True Friend and Greedy Friend Story in Hindi

सच्चा दोस्त और लालची दोस्त | True Friend and Greedy Friend Story in Hindi

True Friend and Greedy Friend Story in Hindi

 

सच्चा दोस्त और लालची दोस्त

एक गांव में में दो दोस्त रहते थे। उनका नाम था दयाराम और बलराम। दयाराम बहुत ही नम्र और दयालु था। जबकि बलराम बहुत ही मतलबी और झूठा था। एक दिन, दोनों दोस्त पैसा कमाने शहर निकले। दोनों ने बहुत मेहनत की। दोनों ने खूब सारा पैसा कमाया। जैसे ही दोनों गांव जाने लगे, बलराम के मन में एक बिचार आया। उसने रास्ते में एक पेड़ देखा ओर दयाराम से कहा, “क्यों न हम अपना धन इस  पेड़ के खोकले में छुपा दे। और जब सुबह लौटेंगे तो अपने साथ यह धन ले जायेंगे।
दयाराम तैयार हो गया और दोनों ने अपना धन उस पेड़  खोकले में छुपा दिया। फिर दोनों दोस्त गांव की तरफ निकल पड़े। बलराम आधी रात को उस पेड़ के खोकले से सारा धन बाहर निकाला और चुरा लिया। दूसरे दिन, जब दोस्त धन ले के लिए उस पेड़ के पास गया। उन्होंने देखा पैसा जगह पर नहीं है। दयाराम ने कहा, “हम दोनों के पैसे चोरी हो गए है।”
दोनों दोस्त गांव के सरपंच के पास गए और उन्हें सारी बातें बताई। दोनों दोस्त ने एक दूसरे को दोष दिया। बलराम ने कहा, “इसका जवाब तो वही पेड़ दे सकता है, जिस पेड़ के खोकले में हमने पैसे छुपाए थे।”  फिर सभी लोग उस पेड़ के पास पहुंचे। बलराम ने जोर से पेड़ की तरफ देखकर कहा, “अरे पेड़, तुम ही बताओ की कल रात यहाँ पर क्या हुआ था। किसने यहाँ से पैसे चोरी की है।”  बलराम के यह कहते ही  पेड़ से बहुत जोर से आवाज आई, “दयाराम कल रात को यहाँ पर आया था और सारा धन चुराकर अपने साथ ले गया।”
पेड़ की बातें सुनकर सभी लोग चौंक गए। इधर दयाराम को बलराम की चाल का पता चल गया था। दयाराम ने कहा, “बेबकुफ़ पेड़, मैं तुम्हे सबक सिखाकर रहूँगा।”  यह कहकर दयाराम ने लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े इखट्टा करना शुरू कर दिया। और उस पेड़  के चारों तरफ बिछा दिया और आग लगा दी। कुछ समय बाद, बलराम के पिता चिकते हुए पेड़ से बाहर निकले। गांव के सरपंच ने कहा, “तुमने ऐसा क्यों किया।”  बलराम के पिता बोले, “मेरे बेटे ने मुझे यहाँ इस पेड़ पर छुपे रहने के लिए कहा और कहा की  ऐसा बताना की दयाराम सारा पैसा चुराकर ले गया। असल में सारा धन मेरे बेटे  ने चुराई।”  सरपंच ने बलराम को सजा दी। और दयाराम को अपना धन वापस मिल गया।
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