चीटी और घमंडी हाथी - Hindi Moral Story

चीटी और घमंडी हाथी की कहानी | Chiti or Ghmandi Haathi ki Kahani | Hindi Moral Story

Chiti or Ghmandi Haathi ki Kahani

 

चीटी और घमंडी हाथी 

एक बार की बात है एक नदी के सामने एक घना जंगल हुआ करता था और उस जंगल में मीठे पानी का एक तालाक था। उस तालाक के किनारे बोहोत सारे पेड़ पौधे थे उस पेड़ के डाली में एक छोटी सी चीटी रहा करती थी। उस जंगल में एक दिन बोहोत बड़ा तूफान आया उस तूफान की रफ़्तार को सेहेन न कर पाया चीटी तालाक के पानी में गिर गयी।
उस तालाक से चीटी ने बोहोत कोशिश की किनारे पर पहुंचने की लेकिन किनारे पहुंचने के लिए उसके पास ताकत बची ही नहीं थी। उस वक़्त एक जंगली हाथी आया तालाक के पास अपना प्यास बुझाने के लिए। अपने लम्बे सूंड़ से पानी को खींचकर पि रहा था उस हाथी  देखकर चीटी ने कहा की मेरी मदत करो में पानी में गिर गया हु अगर तुम मेरी मदत करोगे तो किसी समय में भी तुम्हारी मदद करूँगा।
चीटी की बातें सुनकर हाथी बोहोत जोर से हसने लगा और बोला की तुम इतनी छोटी चीटी होकर मेरी क्या मदद करोगे। इस जंगल में सबसे बड़ा प्राणी हु में और तुम इतने छोटे तो फिर तुम कैसे मेरी मदद कर सकते हो। चीटी ने फिर हाथी से बोहोत बिनती की वे उसे बचाले बोहोत सोचने के बाद हाथी ने चीटी को अपने सूंड़ से तालक से बाहार निकाला फिर चीटी हाथी को धन्यवाद कहकर चला गया।

कुछ दिनों बाद शिकारियों का एक झुंड हाथियों का पीछा किया क्युकी उन्हें उनके दांत चाहिए थे और हाथीयों ने भी अपना जान बचाने के लिए बोहोत तेजी से भागने लगा। एक भी हाथी  शिकारियों के हाथ नहीं लगा इसलिए उन्हें बोहोत गुस्सा आया और बिचार करने लगे।

 

शिकारियों ने सोचा की अगर वे तालाक के पानी में ज़हर मिला देंगे तो हाथी उस पानी को पीकर मर जायेंगे और पेड़ पर बैठा चीटी शिकारियों के सारी बातें चुपके से सुनली। जिस हाथी ने चीटी की जान बचायी थी वे तालाक के पास आया पानी पिने के लिए फिर चीटी तेजी से हाथी के पास आकर बोलता है की मत पियो यह पानी। शिकारियों ने तुम हाथियों को मारने के लिए तालाक के पानी में ज़हर मिला दिया है।

 

हाथी को यह सुनकर बिश्वास नहीं हुआ फिर चीटी ने कहा वे देखो तालक के सभी मछली इस पानी को पीकर मर गए तुम्हे बिश्वास नहीं आता तो खुद देखलो। हाथी ने देखा तालाक के सभी मछली उस ज़हरीले पानी को पीकर मर गयी है इसलिए हाथी ने बिना पानी पिए ही वहासे वापस चला गया।

दूसरे दिन हाथी चीटी के पास आकर बोला मुझे माफ़ करदो मैंने उस दिन तुम्हारी बोहोत बेज़ती की थी क्युकी तुम बोहोत छोटे हो, में बोहोत शर्मिंदा हु मुझे माफ़ करदो। अगर कल तुमने मुझे नहीं बताया होता की तालाक के पानी में ज़हर मिला है तो में मर जाता।

इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे किसी की भी बेज़ती नहीं करनी चाहिए कभी भी छोटे हो या बड़े हमे सबकी एक समान इज़्ज़त करनी चाहिए।

 

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