया दे ही दी है। पर तभी एकदम से किज्जी की तबियत बिगड़ गई। कैंसर ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और किज्जी को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। किज्जी जब हॉस्पिटल पहुँची तब ऐसा लगा जैसे उसकी जिंदगी थम गई हो। उसके पिता ने इस हालत में भी अपने चेहरे पर मुस्कान ही दिखाई। उसकी माँ भी बिलकुल नहीं रोइ।
मैनी हॉस्पिटल के बाहर बैठा था। वह किज्जी के ठीक होने का इंतजार कर रहा है। पर किज्जी ने उससे मिलने से इंकार कर दिया। उसे डर है की जब वह मैनी को छोड़ के जाएगी तब उसे और तकलीफ न हो। पता नहीं वह यह सदमा बर्दाश कर पाएगा या नहीं। इसलिए किज्जी ने फैसला किया की वह अब मैनी से कभी नहीं मिलेगी। फिर किज्जी के पिता ने मैनी से कहा, “किज्जी तुमसे नहीं मिलना चाहती इसलिए तुम यहाँ से चले जाओ।”
मैनी वहाँ से चला तो गया लेकिन घर पहुंचकर किज्जी बहुत रोइ। उसके पिता ने उससे कहा, “मैनी का हक़ है तुम्हारे साथ रहने का। वह तुम्हे खोने का गम बर्दाश कर पाएगा या नहीं यह तुम उस पर छोड़ दो। उसे अपने से अलग मत करो।” किज्जी को अपनी पिता की बातें ठीक लगी इसलिए जब मैनी ने किज्जी को फ़ोन किया तब उसने उठा ही लिया। मैनी तुरंत उससे मिलने आ गया। अब किज्जी ने यह फैसला कर लिया की अब चाहे जो भी हो पेरिस तो वह जाकर ही रहेगी।
मैनी ने किज्जी के पिता को समझाया और कहा, “मैं एक बस्केटबॉल प्लेयर बनना चाहता था पर मुझे जब अपने जिंदगी में दिन कम दिखे तब मैंने मेरा वह सपना बस्केटबॉल प्लेयर बनने का, उसे छोड़ दिया। पर किज्जी का सपना तो बहुत छोटा है अभिमन्यु वीर से मिलने का। आप उससे उसका सपना मत छीनिये। फिर किज्जी के पिता ने उसे पेरिस जाने की इजाजत दे दी। और आखिरकार किज्जी अपने माँ और मैनी के साथ पेरिस पहुँच ही गई। किज्जी मैनी से बहुत कुछ कहना चाहती है। मैनी जिसके आते ही उसकी जिंदगी हसीन हो गई है, उसने सोचा भी नहीं था की जिंदगी के इस मोड़ पर उसे अपना प्यार मिलेगा। बहुत जल्द ही किज्जी मैनी से अपने प्यार का इजहार करने वाली थी। लेकिन उस वक़्त तो उसे अपने फेवरेट म्यूजिशियन से मिलना था।
आखिरकार किज्जी का सपना पूरा हो ही गया। कैफे में उसकी मुलाक़ात हुई अभिमन्यु वीर से। किज्जी ने बड़ी उत्सुकता से पूछा, “आपने अपना आखरी गाना अधूरा क्यों छोड़ दिया।” अभिमन्यु वीर ने पहले तो उसके सवालो का जवाब बड़े ही मजाकिया अंदाज में दिया। अभिमन्यु वीर का बात करने का तरीका किज्जी और मैनी को ठीक नहीं लगा इसलिए वह वहाँ से जाने लगे। तभी अभिमन्यु वीर ने अपना सच कहा। दरहसल अभिमन्यु जिससे प्यार करता था वह उसे छोड़ कर जा चुकी है।
उसने यह वादा किया था की वह हमेशा मुस्कुराता रहेगा। पर यह उसके लिए इतना आसान नहीं था। इसलिए अभिमन्यु वीर ने अपना आखरी गाना अधूरा ही छोड़ दिया। यह सब सुनकर किज्जी बहुत उदास हो गई। वह अब जान चुकी है की सबकी जिंदगी अधूरी है। उसे यह भी समझ आ गया था की कोई भी हमेशा साथ नहीं रहता। सायद मैनी से उसका साथ भी हमेशा नहीं रहने वाला।
वापस इंडिया आकर किज्जी अपने आप को रोक नहीं पाई और उसने अपने प्यार का इजहार मैनी से कर ही दिया। पर उसने जब अपने जस्बादो को मैनी से शेयर किया तब मैनी के चेहरे पर ख़ुशी की जगह उदासी थी। मैनी ने बताया की अब उसके पास ज्यादा वक़्त नहीं है। कुछ ही दिनों में उसकी जिंदगी थम जाएगी। यह जानकर किज्जी ने उसे गले लगा लिया। पर घर आकर अपने आपको रोने से नहीं रोक पाई। उसे डर था की एक दिन मैनी को छोड़कर वह चली जाएगी। पर मैनी ही उससे पहले किज्जी को छोड़कर जा रहा है।
अगले दिन मैनी ने किज्जी को कॉल किया और कहा, “मेरी हालत बहुत ख़राब है जल्दी से मुझे लेने आ जाओ।” किज्जी जब पहुँची तो मैनी को उस हालत में देखकर डर गई। उसने तुरंत एम्बुलेंस बुलाया। अपने प्यार को इस तरह तड़पता देखकर उससे नहीं रहा जा रहा। इस समय किज्जी भूल चुकी है की उसकी खुद की जिंदगी ही बहुत कम बची है। वह तो बस मैनी के लिए फिक्रमंद है। आखिर में वही हुआ जो होना था। मैनी उसे छोड़कर चला गया। अब किज्जी के पास मैनी नहीं था बस उसकी यादे था। वह लम्हे थे जो दोनों ने  जिंदगी से चुरा लिए थे।
शाम को मैनी के ट्रिब्यूट में वह फिल्म चलाई गई जिसे जेपी ने शूट किया था। सभी मौजूत थे मैनी के सब दोस्त, रिश्तेदार, किज्जी के पेरेंट्स, जेपी सब। फिल्म को देखकर किज्जी मैनी को महसूस कर पा रही थी। वह गाना भी था जिसे अभिमन्यु वीर ने अधूरा छोड़ दिया था। उसे मैनी ने पूरा किया और उस फिल्म में डाला। अब किज्जी को यह महसूस हो रहा था की मैनी बस कुछ ही दिनों के लिए उसके जिंदगी में आया था। खुद तो चला गया और किज्जी के दिल में अपनी जगह बना गया।
तो दोस्तों आपको इस फिल्म की कहानी “2020 में सुशांत की आखिरी फिल्म “दिल बेचारा” की कहानी” पढ़कर कैसी लगी निचे कमेंट करके जरूर बताएगा और अगर देखा हो तो बताएगा की फिल्म आपको कैसी लगी और उसकी स्टोरी कैसी लगी। अगर आपको फिल्मों की कहानी पढ़ना अच्छा लगता है तो इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे। मैं ऐसी और भी कहानिया आपके लिए लेकर आऊँगा।
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